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निजामुद्दीन में गीजर फटने से शख्स की मौत, धुआं भरने से पत्नी बेहोश

नई दिल्ली: निजामुद्दीन इलाके में शनिवार शाम इलेक्ट्रिक गीजर फटने से हजरत निजामुद्दीन दरगाह के सज्जादा नशीन सैयद मोहम्मद निजामी (50) की मौत हो गई। बाथरूम में लगे गीजर के अचानक फटने से घर में आग लग गई और चारों ओर धुआं भर गया। बाथरूम में धुएं से दम घुटने के कारण मोहम्मद निजामी की मौत हो गई। लिविंग एरिया में पत्नी धुएं की चपेट में आकर बेहोश हो गईं।

निजामुद्दीन की बस्ती में हुई घटना

पुलिस के मुताबिक, घटना बस्ती हजरत निजामुद्दीन स्थित मकान नंबर 134-135 की पहली मंजिल पर हुई। यहां सैयद मोहम्मद निजामी अपने परिवार के साथ रहते थे। शनिवार को दरगाह पर हजरत बीबी फातिमा का उर्स था। पूरा दिन दरगाह पर कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शाम करीब 5 बजे वह घर लौटे और नहाने बाथरूम में चले गए। उसी दौरान अचानक गीजर फट गया, जिससे आग लग गई और कुछ ही मिनटों में बाथरूम और घर में धुआं भर गया। धुएं के कारण मोहम्मद निजामी बेहोश हो गए और बाहर नहीं निकल पाए।

धुएं के कारण बेहोश हुए घरवाले

दूसरी तरफ आग और धुएं के कारण बाहर मौजूद उनकी पत्नी अर्जुमन उर्फ फिदा निजामी (45) बेहोश हो गईं। घर में मौजूद मां और बेटे भी फंस गए। पड़ोसियों ने घर से धुआं निकलते देखा तो तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। मौके पर दमकल की दो गाड़ियां पहुंचीं। बताया जा रहा है कि मेन गेट अंदर से बंद था। लोहे के दोनों गेट पर अंदर से ताला लगा था। जिसके चलते रेस्क्यू में दिक्कत आई।

लोह का गेट काटकर किया रेस्क्यू

पुलिस और दमकलकर्मियों ने किसी तरह पिछले दरवाजे से सैयद मोहम्मद निजामी की मां, पत्नी और बेटे को बाहर निकाला। दमकलकर्मियों ने लोहे के मेन गेट का लॉक काटकर अंदर एंट्री की और मोहम्मद निजामी को बाहर निकाला। उन्हें मूलचंद अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, पत्नी को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।

जांच में आया सामने

शुरुआती जांच में गीजर फटने के बाद लगी आग को हादसे की वजह माना जा रहा है। रविवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं, सज्जादा नशीन के निधन की खबर फैलते ही रविवार को निजामुद्दीन इलाके में दिनभर दरगाह और आसपास के इलाकों में हजारों की संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए जुटे रहे।

कौन होते हैं सज्जादा नशीन?

दरगाह के सज्जादा नशीन सूफी संत के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, वंशज या गद्दीनशीन होते हैं, जो दरगाह के मामलों के प्रमुख और मुख्य संरक्षक माने जाते हैं। वे ‘सज्जादा’ (प्रार्थना की चटाई) पर बैठने वाले व्यक्ति के रूप में, खानकाह या दरगाह की दैनिक गतिविधियो, उर्स समारोहो और आध्यात्मिक परंपराओं (महफिल-ए-समा) का संचालन और नेतृत्व करते है।

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