उत्तरप्रदेश

फर्जी जॉब वेबसाइट से 70 से ज्यादा बेरोजगारों को ‘लूटा’, वर्क फ्रॉम होम का झांसा देकर ठगने वाला नोएडा से अरेस्ट

नोएडा : साइबर क्राइम थाना पुलिस ने वर्क फ्रॉम होम और निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर देशभर के बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह के एक ठग को गिरफ्तार किया है। आरोपी म्यूल बैंक खातों का इंतजाम कर ठगी की रकम निकालने और अपने साथी तक पहुंचाता था। उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो एटीएम कार्ड मिले हैं।

यह गिरोह झारखंड से ऑपरेट हो रहा है और वहीं पर कॉल सेंटर के माध्यम से देश भर के बेरोजगारों को फंसा ठगी कर रहे हैं। आरोपी प्रशांत बीएससी पासआउट हैं। पहले उसने दिल्ली में ऑफिस खोल रखा था। कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई की तो वह बचकर फरार हो गया। इसके बाद नोएडा आ गया। उसके खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर 25 शिकायतें दर्ज हैं।

70 से अधिक लोगों के साथ ठगी

पुलिस के मुताबिक, उसने अब तक 70 से अधिक लोगों के साथ ठगी की है। उसका गिरोह अब तक सैकड़ों युवाओं को चपत लग चुका है। इस बारे में जांच की जा रही है। डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि पुलिस टीम प्रतिबिंब पोर्टल पर चिह्नित साइबर अपराधियों की तलाश में नोएडा क्षेत्र में अभियान चला रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला एक संदिग्ध सेक्टर-23 गेट के पास एलिवेटेड रोड के नीचे कार में मौजूद है।

पुलिस ने मैौके पर पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम प्रशांत श्रीवास्तव (36) निवासी पटना बिहार और वर्तमान पता सुपरटेक इंको विलेज 1 ग्रेनो वेस्ट बताया। तलाशी में उसके पास से एक मोबाइल और यूको व यूनियन बैंक के दो एटीएम कार्ड बरामद हुए। पुलिस ने जब मेबाइल की जांच की तो उसमें वॉट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, नौकरी के ऑफर लेटर, ई-मेल के स्क्रीनशॉट और अभ्यर्थियों का डेटा मिला। रिकॉर्डिंग में नौकरी दिलाने और रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराने की बातचीत भी मिली है। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अब गिरोह के अन्य ठगें की तलाश की जा रही है।

रकम म्यूल बैंक खातों में जमा करा लेते

आरोपी ने पुलिस को बताया कि झारखंड की रहने वाली नाज नाम की युवती उन्हें बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराती थी। वह सिम कार्ड अपने साथी तक पहुंचाता, जबकि बैंक खातें और एटीएम कार्ड का इस्तेमाल खुद करता। खातों में रकम आते ही वह एटीएम से नकदी निकाल लेता और उसका 50 प्रतिशत हिस्सा कैश डिपॉजिट मशीन के जरिये अमन अग्रवाल तक भेज देता। शिकायत दर्ज होने की आशंका के चलते बैंक खाते, सिम कार्ड और मोबाइल फोन कुछ समय बाद बदल दिए जाते। एक शिकायत में अमन अग्रवाल का मोबाइल नबर भी संदिग्ध के रूप में दर्ज है। आरोपी नौकरी दिलाने संबंधी कोई वैध दस्तावेज या रजिस्ट्रेशन पेश नहीं कर सका।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने साथी अमन आवाल के साथ मिलकर अलग-अलग डोमेन पर फर्जी जॉब वेबसाइट बनाता था। इन वेबसाइटों पर वर्क फ्रॉम होम और अन्य नौकरियों के आकर्षक विज्ञापन डाले जाते थे। इनके कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतिया नौकरी तलाश रहे लोगों से सपर्क करती और उनका डेटा अमन अग्रवाल को भेजती। इसके बाद दोनों मिलकर अभ्यर्थियों को नौकरी का झासा देकर रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम म्यूल बैंक खातों में जमा करा लेते।

पुलिस ने बताया कि आरोपी नोएडा के साथ आसपास के अन्य जिलों में बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झासा देता था। साथ ही वह नोएडा के सेक्टर 18. 23 के साथ अन्य मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप पर खड़ा होकर युवाओं को नौकरी दिलाने का झासा देता था। वह अपने पास एक पफ्लैट रखता है, जिसे बाटकर लड़के और लड़किये से बातचीत शुरू करता। नौकरी के बदले पीडितों से रकम की डिमाड की जाती। रुपये लेने के बाद आरोपी पीडितों का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देता था।

यह होता है म्यूल खाता

म्यूल खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध में ठगी की रकम लेने, भेजने या निकालने के लिए किया जाता है। साइबर ठग बेरोजगार युवक, मजदूर, छात्र, बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सबसे ज्यादा निशाना बनाते है। उन्हें बैंक खाता किराये पर देने या कमीशन के बदले एटीएम कार्ड उपलब्ध कराने का लालच दिया जाता है। इसी तरह उनके बैंक खाते का उपयोग साइबर ठगी में किया जाता है। अगर पीड़ित ने एक बैंक खाते में रुपये डाले, तो ठग उन्हें तुरत दूसरे खाते में ट्रासफर कर देते है। इस पूरी प्रक्रिया में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है।

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