स्वास्थ्य योजनाओं से मिलता बेहतर इलाज

आयुष्मान भारत योजना भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव लेकर आई है। श्रीमद्भगवद गीता (6.17) के अनुसार, स्वस्थ जीवन के लिए सही आहार, नियमित नींद, संतुलित दिनचर्या, और कर्मयोग आवश्यक है। स्वास्थ्य योजनाएं केवल इलाज की सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का मजबूत आधार बन रही हैं…
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का स्वरूप बीते कुछ वर्षों में तेजी से बदला है। कभी इलाज का खर्च गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों को कर्ज और आर्थिक संकट में धकेल देता था, लेकिन अब सरकारी योजनाओं ने इस बोझ को काफी हद तक कम करने का प्रयास किया है। हर वर्ष 30 अप्रैल को मनाया जाने वाला आयुष्मान भारत दिवस इसी बदलाव का प्रतीक है, जो देश में स्वास्थ्य सुरक्षा के नए दौर को दर्शाता है। आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक का कैशलेस और पेपरलेस इलाज दिया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें परिवार के आकार, आयु या लिंग की कोई सीमा नहीं है, जिससे यह योजना अधिक समावेशी बनती है। आज यह दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना मानी जाती है और देश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी को कवर करने का लक्ष्य रखती है। यदि इसके प्रभाव को आंकड़ों में समझें, तो तस्वीर और स्पष्ट हो जाती है।
मार्च 2026 तक 43.52 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके थे। वर्ष 2024-25 में ही इस योजना के माध्यम से लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपए के इलाज खर्च से लोगों को राहत मिली है। भारत सरकार ने 2026 में 15 जनवरी से 15 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाकर छूटे हुए पात्र लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। इस दौरान 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को ‘वय वंदना कार्ड’ के माध्यम से शामिल करना एक महत्वपूर्ण पहल रही है। भारत में स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में राज्यों की योजनाओं की भी अहम भूमिका रही है। विभिन्न राज्यों ने अपनी परिस्थितियों के अनुसार मुफ्त या कैशलेस इलाज की योजनाएं शुरू की हैं, जो आयुष्मान भारत के साथ मिलकर एक व्यापक सुरक्षा कवच तैयार करती हैं। राजस्थान में मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पात्र परिवारों को 25 लाख रुपए तक का इलाज मिलता है, जबकि पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य साथी योजना कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करती है। ओडिशा की गोपबंधु जन आरोग्य योजना में महिलाओं के लिए 10 लाख रुपए तक का कवर है। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना 5 लाख रुपए तक का इलाज सुनिश्चित करती है। हिमाचल प्रदेश की (हिमकेयर) मुख्यमंत्री हिमाचल स्वास्थ्य देखभाल योजना और केरल की करुण्य आरोग्य सुरक्षा पद्धति भी गरीब और जरूरतमंद वर्गों को बड़ी राहत देती हैं। महाराष्ट्र में महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना और दिल्ली में दिल्ली आरोग्य कोष भी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
कई राज्यों में इन योजनाओं को आयुष्मान भारत के साथ जोडक़र 5 से 10 लाख रुपए तक का संयुक्त कवर दिया जा रहा है। इसी तरह पंजाब में ‘मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना’ है। यह योजना राज्य के निवासियों को प्रति परिवार सालाना 10 लाख तक का मुफ्त, कैशलेस इलाज प्रदान करती है, जो 900 से अधिक सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में उपलब्ध है। इन योजनाओं का उद्देश्य राज्य के निवासियों को महंगे इलाज के वित्तीय बोझ से बचाना है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत देशभर में 1.84 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए जा चुके हैं, जो लोगों को उनके घर के पास प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इससे छोटी बीमारियों का समय पर इलाज संभव हो पाता है और गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 863 मिलियन से अधिक डिजिटल हेल्थ आईडी (आभा) बनाई जा चुकी हैं। इसके अलावा 2025 के अंत तक 426 मिलियन से अधिक टेली-परामर्श सेवाएं दी जा चुकी हैं। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह आसानी से मिल रही है। स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत लगभग 32928 करोड़ रुपए का निवेश किया है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। मातृ मृत्यु दर में 83 प्रतिशत और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 75 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। कोविड-19 महामारी के दौरान 2.2 अरब से अधिक टीके लगाए गए, जबकि खसरा-रूबेला टीकाकरण में लगभग 98 प्रतिशत कवरेज हासिल किया गया। वर्ष 2026 में शुरू हुआ एचपीवी टीकाकरण अभियान भी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। दवाओं की लागत कम करने में प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना ने भी अहम भूमिका निभाई है।
इसके तहत दवाएं 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे पिछले दशक में लगभग 30000 करोड़ रुपए की बचत हुई है। इसी कारण भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ भी कहा जाता है, क्योंकि वह वैश्विक स्तर पर 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं और 55-60 प्रतिशत टीकों की आपूर्ति करता है। समग्र रूप से देखें तो आयुष्मान भारत योजना भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव लेकर आई है। श्रीमद्भगवद गीता (6.17) के अनुसार, स्वस्थ जीवन के लिए सही आहार, नियमित नींद, संतुलित दिनचर्या, और कर्मयोग आवश्यक है। स्वास्थ्य योजनाएं केवल इलाज की सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का मजबूत आधार बन रही हैं। यदि इसी दिशा में निरंतर सुधार, बेहतर क्रियान्वयन और समावेशी दृष्टिकोण बनाए रखा गया, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत एक ऐसा राष्ट्र बनेगा, जहां हर व्यक्ति को बिना आर्थिक चिंता के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होंगी।-अनुज आचार्य



