संपादकीय

पीएम संबोधन, ‘ट्रंपी युद्धविराम’

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में वक्तव्य देकर पश्चिम एशिया के संकट और संघर्ष को कोरोना महामारी जैसी गंभीर और अभूतपूर्व चुनौती माना है। उन्होंने देश की एकजुटता का आह्वान किया और इस आर्थिक, सुरक्षा संबंधी, मानवीय चुनौती को ‘चुनौती’ देने का हौसला दिया। प्रधानमंत्री ने देश को आश्वस्त भी किया और जानकारी भी साझा की कि पहले हम 27 देशों से आयात करते थे, लेकिन अब 41 देशों से विविध सामान ले रहे हैं। देश में 53 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का ‘रणनीतिक भंडार’ है। उसे बढ़ा कर 65 लाख मीट्रिक टन करने पर काम किया जा रहा है। अब हम पेट्रोल में 20 फीसदी ईथेनॉल का मिश्रण करते हैं, लिहाजा 4.5 करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ रहा है। यह प्रयोग सफल रहा है। रेलवे का लगभग 100 फीसदी बिजलीकरण किया जा चुका है, लिहाजा डीजल और कोयले की खपत नगण्य हो गई है। देश में खाद्यान्न के पर्याप्त भंडार हैं और खरीफ की बुवाई के लिए उर्वरकों की पूरी व्यवस्था है। देश में यूरिया के 6 प्लांट लगाए गए हैं, जो 76 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन कर रहे हैं। किसानों को 22 लाख सोलर पंप दिए गए हैं। देश में बिजली उत्पादन की पर्याप्त मात्रा है और 1500 मेगावाट पनबिजली जोड़ी जा रही है। वैकल्पिक ऊर्जा के तौर पर 250 गीगावाट का उत्पादन किया जा रहा है। मानवीय स्तर पर देखें, तो ईरान युद्ध शुरू होने के बाद 3.75 लाख भारतीयों को वापस लाए हैं। ईरान से भी करीब 1000 भारतीय सुरक्षित लौटे हैं। मेडिकल के 700 छात्रों को भी वापस लाने में हम सफल रहे हैं। भारतीय दूतावास 24 घंटे काम कर रहे हैं और भारतीयों के संपर्क में हैं। बहरहाल यह संसद में प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य का सारांश है। यह उनका दायित्व भी था कि देश को यथार्थ बताएं। इसे हम ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ ही नहीं, बल्कि वैश्विक संदेश मानते हैं। प्रधानमंत्री ने बार-बार मानवता की रक्षा और उसके हित में तनाव, युद्ध को अविलंब खत्म करने की अपील की है। भारत संयम, संवाद, शांति, स्थिरता और कूटनीति का पक्षधर रहा है। प्रधानमंत्री के वक्तव्य के दो-अढाई घंटे बाद ही अमरीकी राष्ट्रपति टं्रप ने, अचानक ही, एकतरफा और पांच दिनों का युद्धविराम घोषित कर दिया। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत सार्थक और सकारात्मक रही है।

ईरान अमरीका के साथ डील करना चाहता है। कैसी डील…! अमरीका ने तो ईरान के पॉवर प्लांट तबाह करने के लिए 48 घंटे की धमकी दी थी, लेकिन 12 घंटे शेष रहते ही युद्धविराम का ऐलान कर दिया। क्या यह टं्रप का नया छलावा, षड्यंत्र है अथवा वह युद्ध से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं? राष्ट्रपति टं्रप ने यह भी दावा किया कि अब ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। हम कई मुद्दों पर सहमत हैं, लिहाजा तय किया गया है कि अमरीका पांच दिन तक कोई भी हमला नहीं करेगा। युद्ध विभाग को भी निर्देश दे दिए गए हैं, लेकिन ईरान ने टं्रप के बातचीत के दावे को सिरे से ही खारिज कर दिया है। न कोई बातचीत हुई है और न ही किसी डील की अपेक्षा है। अमरीका ने बातचीत का संदेश भेजा जरूर था, जिसे ईरान ने नकार दिया था। ईरान का मानना है कि टं्रप ईरान के पलटवार तबाही वाले हमलों की चेतावनी से डर गए हैं, लिहाजा युद्ध में पीछे हटे हैं। अमरीका एक बार फिर हार गया है। बेशक राष्ट्रपति टं्रप की घोषणा से ही कच्चे तेल की कीमतें 15-16 फीसदी लुढक़ कर 96 डॉलर पर आ गईं। शेयर बाजारों में भी उछाल देखा गया। सवाल यह है कि क्या अब राष्ट्रपति टं्रप ईरान के साथ ‘स्थायी युद्धविराम’ के मूड में हैं? अमरीका में ही चौतरफा विरोध जारी है। संसद और सीनेट के मध्यावधि चुनाव इसी साल हैं। यदि टं्रप की ‘रिपब्लिकन पार्टी’ का संसद में बहुमत समाप्त हो गया, तो राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। अमरीका में आर्थिक स्थितियां बेहद खराब हैं। क्या उन्हीं से विवश होकर युद्धविराम की घोषणा की गई है? बहरहाल इजरायल इससे सहमत नहीं है, लिहाजा ईरान पर लगातार हमले कर रहा है। ईरान भी आक्रामक जवाब दे रहा है। युद्धविराम के मायने क्या हैं फिर? दोनों ओर से हमले किए जा रहे हैं, खूब बारूद फूंका जा रहा है, यह कैसा युद्धविराम है?

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button