संपादकीय

‘रिश्वतखोरी का बढ़ता महारोग’ कड़े कदम उठाने की जरूरत!

सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद देश में भ्रष्टाचार का महारोग लगातार बढ़ता ही जा रहा है जिसमें कई छोटे-बड़े कर्मचारियों और अधिकारियों को शामिल पाया जा रहा है। यह महारोग कितना गंभीर रूप धारण कर चुका है, यह पिछले मात्र 13 दिनों की निम्न घटनाओं से स्पष्ट है :

* 17 जुलाई को ‘ऊधम सिंह नगर’ (उत्तराखंड) में विजीलैंस की टीम ने पटवारी ‘हरीश चौधरी’ को 8000 रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। 
* 18 जुलाई को ‘नांगलोई’ (दिल्ली) स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में सब-रजिस्ट्रार तथा एक प्राइवेट व्यक्ति को प्रॉपर्टी गिफ्ट डीड के बदले में 80,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
* 22 जुलाई को ‘अहमदाबाद’ (गुजरात) में बिजली विभाग के एक डिप्टी इंजीनियर को एक कमॢशयल कनैक्शन की फाइल पास करने के बदले में 25,000 रुपए रिश्वत लेते हुए दबोचा गया। 
* 23 जुलाई को ‘हैदराबाद’ (तेलंगाना) में ‘भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो’ की टीम ने ‘नवीकरणीय ऊर्जा विकास निगम’ (रेडको) के डिवीजनल इंजीनियर ‘मुत्थुम वैंकट रमणा’ के ठिकानों पर छापा मार कर वैध तरीके से अर्जित आय से अधिक 150 करोड़ रुपए की अघोषित सम्पत्ति जब्त की।

* 25 जुलाई को सी.बी.आई. ने चंडीगढ़ में ‘प्रसार भारती’ के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ‘राय सिंह’ को एक ठेकेदार का लंबित बिल पास करने के बदले में उससे 30,000 रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
* 28 जुलाई को ‘पटना’ (बिहार) में अधिकारियों ने पर्यटन विभाग के सुपरिंटैंडिंग इंजीनियर ‘अवधेश कुमार सिन्हा’ के विरुद्ध आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में उसके बैंक लॉकर की तलाशी के दौरान  64.79 लाख रुपयों के सोने-चांदी के गहने बरामद किए।
* 28 जुलाई को ही ‘पंजाब विजीलैंस ब्यूरो’ ने ‘एस.ए.एस. नगर’ के ‘डेराबस्सी’ स्थित खनन विभाग में तैनात एस.डी.ओ. ‘रमनजोत सिंह’ को 8 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। 
* 28 जुलाई को ही ‘फरीदाबाद’ (हरियाणा) में राज्य सतर्कता ब्यूरो ने ‘हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम’ के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ‘दीपक गर्गर्’ को शिकायतकत्र्ता के लम्बित बिलों का भुगतान करने की एवज में उससे 30,000 रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
* 28 जुलाई को ही ‘फतेहाबाद’ (हरियाणा) में ‘कुंजपुरा’ पुलिस स्टेशन के ए.एस.आई. ‘अनुज’ और ‘भट्टाकलां’ पुलिस थाने में तैनात एस.आई. ‘रामपाल’ को अलग-अलग मामलों में क्रमश: 10,000 और 20,000 रुपए रिश्वत लेते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने गिरफ्तार किया।

* 29 जुलाई को ‘जयपुर’ (राजस्थान) कलैक्ट्रेट में तैनात एक निजी सहायक ‘मुकेश कुमार’ को 1 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी ने गाडिय़ों के 16-17 लाख के बिल पास करने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन (रिश्वत) मांगी थी।
* 29 जुलाई को ही ‘वीरभूम’ (पश्चिम बंगाल) जिले में राज्य के पूर्व मंत्री ‘पार्थ चटर्जी’ के करीबी ड्राइवर ‘मीनार मंडल’ उर्फ ‘मोहम्मद नजीबुद्दीन’ के घर से 20 करोड़ रुपए नकद और लगभग 21.5 करोड़ रुपए मूल्य का 15 किलो सोना जब्त किया गया।
* और अब 29 जुलाई को ही ‘हाजीपुर’ (होशियारपुर) में पंजाब विजीलैंस ब्यूरो द्वारा ‘ब्लॉक प्राइमरी शिक्षा कार्यालय’ में तैनात क्लर्क ‘गगन’ को 10,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। 

ये तो चंद उदाहरण मात्र हैं, इनके अलावा भी न जाने कितनी ऐसी घटनाएं हुई होंगी। स्पष्टï है कि पद का दुरुपयोग कर सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों का एक वर्ग बड़े पैमाने पर रिश्वत एवं अन्य अनुचित तरीकों से अपनी आय से कहीं अधिक करोड़ों रुपयों की सम्पत्ति जुटा रहा है। लिहाजा इस बुराई पर रोक लगाने के लिए अधिक कठोरता बरतने और दोषी अधिकारियों को निलंबित करने की बजाय नौकरी से निकालने, जेल में डालने तथा उनकी सम्पत्तियों को जब्त करने जैसे कठोर कदम उठाने की जरूरत है।

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