छत्तीसगढ़

विधानसभा में धान उठाव पर घमासान: चूहों द्वारा 30 करोड़ का धान खराब होने का आरोप, सरकार ने मार्च से पहले उठाव पूरा करने का दिया भरोसा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में धान खरीदी और उसके उठाव में हो रही देरी का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। इस दौरान विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए किसानों को हो रही परेशानियों और धान के नुकसान का मामला उठाया।
प्रश्नकाल में विधायक रामकुमार यादव ने कृषि साख समितियों के प्रासंगिक व्यय की राशि पर रोक और धान उठाव में देरी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि समय पर धान का उठाव नहीं होने के कारण किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खुले में पड़े धान को बारिश और अन्य कारणों से नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है।
रामकुमार यादव ने सक्ती जिले का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां करीब 30 करोड़ रुपये मूल्य का धान चूहों द्वारा खराब कर दिया गया। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस मामले में जिम्मेदार खाद्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी या नहीं।
इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब देते हुए कहा कि कुछ स्थानों पर रिसाइक्लिंग की आशंका के कारण धान के उठाव को अस्थायी रूप से रोका गया था। उन्होंने बताया कि सक्ती जिले में अब तक 47.41 लाख क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है, जबकि लगभग 3.61 लाख क्विंटल धान का उठाव अभी बाकी है। मंत्री ने आश्वस्त किया कि शेष धान का उठाव मार्च माह से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
हालांकि, जब रामकुमार यादव ने दोबारा पूछा कि चूहों से खराब हुए धान के मामले में अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या नहीं, तो मंत्री ने सीधे तौर पर कार्रवाई की घोषणा नहीं की और दोहराया कि सरकार धान उठाव की प्रक्रिया जल्द पूरी कराएगी।
मामले में नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने भी सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि क्या विभाग के पास धान की रिसाइक्लिंग की शिकायतें आई थीं और यह मामला किन-किन स्थानों पर सामने आया है। उन्होंने कहा कि 17 तारीख को धान खरीदी बंद करने की बात सामने आई थी, जबकि असली समस्या तो रिसाइक्लिंग के बाद पैदा होती है।
इस पर मंत्री दयालदास बघेल ने स्पष्ट किया कि 17 तारीख को धान खरीदी बंद नहीं हुई थी, बल्कि धान के उठाव से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर चर्चा हुई थी।
बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि धान उठाव और भुगतान से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए ताकि किसानों को स्पष्ट स्थिति पता चल सके। इस पर विधानसभा की आसंदी ने भी सुझाव दिया कि समितियों में सूचना बोर्ड लगाकर यह बताया जाए कि किस कार्य के लिए कितनी राशि दी जा रही है।
खाद्य मंत्री ने इस सुझाव से सहमति जताते हुए कहा कि समितियों में बोर्ड लगाकर जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसानों को पारदर्शी तरीके से पूरी जानकारी मिल सके और उन्हें किसी प्रकार की क्षति न हो।

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