
नई दिल्ली: बीजेपी और उसके पुराने सहयोगी अन्नाद्रमुक (AIADMK) में गठबंधन की अटकलों पर विराम लग गया है और इसकी औपचारिक घोषणा कर दी गई है। इससे पहले शुक्रवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जब एक दिवसीय दौरे पर तमिलनाडु पहुंचे थे, तभी यह साफ हो गया था कि गठबंधन की घोषणा कभी भी हो सकती है। उनका यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब के अन्नामलाई की जगह प्रदेश भाजपा को नैनार नागेंद्रन के रूप में नया अध्यक्ष मिलना तय हो गया है। AIADMK और बीजेपी के बीच गठबंधन में सबसे बड़ी बाधा पूर्व आईपीएस अन्नामलाई को ही माना जाता रहा है।
बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच फिर से गठबंधन होने की चर्चा पर शुक्रवार को औपचारिक तौर पर विराम लग गया। दोनों दल फिर से एक साथ आने पर सहमत हो गए हैं। पिछले महीने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक के चीफ ईके पलानीस्वामी (EPS) अमित शाह से मिलने दिल्ली आए थे। इसके बाद से ही इन संभावनाओं को बल मिला था कि तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता का पार्टी फिर से एनडीए का हिस्सा बन सकती है।
लोकसभा चुनाव से पहले टूटा था गठबंधन
दोनों दलों के बीच खटास तब से पैदा हुई थी, जब प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई ने एआईएडीएके के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसकी वजह से आखिरकार लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन टूट गया। हालांकि, अन्नामलाई के करिश्माई नेतृत्व का बीजेपी को वोट शेयर के रूप में बड़ा फायदा भी मिला, लेकिन वह सीटों में तब्दील नहीं हो सका।
अन्नामलाई खुद ही पद छोड़ने का दे चुके थे संकेत
उसी के बाद से कहीं न कहीं दोनों ही दलों की ओर से इस तरह के संकेत मिलने शुरू हो गए कि एक बार फिर से साथ आने का प्रयोग किया जा सकता है। पिछले साल दिसंबर में विदेश से पढ़ाई करके लौटने के बाद इसको लेकर अन्नामलाई ने भी अपना सुर नरम कर लिया था।
जहां तक भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष की बात है तो हाल ही में अन्नामलाई खुद ही कह चुके थे कि उनकी ‘प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में दिलचस्पी नहीं है’ और वह ‘एक सामान्य कार्यकर्ता’ की तरह कार्य करना चाहते हैं।
नैनार नागेंद्रन के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष चुने गए
अन्नामलाई की जगह अब प्रदेश में नैनार नागेंद्रन के बीजेपी के नए अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। क्योंकि, इसके लिए उन्होंने ही एकमात्र नामांकन डाला था। वे प्रदेश विधानसभा में पार्टी के सदन के नेता हैं। वैसे बीजेपी के अंदर के लोगों का कहना है कि अन्नामलाई की जगह नागेंद्रन को कमान सौंपने के पीछे मूल रूप से राज्य का जातीय और क्षेत्रीय समीकरण है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की भी कोशिश
नागेंद्रन तिरुनेलवेली के एक प्रमुख थेवर नेता हैं और सूत्रों का भी कहना है कि वे केंद्रीय नेतृत्व के भी पसंद हैं। वहीं अन्नामलाई और पलानीस्वामी दोनों ही गौंडर समाज से आते हैं, जिनका पश्चिमी कोंगु इलाके में काफी प्रभाव है। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी अन्नामलाई के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता निकालकर गठबंधन के लिए कोई ठोस समीकरण बनाने को प्राथमिकता दे रही है। तमिलनाडु की राजनीति में इन दोनों बदलावों से साफ हो गया कि अमित शाह की चेन्नई में मौजूदगी के क्या मायने थे।
2021 के तमिलनाड विधानसभा चुनाव में बीजेपी और एआईएडीएमके गठबंधन का कुल वोट शेयर 36% के लगभग था। वहीं,विरोधी डीएमके का वोट शेयर 37.7% था। जबकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी अकेले लड़कर 11.38% वोट शेयर तक जरूर पहुंची थी,लेकिन उसे एक भी सीट नहीं प्राप्त हुई थी। वहीं एआईएडीएमके भी 20.66% वोट लेकर भी खाली हाथ रहा था।



