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आम बजट में दूरसंचार क्षेत्र की व्यवहार्यता बढ़ाने को नीतिगत उपाय करने की अपील

देश में डिजिटल संचार पारितंत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले शीर्ष उद्योग निकाय सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने वित्त मंत्रालय को आम बजट 2024-25 के लिए अपनी सिफारिशें सौंपी हैं जो इस उद्योग की वित्तीय बेहतरी पर केंद्रित है।

सीओएआई का मानना है कि आदर्श रूप में यूएसओएफ शुल्क खत्म किया जाना चाहिए।
हालांकि, यह संभव नहीं हो तो मौजूदा यूएसओ निधि (77,000 करोड़ रुपये) खर्च होने तक एजीआर के 5 प्रतिशत का यूएसओ अंशदान निलंबित किया जा सकता है।

इसके अलावा, लाइसेंस शुल्क जल्द से जल्द 3 प्रतिशत से एक प्रतिशत पर लाया जाना चाहिए जिससे दूरसंचार विभाग के केवल प्रशासनिक खर्चों को पूरा किया जा सके।

सकल राजस्व (जीआर) की मौजूदा परिभाषा में सभी दूरसंचार गतिविधियों से आय शामिल है।
दूरसंचार गतिविधि शब्द परिभाषित नहीं है, बल्कि इसमें ऐसी गतिविधियां शामिल हैं जो संयोग से दूरसंचार गतिविधि समझी जाती है।
इसलिए, जीआर की परिभाषा में यह पूरी तरह से स्पष्ट होना चाहिए कि उन गतिविधियों से आय जिनके लिए कोई लाइसेंस आवश्यक नहीं है, जीआर का हिस्सा नहीं होना चाहिए।

सीओएआई ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 72 के तहत दूरसंचार आपरेटरों के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू किए जाने का अनुरोध किया है जहां कारोबारी नुकसानों को आगे ले जाया जा सके और मौजूदा आठ वर्ष से 16वें आकलन वर्षों तक इसे समायोजित किया जा सके।
आठ वर्षों बाद कारोबारी नुकसान की भरपाई नहीं होना, पहले से तनावग्रस्त दूरसंचार उद्योग के लिए संकट खड़ा करने वाला होगा (विभिन्न कारकों की वजह से जैसे एजीआर मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले, उत्पाद के कम मूल्य निर्धारण की वजह से टैरिफ मार्जिन में कमी, भारी पूंजी निवेश के साथ अतिरिक्त स्पेक्ट्रम लेने की आवश्यकता आदि) क्योंकि वसूली चरण के दौरान आय, कर अदायगी और एजीआर, स्पेक्ट्रम आदि से संबंधित अन्य भुगतान से जुड़ी होगी जिससे इस क्षेत्र के अनुचित मुश्किल पैदा होगी।

सीओएआई ने अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार व राज्य सरकार और विकास प्राधिकरणों द्वारा “प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के लिए असाइनमेंट ऑफ राइट” पर सेवा कर मुक्त किया जाना चाहिए।

सरकार के देय एजीआर की गणना के लिए पद्धति के संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्णय ने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर अतिरिक्त देनदारी का सृजन किया है।

जीएसटी प्रारंभ होने से पहले एजीआर पर सेवा शुल्क का भुगतान किया जाता था और इसका क्रेडिट भी उपलब्ध कराया जाता था।
हालांकि, जीएसटी शुरू होने के बाद सेवाकर के साथ उच्चतम न्यायालय के निर्णय की वजह से एजीआर के अतिरिक्त भुगतान से सेवाकर की राशि दूरसंचार कंपनियों के लिए लागत के तौर पर हो जाएगी क्योंकि उन्हें क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा।
भारत सरकार को उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में एजीआर की अतिरिक्त देयता पर सेवाकर के भुगतान से छूट देना चाहिए।

अप्रैल, 2016 से जून, 2017 की अवधि के लिए सेवाकर भुगतान से छूट और नवंबर, 2018 में जारी विभिन्न सेवाओं पर छूट देकर राहत दिए जाने का अनुरोध किया गया है।

वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सरकार आरसीएम (रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म) के तहत भुगतान किए जाने वाले सेवाकर के नकद रिफंड के दावे के लिए एक समयबद्ध आसान प्रक्रिया निर्धारित कर सकती है जिससे इस उद्योग को कुछ हद तक मदद मिलेगी।

सरकार ने पांच-छह वर्षों के दौरान दूरसंचार उपकरण पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया है जिससे दूरसंचार कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ा है और इससे भारत में 5जी सेवाओं की शुरुआत प्रभावित हुई है।

