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भारतीय आर्थिकी पर युद्ध का बढ़ता साया…

उम्मीद करें कि सरकार पश्चिम एशिया में विस्तारित होते युद्ध के बीच देश के आम आदमी को आर्थिक मुश्किलों से बचाने और अर्थव्यवस्था की गिरावट रोकने के लिए और अधिक रणनीतिक रूप से आगे बढ़ेगी। सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम को कारगर तरीके से लागू करेगी और राज्यों के साथ समन्वय करके देश में जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकेगी…

इन दिनों पश्चिम एशिया में बढ़ते हुए युद्ध से जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था लडख़ड़ाते हुए दिखाई दे रही है, वहीं युद्ध का साया भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बढ़ते हुए दिखाई दे रहा है। देश में विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढऩे लगी हैं। डॉलर की तुलना में रुपए में तेज गिरावट है। निर्यात घट गए हैं। विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से नीचे आ गया है। शेयर बाजार भी बेहाल है। ऐसे में देश के आम आदमी और अर्थव्यवस्था को युद्ध की तपिश से बचाने के मद्देनजर हाल ही में 27 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से भारत के बाजार से लेकर आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते हुए असर की समीक्षा की गई। साथ ही महत्वपूर्ण जरूरतों मसलन पेट्रोल-डीजल, गैस, खाद्य, ऊर्जा, उर्वरक आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे सभी तरह के प्रयासों के साथ आने वाले समय में निर्मित हो सकने वाली चुनौतियों से निपटने के मद्देनजर संभावित उपायों पर विचार मंथन किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस तरह कोरोना महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों की सामूहिक रणनीति से कोरोना की आपदा का सफलतापूर्वक मुकाबला किया गया, अब उसी तरह साझा जिम्मेदारी से टीम इंडिया के रूप में काम करते हुए भारत पश्चिम संकट की चुनौती से भी निपट लेगा। मोदी ने बताया कि पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए उत्पाद कर में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती किए जाने से महंगाई को काबू में रखा जा सकेगा। साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया गया है। साथ ही सरकार ने किसी भी तरह के लॉकडाउन की स्थिति से इंकार किया।

उल्लेखनीय है कि इन दिनों पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों व वैश्विक संगठनों की रिपोर्टों में भारत की विकास दर में कुछ कमी के अनुमान प्रस्तुत किए जा रहे हैं। जहां वैश्विक रेटिंग एजेंसी गोल्डमैन सैक्स के द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 7 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत किया गया है, वहीं आईसीआईसीआई बैंक ने भी विकास दर अनुमान को आधा फीसदी घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। 25 मार्च को प्रकाशित एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 7.1 प्रतिशत कर दिया है। इन विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक कच्चे तेल के वैश्विक दाम बढऩे और आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत के ऊर्जा आयात बिल में जबरदस्त उछाल की आशंका मंडरा रही है। साथ ही निर्यात में कमी और महंगाई में बढ़ोतरी संबंधी चुनौतियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की संतुलित स्थिति के सामने भी खतरा बढ़ रहा है। लेकिन युद्ध की ऐसी चुनौतियों के बीच भी भारत की कुछ ऐसी प्रभावी आर्थिक अनुकूलताएं उभरकर दिखाई दे रही हैं, जो भारत की विकास दर को तेजी से घटने से बचाने और अर्थव्यवस्था तथा आम आदमी के लिए राहतकारी हैं। दुनिया में तेजी से बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच भी देश में सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ी हैं। देश में खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित 4 प्रतिशत के लक्ष्य से भी कम है। सरकार ने महंगाई को नियंत्रित रखने तथा आम आदमी पर इसके प्रभाव को कम से कम करने के मद्देनजर आवश्यक खाद्य वस्तुओं के लिए बफर स्टॉक बढ़ाने, खुले बाजार में खरीदे गए खाद्यान्न की रणनीतिक बिक्री करने और जरूरी आयात की सुविधा जैसे कई रणनीतिक कदम उठाए हैं।

