मध्यप्रदेश

महाकाल मंदिर में सर्राफा व्यापारियों की छुट्टी, दान में आए सोने की जांच के लिए लग रही ऑटोमेटेड कैरेट मीटर

उज्जैन: महाकाल मंदिर में दान के आभूषणों की जांच का तरीका बदलने जा रहा है। अब सर्राफा व्यापारियों के बजाय 15 लाख की ऑटोमेटेड कैरेट मीटर मशीन दान में मिले सोने-चांदी के आभूषणों की शुद्धता मिनटों में तय करेगी।

सबसे अच्छी बात यह है कि इस नई डिजिटल जांच से दान किए गए गहनों पर न कोई खरोंच आएगी और न ही उन्हें काटना पड़ेगा। अगले दो दिनों में यह मशीन काम करना शुरू कर देगी।

अब कैसे होगी आभूषणों की जांच?

वर्तमान व्यवस्था में श्रद्धालु जब बाबा महाकाल को सोने या चांदी के आभूषण अर्पित करते हैं, तो उन्हें पहले स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखवाया जाता है। इसके बाद मंदिर समिति से जुड़े तीन बड़े ज्वेलर्स बारी-बारी से आकर प्रशासनिक अधिकारियों और सीसीटीवी की निगरानी में इन गहनों को घिसकर या काटकर शुद्धता जांचते थे। इस मैनुअल प्रक्रिया में काफी समय लगता था और कई बार रिपोर्ट आने में देरी हो जाती थी।

15 लाख की मशीन बैंक ने सीएसआर से दी

मंदिर प्रशासन के मुताबिक, एक बैंक ने अपनी सीएसआर पहल के तहत करीब 15 लाख रुपये की यह आधुनिक मशीन दान की है। इसके संचालन के लिए मंदिर परिसर के अंदर ही एक स्पेशल एयर-कंडीशंड कमरा तैयार किया गया है। यह ऑनलाइन कनेक्टेड मशीन कुछ ही मिनटों में धातु का सटीक कंपोजिशन और कैरेट वैल्यू बता देगी।

पारदर्शी व्यवस्था और अधिकारियों का पक्ष

मंदिर के पीआरओ आशीष फलवाड़िया ने बताया, ‘इस नई ऑनलाइन-सक्षम मशीन से जांच प्रक्रिया न केवल तेज़ और पारदर्शी होगी, बल्कि दान किए गए आभूषण भी पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।’ अधिकारियों का मानना है कि ऑटोमेटेड सिस्टम से इंसानी दखल खत्म होगा और आभूषणों की शुद्धता को लेकर किसी भी विवाद की गुंजाइश नहीं बचेगी।

महाकाल लोक बनने के बाद दान का नया रिकॉर्ड

  • वित्तीय वर्ष 2025-26 का दान: रिकॉर्ड ₹144 करोड़ रुपये
  • श्रद्धालुओं की संख्या: महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद लगातार बढ़ोतरी
  • दान का स्वरूप: भारी मात्रा में नकदी के साथ-साथ सोने और चांदी के आभूषण
  • नई व्यवस्था: पूरी तरह डिजिटल और बिना नुकसान वाली नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button