छत्तीसगढ़

मातृ सुरक्षा से खुशहाली का मार्ग, छत्तीसगढ़ में मातृ वंदना योजना की ऐतिहासिक सफलता

विशेष-लेख : डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर (उप संचालक, जनसंपर्क संचालनालय)
रायपुर। किसी भी राष्ट्र की प्रगति का पैमाना वहां की माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य होता है। इस दिशा में छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के जरिए एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो आज देशभर के लिए एक मॉडल बन चुकी है। राज्य में इस योजना को केवल सरकारी आंकड़े बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि एक मिशन के रूप में लागू किया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना छत्तीसगढ़ में सुरक्षित मातृत्व और समृद्ध समाज के बीच की एक मजबूत कड़ी बन गई है। संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनभागीदारी का यह संगम छत्तीसगढ़ की माताओं और नवजात शिशुओं के भविष्य को उज्ज्वल और सुरक्षित बना रहा है।
योजना का स्वरूप और वित्तीय संबल
1 जनवरी 2017 से संचालित इस योजना का मूल उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को आर्थिक सहयोग प्रदान कर उनके पोषण स्तर में सुधार लाना है। छत्तीसगढ़ में मातृ वंदना योजना के तहत पहली जीवित संतान के जन्म पर 5 हजार की सहायता दी जाती है। कन्या भ्रुण हत्या रोकने और बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने हेतु दूसरी संतान के रूप में बेटी होने पर 6 हजार की विशेष सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि सीधे तौर पर प्रसव पूर्व जांच, टीकाकरण और संस्थागत प्रसव जैसी आवश्यक स्वास्थ्य प्रक्रियाओं से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मिशन मोड पर कार्य
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में राज्य ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। दूरस्थ आदिवासी अंचलों तक इस योजना को पहुंचाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले ने ‘डोर-टू-डोर‘ पंजीयन सुनिश्चित किया है।
सफलता के आंकड़े- छत्तीसगढ़ देश में अव्वल
छत्तीसगढ़ ने डिजिटल मॉनिटरिंग और पारदर्शी भुगतान प्रणाली (डीबीटी) के प्रभावी उपयोग में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उपलब्धियों का ग्राफ कुछ इस प्रकार है। बढ़ता पंजीयन वर्ष 2023-24 में 1 लाख 75 हजार 797 महिलाओं का पंजीयन हुआ, जो 2024-25 में बढ़कर 2 लाख 19 हजार 012 हो गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 (फरवरी तक) में 2 लाख 04 हजार 138 महिलाओं का पंजीयन कर राज्य ने 93.3 प्रतिशत का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। आवेदनों के परीक्षण और केंद्र से स्वीकृति दिलाने में छत्तीसगढ़ 83.87 प्रतिशत की दर के साथ देश में सबसे आगे है।
शिकायत निवारण और लाभार्थियों की संतुष्टि’
केवल योजना लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लाभार्थियों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। छत्तीसगढ़ ने लगभग 93 प्रतिशत शिकायतों का त्वरित निराकरण कर सुशासन की एक नई इबारत लिखी है।
कुपोषण के विरुद्ध एक सशक्त हथियार
यह योजना आर्थिक सहायता से कहीं अधिक स्वास्थ्य क्रांति का हिस्सा है। समय पर मिलने वाली इस राशि ने माताओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराया है, जिससे एनीमिया जैसी गंभीर चुनौतियों से लड़ने में मदद मिली। स्वस्थ शिशु जन्म दर में वृद्धि हुई, मातृ मृत्यु दर में प्रभावी कमी आई।

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