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ग्लासगो में भारत ने जीता दुनिया का दिल,’वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश, ‘वंदे मातरम्’ की गूंज, शंकर महादेवन और मानुषी छिल्लर ने बांधा समा

ग्लासगो: ग्लासगो में 11 दिन तक चले कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार समापन हुआ। भारत ने 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहते हुए कई सुनहरी यादें अपने नाम कीं। बॉक्सिंग में रिकॉर्ड 10 पदक मिले, मीराबाई चानू ने एक बार फिर स्वर्ण जीता, जूडो में इतिहास रचा गया, जबकि एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।

समापन समारोह की शुरुआत ऑस्ट्रेलियाई गायिका डेल्टा गूडरेम की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स के अध्यक्ष डॉ. डोनाल्ड रुका ने 2030 खेलों की मेजबानी का प्रतीक मशाल भारत को सौंपी। नीरज चोपड़ा, पीटी ऊषा और हर्ष संघवी की मौजूदगी में शंकर महादेवन, मानुषी छिल्लर, ऋषभ रिखीराम और भूमि त्रिवेदी ने भारतीय संस्कृति की भव्य झलक पेश की।

जैस्मिन लंबोरिया रहीं भारत की ध्वज वाहक

क्लोजिंग सेरेमनी में गोल्ड मेडलिस्ट जैस्मिन लंबोरिया भारत की ध्वज वाहक रहीं। 24 वर्षीय मुक्केबाज ने 57 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने फाइनल में उत्तरी आयरलैंड की मिकेला वॉल्श को 5-0 की सर्वसम्मति से मात दी। क्लोजिंग सेरेमनी में तिरंगा लेकर चलना उनकी उपलब्धि को और खास बना देता है।

शंकर महादेवन और मानुषी छिल्लर के परफॉर्मेंस

ग्रैमी विजेता गायक और संगीतकार शंकर महादेवन ने भारत की पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर के साथ ‘वंदे मातरम्’ की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। यह प्रस्तुति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पर आधारित थी, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानने का संदेश देती है। सके बाद शंकर महादेवन अपने दोनों बेटों के साथ मंच पर नजर आए। उन्होंने ‘ऐ वतन’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘लहरा दो’ और ‘सबसे आगे होंगे हिंदुस्तानी’ जैसे लोकप्रिय गानों की प्रस्तुति दी।

ऋषभ रिखीराम शर्मा का शिव तांडव स्तोत्र

भारतीय सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा और स्कॉटलैंड के प्रसिद्ध पाइपर रॉस आइंस्ली की जुगलबंदी भी समारोह का खास आकर्षण रही। ऋषभ ने ‘शिव तांडव स्तोत्र’ की अनूठी प्रस्तुति देकर भारतीय शास्त्रीय संगीत और स्कॉटिश लोक संगीत का शानदार संगम पेश किया, जिसने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।

अहमदाबाद को घोषित किया गया मेजबान

समारोह के दौरान एक विशेष फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें भारत की समृद्ध खेल विरासत और 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के मेजबान शहर अहमदाबाद की झलक दिखाई गई। प्रस्तुति में संदेश दिया गया कि शताब्दी संस्करण की मेजबानी करने वाला अहमदाबाद दुनिया भर से आने वाले खिलाड़ियों और मेहमानों का सिर्फ स्वागत ही नहीं करेगा, बल्कि उन्हें गले लगाएगा।





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