विकसित भारत के लिए सुधारों का बजट…

इसमें कोई दो मत नहीं है कि वित्त मंत्री सीतारमण के समक्ष वर्ष 2026-27 का बजट तैयार करते समय चुनौतियों की श्रृंखला सामने रही है। इन चुनौतियों में रुपए में लगातार गिरावट, अमरीका का ऊंचा टैरिफ, मैन्युफैक्चरिंग व कृषि की धीमी रफ्तार शामिल हैं…
यकीनन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा प्रस्तुत वित्त वर्ष 2026-27 के बजट की तस्वीर में यह उभरकर दिखाई दे रहा है कि यह बजट आम आदमी के लिए राहत और विकसित भारत के लिए साहसिक सुधारों को आगे बढ़ाने वाला ऐतिहासिक बजट है। इस बजट में वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा प्रस्तुत सुधारों की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए तीन कत्र्तव्यों पर बजट को आधारित किया है। इनमें उत्पादकता और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढऩा, लोगों की आशंकाओं को पूरा करने के लिए क्षमता निर्माण और सबका साथ, सबके विकास के मद्देनजर ढांचागत सुधार के साथ प्रगति करना शामिल है। इस बजट में रिकार्ड पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपए सुनिश्चित किए गए हैं। यद्यपि बजट के तहत इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन एक अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम लागू किया जाना सुनिश्चित करके आयकर संबंधी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और आयकर भरना आसान किया गया है। बजट के नए प्रावधानों से बुनियादी ढांचा, छोटे शहर, एमएसएमई, शिक्षा, पर्यटन और सर्विस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में नई पीढ़ी के लिए रोजगार के व्यापक मौके बढ़ेंगे। खास बात यह भी है कि आगामी वर्ष के बजट के तहत वित्त मंत्री राहत और विकास के बीच सूझबूझ पूर्ण संतुलन बनाते हुए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 फीसदी के स्तर पर सीमित रखने और सात फीसदी से अधिक विकास दर पाने की रणनीति के साथ आगे बढ़ते हुए दिखाई दी हैं।
गौरतलब है कि नए बजट के तहत वित्त मंत्री ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चिता, भू राजनीतिक तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में धीमेपन के बीच अगली पीढ़ी के सुधार, नीतिगत स्थिरता व दीर्घकालीन विकास की रणनीति के साथ घरेलू मांग की मजबूती पर्यावरण नवाचार, उद्यमिता बुनियादी ढांचा, कृषि विकास, गरीब, युवा, महिला और किसान वर्ग के लिए राहत के प्रभावी प्रावधानों के साथ मैन्युफैक्चरिंग, सेवा क्षेत्र रक्षा, सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग (एमएसएमई) स्वदेशी प्रोत्साहन और हरित ऊर्जा पर बड़े ऐलान किए हैं। इनके साथ-साथ भारत को वैश्विक बायो फॉर्मा केंद्र बनाने, शहरी आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण, नए राष्ट्रीय जल मार्ग, सात हाई स्पीड कोरिडोर, व्यापार सुंगमता, कंटेंनर निर्माण, बुजुर्गों के लिए मजबूत इकोसिस्टम, टीयर-2 और टीयर-3 शहरों के विकास के लिए प्रभावी प्रावधान किए गए हैं। इसमें कोई दो मत नहीं है कि वित्त मंत्री सीतारमण के समक्ष वर्ष 2026-27 का बजट तैयार करते समय चुनौतियों की श्रृंखला सामने रही है। इन चुनौतियों में रुपए में लगातार गिरावट, अमरीका का ऊंचा टैरिफ, मैन्युफैक्चरिंग व कृषि की धीमी रफ्तार शामिल हैं। इन चुनौतियों के बीच वित्त मंत्री सीतारमण की मु_ियों में विभिन्न वर्गों को राहत देने और विकास की विभिन्न योजनाओं के लिए प्रभावी आबंटन हेतु कर संग्रहण संबंधी मजबूत परिदृश्य मौजूद रहा। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के तहत 7.4 फीसदी विकास दर प्राप्ति की संभावनाएं और चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर 2025 तक आयकर सहित प्रत्यक्ष कर संग्रहण और वस्तु और सेवाकर के 17-17 लाख करोड़ रुपए से अधिक की प्राप्ति के साथ वित्त वर्ष में लक्ष्य से अधिक कर संग्रहण वित्त मंत्री की आर्थिक शक्ति रहा है।
