अलवर-खैरथल में 45 डिग्री की गर्मी को मात दे रहा है पुरखों का ये ₹60 वाला देसी नुस्खा, डॉक्टर भी हुए मुरीद

Alwar News: राजस्थान के अलवर सहित खैरथल-तिजारा जिले में मई की चिलचिलाती धूप और रिकॉर्डतोड़ गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. बढ़ते तापमान और किलर लू से बचने के लिए अब लोगों ने महंगे और केमिकल वाले प्रोडक्ट्स को छोड़कर अपने पुराने पारंपरिक देसी खानपान की तरफ रुख कर लिया है. इस चिलचिलाती गर्मी में शरीर को अंदरूनी ठंडक और तुरंत ऊर्जा (Energy) देने के लिए इन दिनों भुना जौ (धाणी) और भुना चना (भूघड़ा) का सेवन अचानक बहुत तेज़ी से बढ़ गया है. इसके साथ ही शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए लोग सत्तू के शरबत का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं.
खैरथल और किशनगढ़ बास सहित जिले के तमाम प्रमुख बाजारों में इन पारंपरिक देसी व्यंजनों की मांग में भारी उछाल आया है, जिससे किराना और पारंपरिक स्नैक्स की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. चौंकाने वाली बात यह है कि जो सत्तू, धाणी और भूघड़ा पहले केवल ग्रामीण इलाकों की पसंद माने जाते थे, उन्हें अब शहरी परिवार भी एक बेहतरीन, हेल्दी और सुपाच्य (आसानी से पचने वाले) विकल्प के रूप में अपना रहे हैं. खैरथल के स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि लोग इस तपती गर्मी में कोल्ड ड्रिंक्स के बजाय बाजार से सत्तू खरीदकर उसका ठंडा पानी (शरबत) बनाकर पीना ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
भाड़ पर भुनवाने का झंझट खत्म, बाजार में इस भाव पर बिक रहे हैं देसी व्यंजन
दुकानदारों ने बताया कि पहले के समय में लोग अपने घरों से जौ और चना लेकर जाते थे और भाड़ (पारंपरिक भट्टी) पर ले जाकर उसे खुद भुनाते थे. लेकिन अब भागदौड़ भरी जिंदगी में बाजार में ही तैयार भुना हुआ माल आसानी से मिलने लगा है. कीमतों की बात करें तो इस समय खैरथल के बाजारों में बेहतरीन क्वालिटी का भुना जौ यानी धाणी 60 से 80 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रही है. वहीं, बेहतरीन भुना चना (भूघड़ा) 100 से 120 रुपए प्रति किलोग्राम के दाम पर ग्राहकों को मिल रहा है.
आयुर्वेद डॉक्टरों की मुहर: डिहाइड्रेशन और डायबिटीज के लिए वरदान है यह सत्तू
आयुर्वेद विशेषज्ञों का भी मानना है कि बुजुर्गों का यह नुस्खा वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सही है. इस भीषण गर्मी में यदि लोग प्राकृतिक और पारंपरिक व्यंजनों का उपयोग करेंगे, तो लू उनके आसपास भी नहीं फटकेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, भुना जौ और चना न केवल पेट के लिए हल्के होते हैं, बल्कि इनमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज जैसे जरूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं.
सबसे खास बात यह है कि सत्तू और धाणी का सेवन करने से शरीर में प्राकृतिक रूप से पानी की मांग (प्यास) बढ़ती है. जब व्यक्ति ज्यादा पानी पिएगा, तो वह डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. इसके अलावा, यह देसी डाइट कब्ज की समस्या को जड़ से खत्म करने और मधुमेह (डायबिटीज) को कंट्रोल करने में भी अचूक रामबाण साबित होती है.



