स्वास्थ्य

महिलाओं के मेनोपॉज का समाधान है आयुर्वेद, जानिए विशेषज्ञ की राय

डेस्क: आयुर्वेद, भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली, शरीर और मन दोनों के संतुलन पर आधारित है। मेनोपॉज जैसे प्राकृतिक संक्रमण काल में आयुर्वेद न केवल लक्षणों को शांत करता है बल्कि पूरे शरीर को संतुलित और समर्थ बनाता है। मेनोवेदा की को-फाउंडर (Menoveda Co-founder) और मेनोपॉज कोच तमन्ना सिंह (Menopause Coach Tamanna Singh) ने मेनोपोज में आयुर्वेद की भूमिका से जुड़ी विशेष जानकारी नारी पंजाब केसरी पर साझा की हैं, हर महिला का इस बारे में जानकारी होना जरूरी है ताकि वह खुद को हेल्दी रख सके।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: मेनोपॉज को ‘रजोनिवृत्ति’ कहा गया है। यह वात दोष की अधिकता और अग्नि (पाचन शक्ति) के असंतुलन से जुड़ा होता है। इस असंतुलन को दूर कर शरीर को सहज अवस्था में लाना ही आयुर्वेद का लक्ष्य होता है।

मुख्य जड़ी-बूटियां और औषधियां

शतावरी: हार्मोनल संतुलन और ऊर्जा के लिए श्रेष्ठ
अशोक: भारी ब्लीडिंग और मूड स्विंग्स में फायदेमंद

लोद्र: योनि वायु और त्वचा संबंधी समस्याओं में उपयोगी
गुडूची और त्रिफला: इम्यूनिटी और पाचन में सहायक

पंचकर्म थेरेपी: विशेष रूप से अभ्यंग, शिरोधारा और बस्ती जैसे उपचार तनाव, अनिद्रा, और शरीर की थकान में राहत देते हैं।

आहार और दिनचर्या

गर्म, सुपाच्य भोजन
तिल का तेल, घी और जौ का सेवन
नियमित दिनचर्या, योग और ध्यान अनिवार्य

क्यों चुनें आयुर्वेद

दवा नहीं, संतुलन की विधि
साइड इफेक्ट्स नहीं, संपूर्ण उपचार
शरीर की प्रकृति के अनुसार समाधान

मेनोपॉज के दौर में आयुर्वेद महिलाओं को केवल राहत ही नहीं देता, बल्कि उन्हें फिर से ऊर्जावान, संतुलित और आत्मविश्वासी बनाने में मदद करता है। यह एक भारतीय समाधान है, जो अब पूरी दुनिया अपना रही है।

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