सीओएआई ने उन निश्चित दूरसंचार उपकरण पर सीमा शुल्क समाप्त करने का अनुरोध किया है जिससे इस महत्वपूर्ण ढांचे को खड़ा करने में लागत बढ़ती है।

संगठन ने अनुरोध किया है कि सीमा शुल्क को घटाकर शून्य किया जाना चाहिए और इसे भारत में दूरसंचार गियर के विनिर्माण के लिए पारितंत्र का सृजन होने के आधार पर धीरे धीरे बढ़ाया जाना चाहिए।

जब तक भारत में अच्छी गुणवत्ता के उपकरण किफायती मूल्य पर उपलब्ध न हों, 4जी 5जी से जुड़े नेटवर्क उत्पादों के साथ ही अन्य संबंधित उत्पादों के लिए सीमा शुल्क घटाकर शून्य किया जाना चाहिए।

दूरसंचार कंपनियां दुनियाभर में डेटा के हाई-स्पीड ट्रांसफर के लिए सबमैरीन केबल पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
भारत में सबमैरीन केबल बिछाने के काम में लगे वैसेल्स को दी गई मौजूदा सीमा शुल्क छूट 31 मार्च, 2024 को समाप्त होने जा रही है।
यह छूट आगे बढ़ाना अपरिहार्य है जिससे केबल बिछाने से जुड़ी लागत को उल्लेखनीय रूप से बढ़ने से रोका जा सके।

इस वृद्धि से भविष्य में सबमैरीन केबल बिछाने का कार्य बुरी तरह प्रभावित होगा जिससे ग्राहकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवा की गुणवत्ता से समझौता करना पड़ेगा।

वर्तमान में, दूरसंचार ऑपरेटर द्वारा लाइसेंस शुल्क, स्पेक्ट्रम यूसेज शुल्क और नीलामी में हासिल स्पेक्ट्रम के भुगतान के संबंध में दूरसंचार विभाग को किए गए भुगतान पर एक रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के तहत जीएसटी का भुगतान किया जा रहा है।

एक रिवर्स चार्ज आधार पर नकदी में जीएसटी का भुगतान और इसके बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) उपयोग से दूरसंचार कंपनियों के भीतर काफी आईटीसी जमा हो गई है जिससे बड़ी मात्रा में कार्यशील पूंजी फंसी हुई है और इससे इन कंपनियों पर काफी वित्तीय बोझ बढ़ा है।

दूरसंचार कंपनियां इन शुल्कों से संबंधित भुगतान पर आरसीएम के तहत जीएसटी से छूट का आग्रह कर रही हैं जिससे वित्तीय दबाव घट सके और आईटीसी जमा होना रुक सके।

सीओएआई ने सरकार से लाइसेंस शुल्क, स्पेक्ट्रम यूसेज शुल्क और स्पेक्ट्रम अधिग्रहण शुल्क से इस क्षेत्र को बहुत जरूरी कुछ राहत के लिए छूट देने का अनुरोध किया है।

वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रानिक क्रेडिट लेजर में उपलब्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट के उपयोग के जरिए सरकारी सेवाओं पर आरसीएम के भुगतान का प्रस्ताव किया गया है।

सीओएआई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डाक्टर एसपी कोचर ने कहा, “हाल ही में अग्रगामी सुधार एक जबरदस्त एवं भविष्य उन्मुखी दूरसंचार क्षेत्र की दिशा में एक सकारात्मक इरादे का संकेत देते हैं जो भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को गति देने में सक्षम हैं।
लेकिन, इस संभावना का पूर्ण दोहन करने के लिए हमें इस क्षेत्र के विस्तार में बाधा बन रही वित्तीय अड़चनों को दूर करना होगा।
शुल्क बोझ घटाना ना केवल आर्थिक रूप से आवश्यक है, बल्कि हमारे डिजिटल भविष्य में एक रणनीतिक निवेश है।

5जी शुरू करने, नेटवर्क विस्तार और फाइबर विस्तार के लिए आगामी केंद्रीय बजट में पर्याप्त संसाधनों का आबंटन कर सरकार इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की संभावनाओं का पूर्ण दोहन कर सकती है और हमें डिजिटल तौर पर सशक्त राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़ने में सहयोग कर सकती है।

हम सरकार से इन नियामकीय बाधाओं को दूर कर आगामी केंद्रीय बजट में दूरसंचार आधारभूत ढांचा विकास को प्राथमिकता देने का पुरजोर आग्रह करते हैं।

ऐसा करने से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की संभावना का पूर्ण दोहन हो सकेगा और भारत एक जबरदस्त एवं समावेशी डिजिटल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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