संपादकीय

…सभी स्कूलों में हों सुविधाएं

स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की ओर से संचालित डेटा एग्रीगेशन प्लैटफॉर्म यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) प्लस की ताजा रिपोर्ट देश के स्कूली इन्फ्रास्ट्रक्चर में हुए सुधार के साथ ही उन अहम दिक्कतों की भी झलक देती है, जिन्हें दूर किया जाना बाकी है।

डिजिटल डिवाइड
रिपोर्ट में यह बात स्थापित होती है कि बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहतर हुई है। करीब 90% स्कूलों में बिजली और जेंडर स्पेसिफिक टॉयलेट जैसी सुविधाएं हैं। लेकिन अगर डिजिटल सुविधाओं की बात की जाए तो स्कूलों के बीच गहरी खाई दिखती है। मसलन, फंक्शनल कंप्यूटर महज 57.2% स्कूलों में उपलब्ध है और 53.9% स्कूलों के पास इंटरनेट ऐक्सेस है। हालांकि, इस मामले में पिछले वर्षों में हुई प्रगति का अंदाजा इस तथ्य से होता है कि 2021-22 की UDISE प्लस रिपोर्ट के मुताबिक 66% स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन नहीं थे।

स्कूल बढ़े, एनरोलमेंट घटा
यह तथ्य भी गौर करने लायक है कि देश में पिछले साल के मुकाबले स्कूलों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन एनरोलमेंट में गिरावट देखी गई है। जहां स्कूलों की संख्या 14.66 लाख से बढ़कर 14.71 लाख हो गई वहीं इनमें होने वाला स्टूडेंट्स एनरोलमेंट 25.17 करोड़ से घटकर 24.80 करोड़ हो गया। यह गिरावट कमोबेश सभी कैटिगरीज – लड़के लड़कियां, ओबीसी, अल्पसंख्यक आदि- में है।

ड्रॉपआउट का ट्रेंड
जहां तक ड्रॉपआउट यानी स्टूडेंट्स के स्कूल छोड़ने के मामलों की बात है तो इसमें सेकंडरी स्टेज में होने वाली बढ़ोतरी ध्यान देने लायक है। मिडल स्कूलों में जो ड्रॉपआउट दर 5.2% है, वह सेकंडरी स्टेज में आकर 10.9% तक पहुंच जाती है। जानकारों के मुताबिक, इसके पीछे OBC और SC/ST कैटिगरी के स्टूडेंट्स को दाखिले के डॉक्युमेंटेशन प्रॉसेस के दौरान होने वाली मुश्किलों और प्री-मैट्रिक व पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप जैसी सुविधाओं की कमी का हाथ हो सकता है।

टीचर-स्टूडेंट रेश्यो
एक और अहम पहलू है टीचर्स और स्टूडेंट्स के अनुपात यानी PTR का। इस मामले में विभिन्न राज्यों के बीच अंतर विशेष रूप से ध्यान खींचता है। एक तरफ झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य हैं, जहां सेकंडरी लेवल पर PTR राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तय मानक यानी 30:1 से भी ज्यादा है तो दूसरी ओर असम, ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्य काफी पीछे नजर आते हैं।

नई चुनौतियां
कुल मिलाकर, देश में स्कूली शिक्षा को बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर दिखता है। लेकिन इस दौरान नई चुनौतियां भी उभर रही हैं, जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। यूनिवर्सल एजुकेशन के लक्ष्य को ध्यान में रखें तो ड्रॉपआउट के ट्रेंड्स और PTR पर खास ध्यान देने की जरूरत है।

Show More

Daily Live Chhattisgarh

Daily Live CG यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, बिजनेस, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button