शांति पर सहमति

इजरायल और हमास के बीच गाजा में युद्धविराम समझौते को लेकर सहमति बनने की खबर हर लिहाज से राहत देने वाली है। हालांकि अभी तक दोनों पक्षों की तरफ से समझौते की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन माना जा रहा है कि आखिरी पलों में थोड़े और मान-मनौव्वल की जरूरत भले पड़े, समझौते पर अमल शुरू हो जाएगा।
ट्रंप की भूमिका : इस सहमति के पीछे अमेरिका की भूमिका तो है ही, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का इसमें निजी दिलचस्पी लेना भी खासा महत्वपूर्ण साबित हुआ है। उन्होंने पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी कि उनके पद ग्रहण करने से पहले बंधक छोड़ दिए जाने चाहिए। सहमति बनने की घोषणा भी सबसे पहले ट्रंप ने ही की।
शांति की कीमत : यह शांति अच्छी खासी कीमत देने के बाद हासिल हो रही है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास की ओर से इजरायल में किए गए जिस आतंकी हमले से यह जंग शुरू हुई उसमें 1200 लोग मारे गए थे और 250 लोग बंधक बना लिए गए थे। उसके बाद गाजा पर की गई इजरायली कार्रवाई में 46000 लोग मारे जा चुके हैं। गाजा की 90 फीसदी आबादी विस्थापित हो चुकी है। लेबनान, सीरिया, यमन और इराक तक इस संघर्ष की चपेट में आ चुके हैं और इस बात का डर लगातार बना रहा कि कहीं इजरायल और ईरान में सीधा युद्ध न शुरू हो जाए। स्वाभाविक ही शांति की यह संभावना न केवल मध्यपूर्व के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए राहत बनकर आई है।
बाकी हैं सवाल : हालांकि इस कथित सहमति को लेकर कई सारे सवाल बने हुए हैं। कहा जा रहा है कि अगर सहमति पर दोनों पक्ष कायम रहे और इस पर अमल शुरू हुआ तो भी इस बात की गारंटी नहीं है कि इससे स्थायी शांति कायम हो ही जाएगी। पहले छह हफ्ते के युद्धविराम के दौरान जहां 33 बंधक छोड़े जाने हैं, वहीं स्थायी युद्धविराम की शर्तों पर बातचीत शुरू होनी है। आगे चलकर सारे बंधक छोड़े जाने की बात है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उनमें से कितने जीवित हैं। युद्धविराम के बाद गाजा में शासन की क्या और कैसी व्यवस्था होगी, यह भी तय होना बाकी है।
अवसर व्यर्थ न जाए : बहरहाल, यह सहमति शांति के लिए एक अच्छा मौका है। उम्मीद की जानी चाहिए कि दुनिया की तमाम शांतिकामी शक्तियां इस मौके को जाया नहीं होने देंगी।



