अमेरिका की ‘हार्ड-पावर’ सैन्य शक्ति फिर भी ईरान के साथ युद्ध को खत्म क्यों नहीं कर पा रहे ट्रंप?

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से उन्होंने कई देशों के बीच युद्ध रुकवाने का दावा किया लेकिन ईरान के साथ जब खुद भिड़ गए तो कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा। अब वो लगातार सवालों का सामना कर रहे हैं। वो इतने खिसिया चुके हैं कि गाली गलौज पर उतर आए हैं।
ऊपरी तौर पर देखें तो अमेरिका की आबादी ईरान से तीन गुना से भी ज्यादा है और उसके पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना और अर्थव्यवस्था है। शक्ति संतुलन के मामले में वह कहीं ज्यादा भारी दिखाई पड़ता है। फिर इसमें इजरायल की सेना और हर चीज पर नजर रखने वाली खुफिया मशीन को भी जोड़ लें तो यह मुकाबला बिल्कुल भी बराबरी का नहीं लगता।
अमेरिका को छका रहा ईरान
फिर भी ईरान ने अमेरिका को छकाकर रख दिया है और उसने इस युद्ध में बहुत कुछ हासिल किया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि उसने रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है।
एक महीना बीत जाने के बाद यह युद्ध अब एक ‘बढ़त बनाने की होड़’ में बदल गया है। हो सकता है कि ट्रंप के पास ज्यादा ताकत हो, लेकिन एक स्पष्ट जीत हासिल करने के लिए उन्हें शायद उस हद तक राजनीतिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, जिसे झेलने के लिए वे बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं।
ईरान भले ही अमेरिका और इजरायल को हरा नहीं सकता, लेकिन उसने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके अपना सबसे बड़ा दांव चला। इस तरह उसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना लिया और अमेरिका के लिए राजनीतिक मुश्किलें खड़ी कर दीं।
अमेरिका की रणनीतिक कमजोरी उजागर
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने ईरान की उस सहमति को राष्ट्रपति की कूटनीति की जीत बताया, जिसके तहत वह आने वाले दिनों में 20 और टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति देगा।
फिर भी यह बात कुछ अटपटी सी लगती है क्योंकि एक बड़ी शक्ति होने के नाते अमेरिका को रियायतों के लिए मोलभाव करने की स्थिति में नहीं होना चाहिए।
ट्रंप के लिए एक कड़वी सच्चाई यह है कि अमेरिका के पास होर्मुज को खोलने के लिए सैन्य ताकत भले ही मौजूद है लेकिन इस स्ट्रेट से अमेरिकी नौसेना को भेजना ईरान को प्रचार के मोर्चे पर एक जीत दिला देगा। खासकर तब, जब वह किसी अमेरिकी जहाज पर हमला कर दे या उसे डुबो भी दे।
संभवतः उन्हें ईरानी सेना को पीछे धकेलने के लिए जमीनी सैनिक भी उतारने पड़ेंगे। इससे अमेरिकी सैनिकों के युद्ध में मारे जाने का जोखिम बढ़ जाएगा, जो उनकी पहले से ही कमजोर राजनीतिक साख को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।
ट्रंप दो तरह की बातें कर रहे
ट्रंप यह भी दावा कर रहे हैं कि ईरान के साथ पर्दे के पीछे सार्थक कूटनीति चल रही है। भले ही ईरान इस बात से इनकार कर रहा हो कि कोई सीधी बातचीत हो रही है। साथ ही वह तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए हिंसा की धमकी भी दे रहे हैं।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विश्लेषकों को यकीन हो गया है कि अब ट्रंप का सब्र जवाब दे देगा और वह अमेरिकी सैनिकों को खर्ग द्वीप या होर्मुज स्ट्रेट में मौजूद द्वीपों पर कब्जा करने का आदेश दे देंगे।
टूट रहा ट्रंप के सब्र का बांध
ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने कोई समझौता नहीं किया तो वह अमेरिका की सैन्य बढ़त का इस्तेमाल हथियार के तौर पर करते हुए उनके सभी बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल के कुओं और खर्ग द्वीप को पूरी तरह से तबाह कर देंगे।
निश्चित रूप से अमेरिकी सेना ऐसा कर सकती है। लेकिन, इसके जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों की धरती पर मौजूद ऐसे ही ठिकानों पर जवाबी हमले होना तय है। इससे वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल मच जाएगी।



