मध्यप्रदेश

मंत्री, केंद्रीय मंत्री, विधायक भी नहीं दिला सके एंबुलेंस, इंतजार में तीन घंटे तड़पकर घर के इकलौते चिराग ने तोड़ा दम

गुना: मध्य प्रदेश के गुना जिले के म्याना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस की कमी और प्रशासनिक लापरवाही ने एक हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया है। ग्राम बसार निवासी 12 वर्षीय ध्रुव जैन को शुक्रवार सुबह बुखार और गंभीर हालत में म्याना स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल गुना रेफर करने की सलाह दी, लेकिन शनिवार सुबह करीब 8 बजे से 11 बजे तक लगातार प्रयास करने के बावजूद एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। समय पर वाहन न मिलने के कारण तीन घंटे तक तड़पने के बाद ध्रुव ने दम तोड़ दिया।

परिवार का इकलौता सहारा था ध्रुव

मृतक ध्रुव अपने परिवार की इकलौती संतान था और उसके सिर से पिता सतीश कुमार जैन का साया पहले ही उठ चुका था। बेटे की इस दर्दनाक मौत के बाद उसकी मां पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एनएच 46 पर बसे म्याना के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

म्याना के विकास को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साल 2008 और 2016 में नगर परिषद बनाने की दो बार घोषणा की थी, लेकिन वह फाइल कागजों तक ही सीमित रह गई। इसके अलावा क्षेत्रीय सांसद व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने क्षेत्र की मांगें रखी थीं, और पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया से लेकर वर्तमान कांग्रेस विधायक ऋषि अग्रवाल तक कई बार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

  • म्याना स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के 20 से 25 गांवों के मरीज निर्भर हैं, इसके बावजूद स्थायी एंबुलेंस का अभाव है।
  • गंभीर हालत में रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए समय पर वाहन न मिलने की शिकायतें लंबे समय से आ रही हैं।
  • घटना के बाद मेडिकल ऑफिसर का फोन नहीं उठा, जबकि एंबुलेंस नोडल अधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं।
  • आपातकालीन स्थिति में हर मिनट कीमती होता है, लेकिन परिवहन व्यवस्था फेल होने से मासूम की जान चली गई।

ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन परिवहन व्यवस्था कब होगी मजबूत?

इस दुखद घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश और शोक का माहौल है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मरीजों को समय पर एंबुलेंस तक नसीब नहीं होती है। म्याना स्वास्थ्य केंद्र पर रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

घटना के संबंध में जब मीडिया ने मेडिकल ऑफिसर स्वाति शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया, तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं, गुना के एंबुलेंस नोडल अधिकारी सत्येंद्र शर्मा ने बयान देते हुए कहा है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। यदि जांच के दौरान एंबुलेंस सेवा या किसी भी स्तर पर लापरवाही या कोताही सामने आती है, तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पीड़ित परिवार और ग्रामीण इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर इस व्यवस्थागत लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

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