सीएम साय का बड़ा ऐलान, कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना में भू-अर्जन की कार्यवाही जल्द होगी शुरू

मुंगेली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुंगेली जिले के ग्राम फरहदा में भक्त माता कर्मा मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए. इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने जनप्रतिनिधियों एवं समाज के पदाधिकारियों के साथ भक्त माता कर्मा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली एवं सुख-समृद्धि की कामना की. प्रदेश के मुखिया साय ने भक्त माता कर्मा प्राण-प्रतिष्ठा के लिए साहू समाज एवं उपस्थित सभी लोगों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी. उन्होंने कहा की ग्राम फरहदा में भक्त माता कर्मा मंदिर का निर्माण बिना किसी शासकीय सहयोग के सभी ग्रामवासियों ने मिलकर करवाया है. यह ग्रामवासियों के सामूहिक एकता को दर्शाता है.
मुख्यमंत्री साय ने कहा की हमारी सरकार विकास की दिशा में लगातार कार्य कर रही है. प्रदेश के किसानों को हम 3100 रुपए प्रति क्विंटल धान की कीमत दे रहे हैं. महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 70 लाख से अधिक महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बिलासपुर-मुंगेली रोड से ग्राम फरहदा मार्ग, जिसकी कुल लंबाई साढ़े पांच किलोमीटर है, बजट में इसे स्वीकृत किया गया है, जल्द ही इसका कार्य प्रारंभ किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कटघोरा-डोंगरगढ़ विशेष रेल परियोजना के लिए राज्य शासन द्वारा 300 करोड़ रूपए दिया जा चुका है. शीघ्र ही भू-अर्जन की कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी. इस परियोजना अंतर्गत मुंगेली जिला में 38.02 किलोमीटर रेल लाइन गुजरेगी, जिससे इस क्षेत्र के लोग भी आने वाले समय में रेल सेवा से लाभान्वित होंगे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि हमारी सरकार विकास के लिए समर्पित है. आज जिलेवासियों के लिए 25 करोड़ रूपए से अधिक की राशि के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया जा रहा है. प्रदेश सरकार पानी, बिजली, आवास सहित विकास के सभी आयामों पर बेहतर तरीके से कार्य कर रही है.
सेवा समर्पण एवं त्याग की प्रतीक हैं भक्त माता कर्मा
गौरतलब है कि भक्त माता कर्मा सेवा, त्याग, समर्पण की देवी हैं. कहा जाता है की साहू समाज की आराध्य देवी माता कर्मा ने अपनी भक्ति से साक्षात् श्रीकृष्ण के दर्शन किए और अपनी गोद में लेकर बालकृष्ण को अपने हाथों खिचड़ी खिलाई. उनकी गौरव गाथा जन-जन के मानस में श्रद्धा भक्ति के भाव से विगत हजारों वर्षाें से चली आ रही है. माता कर्मा के जीवन से आत्मबल, निर्भीकता, साहस, पुरूषार्थ, समानता और राष्ट्रभावना की शिक्षा मिलती है. वे अन्याय के आगे कभी झुकी नहीं. उन्होंने संसार के हर दुःख-सुख को स्वीकारा और उनका डट कर मुकाबला किया.



