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आमलकी एकादशी 10 मार्च को, इस दिन करें यह खास स्तोत्र का जाप, सभी समस्याओं से मिलेगी मुक्ति

हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत महत्व माना जाता है। वहीं साल में कुल 24 एकादशी तिथियां पड़ती हैं। इनमें से एक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए आपको बताते हैं फाल्गुन माह में कब मनाई जाएगी रंगभरी एकादशी। आमलकी एकादशी के दिन करें इस स्तोत्र का जाप।

फाल्गुन माह को भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना माना जाता है। फाल्गुन माह में कई पर्व आते है जो जीवन में उत्साह लेकर आते है। वैसे तो साल में कुल 24 एकादशी तिथियां पड़ती है। इन्हीं में से एक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी जिसे रंगभरी एकादशी के नाम से जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का भी विधान है। आइए आपको बताते हैं फाल्गुन माह में कब मनाई जाएगी आमलकी एकादशी। इस दिन अगर आप भगवान विष्णु की पूजा करते समय इस स्तोत्र पाठ का जाप करें, इससे आपकी सारी समस्याएं दूर होगी।

आमलकी एकादशी 2025 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 09 मार्च 2025 को सुबह 07 बजकर 45 मिनट पर शुरु होगी और अगले दिन 10 मार्च 2025 को सुबह 07 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, 10 मार्च 2025 को आमलकी एकादशी व्रत रखा जाएगा।  

आमलकी एकादशी के दिन करें श्री विष्णु स्तोत्र का जाप

आमलकी एकादशी के दिन श्री विष्णु स्तोत्र का पाठ करने के विशेष महत्व है। अगर आपके जीवन में कोई परेशानी आ रही है, तो इस स्तोत्र का पाठ जरुर करें।

ऊं वासुदेवं हृषीकेशं वामनं जलशायिनम् ।

जनार्दनं हरि कृष्णं श्रीवक्षं गरुडध्वजम् ।।

वाराहं पुण्डरीकाक्षं नृसिंहं नरकान्तकम् ।

अव्यक्तं शाश्वतं विष्णुमनन्तमजमव्ययम् ।।

नारायणं गदाध्यक्षं गोविन्दं कीर्तिभाजनम् ।

गोवर्धनोद्धरं देवं भूधरं भुवनेश्वरम् ।।

वेत्तारं यज्ञपुरुषं यज्ञेशं यज्ञवाहकम् ।

चक्रपाणिं गदापाणिं शङ्खपाणिं नरोत्तमम् ।।

वैकुण्ठं दुष्टदमनं भूगर्भं पीतवाससम् ।

त्रिविक्रमं त्रिकालज्ञं त्रिमूर्तिं नन्दिकेश्वरम् ।।

रामं रामं हयग्रीवं भीमं रौद्रं भवोद्भवम् ।

श्रीपतिं श्रीधरं श्रीशं मङ्गलं मङ्गलायुधम् ।।

दामोदरं दमोपेतं केशवं केशिसूदनम् ।

वरेण्यं वरदं विष्णुमानन्दं वसुदेवजम् ।।

हिरण्यरेतसं दीप्तं पुराणं पुरुषोत्तमम् ।

सकलं निष्कलं शुद्धं निर्गुणं गुणशाश्वतम् ।।

हिरण्यतनुसङ्काशं सूर्यायुतसमप्रभम् ।

मेघश्यामं चतुर्बाहुं कुशलं कमलेक्षणम् ।।

ज्योतीरूपमरूपं च स्वरूपं रूपसंस्थितम् ।

सर्वज्ञं सर्वरूपस्थं सर्वेशं सर्वतोमुखम् ।।

ज्ञानं कूटस्थमचलं ज्ञानदं परमं प्रभुम् ।

योगीशं योगनिष्णातं योगिनं योगरूपिणम् ।।

ईश्वरं सर्वभूतानां वन्दे भूतमयं प्रभुम् ।

इति नामशतं दिव्यं वैष्णवं खलु पापहम् ।।

यासेन कथितं पूर्वं सर्वपापप्रणाशनम् ।

यः पठेत्प्रातरुत्थाय स भवेद्वैष्णवो नरः ।।

सर्वपापविशुद्धात्मा विष्णुसायुज्यमाप्नुयात् ।

चान्द्रायणसहस्राणि कन्यादानशतानि च ।।

गवां लक्षसहस्राणि मुक्तिभागी भवेन्नरः ।

अश्वमेधायुतं पुण्यं फलं प्राप्नोति मानवः ।।

जानिए श्री विष्णु स्तोत्र का जाप करने के लाभ

ज्योतिष के अनुसार, आमलकी एकादशी के दिन श्री विष्णु स्तोत्र का जाप करने से कई लाभ प्राप्त होते हैं। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन उनकी पूजा-अर्चना करने से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। इस दिन श्री विष्णु स्तोत्र का जाप करने दुखों को दूर करने में सहायता होती है। यह स्तोत्र मानसिक शांति और सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

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