छत्तीसगढ़

अंबिकापुर अग्निकांड : घनी आबादी में चल रहा था बारूद का ‘खेल’, फोरेंसिक जांच से खुलेगा अवैध भंडारण का राज

vअंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर शहर के बहुचर्चित मुकेश पटाखा और प्लास्टिक दुकान अग्निकांड मामले में जिला प्रशासन ने जांच की गति तेज कर दी है। कलेक्टर द्वारा गठित उच्च स्तरीय संयुक्त कमेटी की निगरानी में सोमवार को फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और मलबे से महत्वपूर्ण नमूने एकत्रित किए।

विशेषज्ञों ने जलकर खाक हो चुकी दुकान और गोदाम के भीतर बारीकी से निरीक्षण करते हुए जले हुए पटाखों के रैपर, खोखे और प्लास्टिक के पिघले हुए अवशेषों के सैंपल लिए हैं, जिनसे आग लगने के मुख्य कारण और भंडारण किए गए विस्फोटकों की श्रेणी का स्पष्ट पता चल सकेगा।

कलेक्टर के निर्देश पर गठित यह उच्च स्तरीय कमेटी मामले के हर पहलू की गहन जांच कर रही है और उन्हें 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपनी है। जांच में मुख्य रूप से सुरक्षा मानकों की अनदेखी और रिहायशी इलाके में विस्फोटक भंडारण की अनुमति मिलने जैसे गंभीर बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि 23 अप्रैल को हुई इस भीषण आगजनी ने पूरे शहर को दहला दिया था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित इस प्रतिष्ठान में नियमों को ताक पर रखकर भारी मात्रा में पटाखों का अवैध भंडारण किया गया था, जो सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि शहर के बीचों-बीच चल रहे इस अवैध कारोबार के कारण एक बड़ी अनहोनी होते-होते बची, जिसमें जनहानि की प्रबल संभावना थी। फिलहाल जनता दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने और शहर के भीतर संचालित ऐसे सभी खतरनाक गोदामों को बाहर स्थानांतरित करने की पुरजोर मांग कर रही है।

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