महाराष्ट्र में कर्मचारियों को नहीं मिली पूरी सैलरी, निशाने पर अजित पवार

मुंबई: महाराष्ट्र में लाडली बहन योजना के लाभार्थियों को कब 2100 रुपये मिलेंगे? इस सवाल को महाविकास आघाड़ी के घटक दल जहां कई बार उठा चुके हैं तो वहीं दूसरी तरफ राज्य में महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (MSRTC) के वेतन में देरी पर सरकार के अंदर ही नाराजगी सामने आ रही है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि अजीत पवार पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर एसटी कर्मचारियों की पगार रोकने का गंभीर आरोप लगाया। MSRTC में 87 हजार कर्मचारी हैं। कर्मचारियों को 9 अप्रैल को मार्च महीने का वेतन मिला था। इसमें उन्हें सिर्फ 56 फीसदी सैलरी मिली है। एमएसआरटीसी प्रतिदिन राजस्व संग्रह लगभग 28 करोड़ रुपये है। इसमें 40% विभिन्न रियायतों के भुगतान में चला जाता है। शेष राशि का अधिकांश हिस्सा ईंधन और बसों के रखरखाव पर खर्च होती है।
वित्त विभाग की जिम्मेदारी है
मंत्री सरनाईक ने कहा अन्य सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर एसटी कर्मचारियों को भी समय पर वेतन देना वित्त विभाग की जिम्मेदारी है। हम अजीत से भीख नहीं मांग रहे हैं लेकिन वित्त विभाग के अधिकारी परिवहन विभाग की फाइलें वित्त मंत्री तक पहुंचने ही नहीं देते हैं। सरनाईक के उग्र तेवर देखने के बाद वित्त विभाग एसटी कर्मचारियों के बकाया वेतन के भुगतान के लिए 120 करोड़ रुपयेए के त्वरित भुगतान को तैयार हो गया है। महायुति 2.0 में भी वित्त विभाग अजित पवार के पास है। महायुति के पहले कार्यकाल ऐसी परिस्थिति का निर्माण नहीं हुआ था।
सरनाईक बोले-सिर्फ 272 करोड़ मिले
परिवहन मंत्री सरनाईक का कहना है कि वित्त विभाग से 928 करोड़ रुपये मांगे थे लेकिन हमें सिर्फ 272 करोड़ रुपये दिए गए। उन्होंने कहा कि एसटी कर्मचारियों के मार्च महीने के वेतन भुगतान के के लिए सिर्फ 56 प्रतिशत राशि वेतन ही मिली थी। शेष 44 फीसदी के लिए उप मुख्यमंत्री एकनाथ के हस्तक्षेप के बाद वित्त मंत्रालय ने मंगलवार तक का समय दिया है। सरनाईक ने कहा कि एसटी कर्मचारी पहले ही मामूली वेतन पर अपना और अपने परिवार का गुजारा करते हैं इसलिए समय पर वेतन कर्मचारियों अधिकार है। परिवहन मंत्री ने शनिवार को सीएम देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात की ऐसा माना जा रहा है कि आगे कर्मचारियों को हर महीने की सात तारीख को सैलरी मिल जाएगी। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम यानी एमएसआरटीसी लंबे समय से घाटे में है।



