राजनीति

‘PM मोदी के एक फोन कॉल से खत्म हो सकता है ईरान-इजरायल युद्ध’, UAE ने माना भारत का लोहा

Iran War News: भारत में यूएईए यानी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने बताया कि UAE की ईरान-इज़रायल संघर्ष में शामिल होने की कोई इच्छा नहीं है, और वह किसी भी पक्ष को अपनी ज़मीन का इस्तेमाल लॉन्चिंग पैड के तौर पर करने की इजाज़त नहीं देगा. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी अपने एक फोन कॉल से इस युद्ध को तुरंत खत्म कर सकते हैं. 

Iran-Israel War: पश्चिम एशिया युद्ध की आग में जल रहा है. इजरायल-अमेरिका मिलकर ईरान में कत्लेआम मचा रहे हैं. बदले में ईरान भी चुप नहीं बैठा है. वह भी इजरायल समेत गल्फ देशों के अमेरिकी सहयोगियों पर बम बरसा रहा हा. कुल मिलाकर पश्चिम एशिया जंग से बीते 10 दिनों से जंग का मैदान बना है. अब तक शांति की उम्मीद नहीं दिख रही है. इस बीच संयुक्त अरब अमीरात का मानना है कि पीएम मोदी का एक फोन कॉल ईरान और इजरायल के बीच युद्ध को एक झटके में खत्म कर सकता है. जी हां, भारत में यूएई (UAE) के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्जा ने यह बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि उनका देश इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता है.

भारत में यूएईए यानी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात की ईरान-इजरायल संघर्ष में शामिल होने की कोई इच्छा नहीं है. वह किसी भी पक्ष को अपनी जमीन का इस्तेमाल लॉन्चिंग पैड के तौर पर करने की इजाजत नहीं देगा. संयुक्त अरब अमीरात ने साफ कर दिया है कि वह ईरान और इजरायल के बीच चल रहे टकराव में शामिल नहीं होना चाहता, भले ही पूरे इलाके में लड़ाई तेज हो रही हो.

ईरान जंग पर यूएई ने क्या कहा?
एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में भारत में यूएई के पहले राजदूत हुसैन हसन मिजा ने कहा कि अबू धाबी का ऐसा कोई इरादा नहीं है कि वह इस संघर्ष में किसी भी पक्ष को अपनी ज़मीन इस्तेमाल करने दे. उन्होंने कहा, ‘सच कहूं तो मुझे समझ नहीं आ रहा कि हम इसमें क्यों शामिल हैं. यूएई के इसमें शामिल होने का कोई कारण नहीं है.’ उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यूएई की अनोखी भू-राजनीतिक स्थिति है. उसके दोनों देशों के साथ ठीक संबंध हैं. ऐसे में जरूरत पड़ने पर यूएई रचनात्मक कूटनीतिक भूमिका निभा सकता है.

यूएई कर सकता है मध्यस्थता
मिर्जा ने कहा, ‘हम दोनों के बीच मध्यस्थता कर सकते हैं. यूएई संभावित रूप से विरोधी पक्षों के बीच बातचीत का पुल बनने में मदद कर सकता है.’ इतना ही नहीं, मिर्जा ने इस इलाके में भारत के नेतृत्व के प्रभाव पर भी ज़ोर दिया. उन्होंने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खाड़ी देशों में व्यापक सम्मान है. न केवल राजनीतिक नेताओं के बीच बल्कि कारोबारी हलकों और आम जनता के बीच भी. उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे समय में जब तनाव बहुत चरम पर है, उनकी यह विश्वसनीयता इजरायल और ईरान दोनों पर असर डाल सकती है.

बस एक फोन कॉल और युद्ध खत्म
उन्होंने आगे कहा, ‘मिस्टर मोदी का ईरान और इजरायल में अपने समकक्षों को किया गया एक फोन कॉल इस मुद्दे को सुलझा सकता है. इस मुद्दे को खत्म कर सकता है. बस एक फ़ोन कॉल.’ उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई ऐसे इलाके में हो रही है जिसे युद्ध का मैदान नहीं बनना चाहिए. वे हमारी जमीन पर एक-दूसरे से लड़ रहे हैं. यह बिल्कुल भी मंज़ूर नहीं है. साथ ही उन्होंने सैन्य आकलन पर टिप्पणी करने से परहेज़ किया, और माना कि उनकी विशेषज्ञता की सीमाएं हैं. बता दें कि ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच 28 फरवरी से ही युद्ध जारी है. इसमें अभी सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है.

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