संपादकीय

‘विकसित भारत’ का संबोधन

प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित किया, लेकिन कोई नई नीतिगत घोषणा नहीं कर पाए। कुछ आंकड़े गिना दिए गए। संबोधन का फोकस ‘विकसित भारत’ और युवाओं पर रहा। विकसित भारत की बात प्रधानमंत्री कई बार दोहरा चुके हैं और युवाओं की बात करना ‘राजनीतिक विवशता’ हो सकती है। प्रधानमंत्री के करीब 77 मिनट के संबोधन का निष्कर्ष दो शब्द-युग्म रहे-‘सप्तधारा’ और ‘दिमागी नक्सल।’ इन दो शब्द-युग्मों से भारत कभी भी ‘विकसित’ नहीं बन सकता। प्रधानमंत्री के संबोधन का विश्लेषण करने से पहले दो तथ्य प्रस्तुत करना चाहता हूं। जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति थे, तब घोषित दावा किया गया था कि 2020 में भारत ‘विकसित राष्ट्र’ होगा। क्या हुआ? क्या उसका कोई रिपोर्ट-कार्ड उपलब्ध है अथवा कोई प्रगति-कथा है? उसके बाद 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार को देश ने जनादेश दिया, तो बुनियादी नारा था-‘अच्छे दिन आएंगे।’ वह संभव नहीं लगा, तो प्रधानमंत्री मोदी ने ‘अच्छे दिनों’ की समय-सीमा 2047 तय कर दी और ‘विकसित भारत’ के उद्घोष शुरू कर दिए गए। अर्थात 2047 तक प्रधानमंत्री मोदी की जवाबदेही खत्म हो गई। तब वह प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, इतना निश्चित है। जो भी प्रधानमंत्री होगा, अब जवाबदेही उसकी होगी। बहरहाल प्रधानमंत्री ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ का आह्वान किया है। ये सप्तधाराएं हैं-विनिर्माण-उत्पादन, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी-नवाचार, गतिशक्ति, रक्षा-साइबर सुरक्षा, ग्रीन एनर्जी-ब्लू इकोनॉमी, सॉफ्ट पॉवर।

देश इन ‘सप्तधाराओं’ को पहले से ही जानता है, बेशक नामकरण बदल दिए गए हों। हालांकि प्रधानमंत्री ने इनमें देश के ‘कोर सेक्टर’ के कुछ महत्वपूर्ण आधार छोड़ दिए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले से खुलासा और दावा किया है कि भारत में मोबाइल निर्माण-उत्पादन 33 गुना, खादी-ग्रामोद्योग 5 गुना, रेलवे कोच निर्माण 31 गुना, मैन्यूफैक्चरिंग 7 गुना, इंटरनेट 4 गुना, गैस कनेक्शन 6 गुना, नल से जल 15 गुना, शौचालय 4 गुना, गरीबों को पक्के घर देना 3 गुना और डिजिटल भुगतान, लेन-देन 100 गुना बढ़ा है। यकीनन भारत ने प्रगति की है, लेकिन अमरीका, चीन, जर्मनी, जापान आदि देशों की तुलना में हम आज भी बहुत पीछे हैं। भारत में सेमीकंडक्टर के तीन प्लांट अभी शुरू हुए हैं, लेकिन चीन और ताइवान दुनिया को सेमीकंडक्टर सप्लाई कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आगामी 7-8 साल का लक्ष्य बताया है कि सेमीकंडक्टर के 5-7-8 प्लांट शुरू हो जाएंगे। निश्चित संख्या नहीं है। हम कृत्रिम बौद्धिकता (एआई) के क्षेत्र में भी ‘शिशुवत’ हैं और प्रधानमंत्री ने आश्वस्त करने की कोशिश की है कि आगामी एक साल में 1 करोड़ युवाओं को एआई स्किल की टे्रनिंग दी जाएगी। ऐसी ही आकर्षक घोषणा बजट में की गई थी कि देश की 500 बड़ी कंपनियों में 5 साल में 1 करोड़ युवा ‘इंटर्नशिप’ करेंगे। उन्हें 5000 रुपए मानदेय भी दिया जाएगा। नतीजा क्या रहा, प्रधानमंत्री इसका भी खुलासा कर देते। यह इच्छा करना सुखद लगता है कि फॉच्र्यून की 500 शीर्ष कंपनियों में 50 भारतीय भी हों, फार्मा कंपनियां शीर्ष 5 कंपनियों में हों, शीर्ष 10 बैंकों में भारतीय भी हो और भारत की अपनी रेटिंग एजेंसी हो। आज 79 साल की आजादी के बाद भी भारत का एक विश्वविद्यालय भी शीर्ष 100 तो क्या, शीर्ष 200 में भी शामिल नहीं है। करीब 73 फीसदी बच्चे 12वीं तक भी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। प्रधानमंत्री नए विश्वविद्यालय और स्कूल खोलने की घोषणा करते रहते हैं। प्रधानमंत्री ने यह नहीं बताया कि एआई टे्रनिंग के साथ रोजगार कितना बढ़ेगा? ऑनलाइन कोचिंग निशुल्क होगी, लेकिन परीक्षा-प्रणाली कितनी पारदर्शी, ईमानदार होगी? कोचिंग का कारोबार करीब 58,000 करोड़ रुपए का है और करीब 7.10 करोड़ छात्र कोचिंग ले रहे हैं। क्या इस समीकरण को तोड़ा जा सकता है? प्रधानमंत्री ने तेल की तलाश में ‘समुद्र-मंथन’ शुरू कराया है। हाईड्रोजन टे्रन एक सुखद शुरुआत है। ‘सूर्यघर’ का प्रयोग भी सफल हो रहा है।

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