छत्तीसगढ़

लंबे इंतजार के बाद फैसला: 21 साल पुराने डकैती केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को किया बरी…

बिलासपुर्।  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्याय व्यवस्था के बुनियादी सिद्धांत ‘संदेह का लाभ’ (Benefit of Doubt) को आधार मानते हुए 21 साल पुराने डकैती के एक गंभीर मामले में सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध को “संदेह से परे” साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।

​यह मामला वर्ष 2003-05 के दौरान का है, जिसमें आरोपियों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने और नकदी सहित सोने-चांदी के जेवरात लूटने के आरोप में धारा 395 और 457 के तहत मामला दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) ने साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

​हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिसिया जांच और पेश किए गए साक्ष्यों में कई गंभीर खामियां पाईं कोर्ट ने नोट किया कि पहचान परेड की प्रक्रिया में गंभीर गलतियां थीं। गवाहों ने आरोपियों को शिनाख्त से पहले ही थाने में देख लिया था, जिससे पहचान की विश्वसनीयता खत्म हो गई। साथ ही, घटना के काफी समय बाद कराई गई परेड का कोई कानूनी महत्व नहीं रह जाता।

पुलिस द्वारा बरामद किए गए सामान को लेकर गवाहों के बयानों में काफी अंतर पाया गया। यह स्पष्ट नहीं हो सका कि सामान कहाँ से और किस परिस्थिति में बरामद किया गया था। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि पेश किए गए साक्ष्य भरोसेमंद नहीं हैं और अभियोजन अपना पक्ष मजबूती से रखने में नाकाम रहा।

​हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को त्रुटिपूर्ण बताते हुए सभी जीवित आरोपियों को तुरंत बरी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले के जिन आरोपियों की लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है, उनके खिलाफ चल रही अपील स्वत: समाप्त मानी जाएगी।

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