संपादकीय

आकाश में उपलब्धि

वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास लद्दाख में 15 हजार फीट की ऊंचाई पर किया गया आकाश प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की रक्षा क्षमता में वृद्धि का एक और उल्लेखनीय प्रमाण है.

पिछले दिनों आकाश प्राइम मिसाइल का लद्दाख में 15 हजार फीट की ऊंचाई पर किया गया सफलतापूर्वक परीक्षण, जहां ऑक्सीजन कम और हवाएं तेज होती हैं, भारतीय रक्षा क्षमता में वृद्धि की दिशा में एक और उल्लेखनीय कदम है. परीक्षण के दौरान इन मिसाइलों ने 15 हजार फीट की ऊंचाई पर दो तेज रफ्तार ड्रोन को निशाना बनाकर अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारत की वायु रक्षा क्षमता की मजबूती का सबूत पेश किया. ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी ताकत और ज्यादा बढ़ाने के लिए विगत 16 और 17 जुलाई को दरअसल आकाश प्राइम, अग्नि-1 और पृथ्वी-2 के परीक्षण किये. लद्दाख में आकाश मिसाइल के परीक्षण को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नजदीक है.

यह चीन और पाकिस्तान, दोनों देशों के लिए संदेश है. वे सीमांत क्षेत्रों और ऊंचाई वाले स्थानों से नापाक हरकत करने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें मुंहतोड़ जवाब मिलेगा. चीन के साथ हाल के दिनों में रिश्ते भले ही सुधरे हों, लेकिन बीजिंग की नीयत पर भरोसा नहीं किया जा सकता. भारतीय सेना जल्दी ही आकाश प्राइम मिसाइल को अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है. गौरतलब है कि सेना और वायुसेना के पास पहले से ही आकाश मिसाइलें हैं, जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से किये गये ड्रोन हमलों को रोकने के लिए किया गया था.

आकाश मिसाइल आकाश हथियार प्रणाली का ही उन्नत संस्करण है, जिसे भारत ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है. इसमें बेहतर ग्राउंड सिस्टम, रडार और रेडियो प्रीक्वेंसी सिस्टम लगे हैं. यह 30-35 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को मार सकता है, 18-20 किलोमीटर की ऊंचाई तक प्रभावी है और लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों व ड्रोन जैसे खतरों से निपट सकता है. इसमें राजेंद्र रडार है, जो 360 डिग्री कवरेज देता है और कई लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकता है. इसका सबसे बड़ा फीचर स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर है, जो लक्ष्य को सटीकता से पहचानता है और मिसाइल को सही दिशा देता है.

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इसे डिजाइन किया है और भारत डायनेमिक्स ने इसका उत्पादन किया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे देश की वायु रक्षा क्षमता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया. यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की स्वदेशी रूप से विकसित वायु रक्षा प्रणालियों के असाधारण प्रदर्शन के बाद सामने आयी है.

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