सरकार 19 मार्च को निर्यातकों को राहत देने के लिए 497 करोड रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना लेकर आई है। इसका उद्देश्य ऐसे निर्यातकों को मदद देना है, जो माल ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी तथा युद्ध से जुड़े निर्यात जोखिमों का सामना कर रहे हैं। इस योजना के तहत एमएसएमई निर्यातक विशेष रूप से लाभान्वित होंगे। साथ ही खाड़ी के देशों में जाने वाले सामानों का बीमा खर्च भी सरकार उठाएगी। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि भारत के पास पेट्रोलियम पदार्थों की कुल मिलाकर 74 दिनों की भंडारण क्षमता है, जिसमें से वर्तमान में लगभग 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और भूमिगत रणनीतिक भंडार शामिल हैं। एलपीजी के घरेलू उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को भी बढ़ावा दे रही है। भारत रोजाना 92 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमएमएससीएमडी) गैस खुद पैदा करता है, जबकि कुल जरूरत 191 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति दिन है, जिससे भारत एलपीजी की तुलना में गैस पर आयात के मामले में काफी कम निर्भर है। यह भी कोई छोटी बात नहीं है कि ईरान ने भारत के गैस और तेल लेकर आने वाले जहाजों को होर्मुज स्टे्रट से गुजरने की इजाजत दे दी है। इतना ही नहीं, रूस से भारत की दोस्ती इस संकट के समय भी काम आ रही है। रूस ने भारत को कच्चा तेल ही नहीं, तरलीकृत प्राकृतिक गैस दिए जाने पर भी सहमति व्यक्त की है। भारत अमेरिका तथा रूस सहित अन्य देशों से अधिक मात्रा में कच्चे तेल की खरीदी बढ़ाने हेतु वैकल्पिक रणनीति पर काम कर रहा है। पहले भारत 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था, अब इन देशों की संख्या बढक़र 41 हो गई है। इन अनुकूलताओं के अलावा इस समय भारत के पास विशाल खाद्यान्न भंडार और जरूरत की दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक आर्थिक अनुकूलताओं के रूप में दिखाई दे रहा है। पिछले वर्ष 2024-25 में भारत में 35.70 करोड़ टन खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है और इस वर्ष 2025-26 में इससे भी अधिक खाद्यान्न उत्पादन की संभावना है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास केंद्रीय पूल में मार्च 2026 के अंत तक लगभग 182 लाख टन गेहूं और 600 लाख टन चावल उपलब्ध हो जाने का अनुमान है। इस समय देश के 80 करोड़ से अधिक कमजोर वर्ग के लोगों को निशुल्क खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है। इस समय जब ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध से दुनिया में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ रही हैं और खाद्यान्न आपूर्ति में व्यवधान है, तब भारत का रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन और रिकॉर्ड खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद एक मजबूत हथियार दिखाई दे रहे हैं।

उम्मीद करें कि सरकार पश्चिम एशिया में विस्तारित होते युद्ध के बीच देश के आम आदमी को आर्थिक मुश्किलों से बचाने और अर्थव्यवस्था की गिरावट रोकने के लिए और अधिक रणनीतिक रूप से आगे बढ़ेगी। सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम को कारगर तरीके से लागू करेगी और राज्यों के साथ समन्वय करके देश में जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकेगी। सरकार ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर, खास तौर से परंपरागत ऊर्जा के बजाय नवीनीकरण ऊर्जा पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगी और सौर ऊर्जा को मेक इन इंडिया के सहारे भारत की नई शक्ति बनाने की राह पर आगे बढ़ेगी। सरकार मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ निर्यात बढ़ाने के लिए चिन्हित किए गए करीब 200 देशों में निर्यात बढ़ाने की नई रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी। उम्मीद करें कि जिस तरह से कोरोना काल के संकट के बीच केंद्र और राज्य सरकारों के सामूहिक और रणनीतिक प्रयासों तथा जन-बल के सहयोग से देश कोरोना की चुनौतियों से निपटने में सफल हुआ था, उसी तरह इस समय देश पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के चलते पैदा हुए संकट से निपटने में भी सफल होगा।

डा. जयंती लाल भंडारी

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