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ससुराल वालों के चलते ठुकराया इन्‍फोसिस का ऑफर, शुरू किया ये काम, अब ₹40 लाख साल की कमाई

नई दिल्‍ली: कविता मिश्रा मूल रूप से कर्नाटक के धारवाड़ जिले की रहने वाली हैं। उन्‍होंने 1996 में शादी के बाद कभी नहीं सोचा था कि वह खेती को अपना पेशा बनाएंगी। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा किया। 1998 में उन्‍हें इन्‍फोसिस से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद का ऑफर मिला। हालांकि, परिवार में विवाहित महिलाओं को घर से बाहर काम करने की अनुमति नहीं थी। ऐसे में उन्हें अपने ससुराल वालों के दबाव के कारण यह नौकरी छोड़नी पड़ी। हालांकि, वह बैठी नहीं। उन्‍होंने अपने पति की पुश्‍तैनी जमीन पर इंटीग्रेटेड फार्मिंग शुरू की। आज वह अपने वेंचर ‘कविता मिश्रा सैंडल फार्म’ से सालाना 40 लाख रुपये कमा रही हैं। आइए, यहां कविता मिश्रा की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

कविता मिश्रा कर्नाटक की कृषि उद्यमी हैं। वह ‘कविता मिश्रा सैंडल फार्म’ की मालकिन हैं। कविता एक मध्यमवर्गीय रूढ़िवादी कन्‍नड़ परिवार से आती हैं। उनकी शादी कम उम्र में ही हो गई थी। तब वह पढ़ाई कर ही रही थीं। अगले कुछ सालों (1996-1999) में उन्होंने कर्नाटक यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा किया। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें इन्‍फोसिस से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रोल के लिए जॉब ऑफर हुई। हालांकि, उन्हें घर से बाहर नौकरी करने की अनुमति नहीं मिली। उनके पति ने उन्हें उनके गांव कविताल में पुश्‍तैनी जमीन को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

जमीन पूरी तरह से बंजर, पथरीली और पहाड़ी थी। इसमें कुछ उगा पाना असंभव जैसा था। सालों की कड़ी मेहनत के बाद कविता ने 2006 में इसमें अनार की खेती शुरू की। यह रायचूर की शुष्क और जल-अभाव वाली परिस्थितियों के लिए उपयुक्त थी। अगले कुछ वर्षों तक फसल अच्छी रही। हर फसल में लगभग 1-2 लाख रुपये की कमाई की। हालांकि, 2011-2012 में पूरा बाग बैक्टीरियल ब्लाइट से प्रभावित हो गया। यह अनार में एक गंभीर बीमारी है। सलाहकारों ने उन्हें सभी पेड़ उखाड़ने की सलाह दी। इसका कोई इलाज नहीं था। लगभग आठ साल के प्रयास के बाद वह एक बार फिर एक खाली खेत के साथ रह गईं।

एक सलाहकार ने कविता को इंटीग्रेटेड खेती की ओर बढ़ने की सलाह दी। इसी के बाद कविता ने अपने वेंचर ‘कविता मिश्रा चंदन फार्म’ की नींव डाली। यह फार्म कर्नाटक के रायचूर जिले में है। इस फार्म में मुख्य रूप से सफेद चंदन की खेती होती है। लेकिन, साथ ही आम, अमरूद, शरीफा, आंवला, जामुन, इमली, नींबू, नारियल, सहजन, केला, चीकू, मौसंबी, करी पत्ता, चमेली, कॉफी, काली मिर्च और हल्दी जैसी कई तरह की बागवानी फसलें भी उगाई जाती हैं। इस फार्म में सागौन और लाल चंदन भी लगाए गए हैं। ये इसे एग्रोफोरेस्ट्री मॉडल बनाते हैं।

कविता ने अपनी रणनीति को पूरी तरह से बदल दिया है। वह प्रति एकड़ 5-6 करोड़ रुपये के संभावित रिटर्न का अनुमान लगाती हैं। उन्होंने चंदन और लाल चंदन की बिक्री के लिए कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (KSDL) के साथ एक औपचारिक समझौता किया है। चोरी के जोखिम के कारण उन्होंने पेड़ों में माइक्रोचिप-बेस्‍ड ई-सिक्‍योरिटी का इस्‍तेमाल किया है। यह सिस्‍टम किसी के फार्म में प्रवेश करने और चोरी का प्रयास करने पर निकटतम पुलिस स्टेशन को अलर्ट करता है। अपने फार्म से कविता आज सालाना 40 लाख रुपये कमा रही हैं।

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