अंतर्राष्ट्रीय

क्या भारत पर कोई प्रतिबंध लगाने वाले हैं ट्रंप? क्यों बोले- हां मैं तैयार हूं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर और प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर और प्रतिबंध लगाने की मांग की जिसमें भारत का नाम प्रमुख है। उनका तर्क है कि इसी तरह की कार्रवाई से व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन से बातचीत करने के लिए मजबूर होंगे।

 नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर और प्रतिबंध लगाने के लिए वे तैयार हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हां, मैं तैयार हूं।”

उन्होंने इसके अलावा कुछ नहीं कहा, लेकिन रूस से तेल खरीदारों पर अमेरिका और अधिक टैरिफ और अन्य दबाव डालने की दिशा में कोशिश कर सकता है।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने क्या कहा?

ट्रंप के “हाँ” कहने के बाद अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर और प्रतिबंध लगाने की मांग की। उनका कहना है कि ताकि रूस की अर्थव्यवस्था को “तबाह” किया जा सके। बता दें कि इस सूची में भारत का नाम प्रमुख है।

बेसेंट का तर्क था कि सिर्फ इसी तरह की कार्रवाई से व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन से बातचीत करने के लिए मजबूर होंगे। अलास्का में पुतिन के साथ शिखर सम्मेलन के बावजूद, शांति के लिए ट्रंप की मध्यस्थता अभी तक सफल नहीं हुई है। असल में, इसके बाद युद्ध और बढ़ गया है।

“रूसी तेल खरीदने वाले देशों” का जिक्र करते हुए बेसेंट ने किसी देश का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इस मुद्दे पर भारत ही अमेरिका के टैरिफ का सबसे बड़ा निशाना है। बेसेंट ने कहा, “अगर अमेरिका और ईयू रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर और प्रतिबंध और टैरिफ लगाते हैं तो रूसी अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी और इससे राष्ट्रपति पुतिन बातचीत के लिए तैयार हो जाएंगे।”

हाल ही में ट्रंप ने की थी अहम टिप्पणी

यह नई घटनाएं ऐसे समय में घटीं जब कुछ दिन पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रेस और सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे की प्रशंसा की थी। युद्ध की शुरुआत से ही रूस, अमेरिका और यूरोप दोनों के कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, लेकिन उसने भारत, चीन और अन्य देशों में अपने तेल और गैस के लिए ग्राहक ढूंढ लिए हैं, जिससे उसे राजस्व मिलता रहेगा।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस सहित शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका इस राजस्व प्रवाह को रोकना चाहता है। इसीलिए उन्होंने यूक्रेन संघर्ष को “मोदी का युद्ध” कहा है और ट्रंप ने तो भारत पर “रूसी युद्ध मशीन को बढ़ावा देने” का आरोप भी लगाया है।

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