निसंदेह वित्त मंत्री बजट के तहत गरीब, युवा, महिलाएं, किसानों के कल्याण के नए उपायों के साथ विकास योजनाओं पर भी अपने आबंटन को बढ़ाते हुए दिखाई दी हैं। बजट में वित्त मंत्री रोजगार, कृषि उत्पादकता बढ़ाने, ग्रामीण विकास, सिंचाई तथा वेयरहाउसिंग संबंधी प्रोत्साहन, रियल एस्टेट सेक्टर और आवास सेक्टर को प्रोत्साहन, डिजिटल क्रांति को आगे बढ़ाने तथा स्वच्छ ऊर्जा के लिए अधिक आबंटन करते हुए दिखाई दी हैं। यह बात महत्त्वपूर्ण है कि इस बजट में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश, रेलवे, शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार और क्षमता संवर्धन के साथ दीर्घावधि वृद्धि, वैश्विक क्षमता निर्माण और एकीकरण के लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिशन मोड के सुधार उभरकर दिखाई दे रहे हैं। साथ ही बजट के माध्यम से वित्त मंत्री सीतारमण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, उद्योग जगत की लाजिस्टिक्स लागत घटाने, रोजगार सृजित करने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस करने संबंधी रणनीतियां भी प्रस्तुत करते हुए दिखाई दी हैं। निश्चित रूप से वित्तमंत्री इस बजट के माध्यम से युवाओं के रोजगार बढ़ाने, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, डिजिटल कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रोजगार बाजार की उभरती जरूरतों के अनुरूप ढालने, प्रधानमंत्री कौशल मुद्रा योजना, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ाने के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण,निजी निवेश को प्रोत्साहित करने, वित्तीय समावेशन को बेहतर करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने संबंधी प्रभावी प्रावधानों के साथ आगे बढ़ी हैं। वित्त मंत्री सीतारमण बजट में खाद्य महंगाई पर काबू पाने के लिए भी आपूर्ति संबंधी नए कदमों के साथ आगे बढ़ी हैं। बजट में वित्त मंत्री ने रोजगारोन्मुखी निर्यात क्षेत्रों से निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य रख कर नए रोजगार अवसरों को निर्मित करने की रणनीति भी अपनाई है। विकसित भारत के लक्ष्य के मद्देनजर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए प्रोत्साहन के प्रावधान भी बजट में दिखाई दे रहे हैं। नए बजट में हर क्षेत्र में आर्टिफिशल इटेंलिजेंस को अहमियत हेतु प्रावधान किए गए है, ताकि भारत एआई का वैश्विक हब बन सके।
चूंकि इस समय चीन, पाकिस्तान के साथ-साथ बांग्लादेश से भी देश की बाहरी सुरक्षा के खतरे बढ़े हैं, ऐसे में सुरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए बजट में अधिक धन का आबंटन किया गया है। वित्त मंत्री ने इस बजट में भारत को दुनिया के बाजार और अधिक प्रभावी रूप से जुडऩे और भारत को निर्यात का नया हब बनाने के लिए नई रणनीति प्रस्तुत की है। भारत को यूरोपीय संघ समेत विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बाद दुनिया के बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट करने के प्रोत्साहनमूलक प्रावधानों के साथ आगे बढ़ी हैं। इतना ही नहीं अमरीका के द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ से प्रभावित निर्यात क्षेत्रों को भी राहत देने के मद्देनजर वित्त मंत्री नए निर्यात प्रोत्साहनों की डगर पर आगे बढ़ते हुए दिखाई दी हैं। निश्चित रूप से वित्त मंत्री ने इस बजट में सीमा शुल्क के लिए जहां राहत दी है, वहीं सीमा शुल्क में सुधार भी किए है। यह बजट इसलिए भी खास रहा है, क्योंकि यह बजट पुराने टैक्स युग से नए टैक्स युग की दहलीज पर खड़ा बजट है। सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से करीब 60 साल पुराने टैक्स कानून की जगह नया इनकम टैक्स कानून लागू किया है। इससे देश के करोड़ों आयकरदाता लाभान्वित होंगे। साथ ही नई श्रम संहिताएं भी आगामी वित्तीय वर्ष में लागू होने से श्रम उत्पादकता बढ़ेगी और औद्योगिक विकास का नया अध्याय दिखाई देगा। निश्चित रूप से वित्त मंत्री सीतारमण के द्वारा एक फरवरी को प्रस्तुत आगामी वित्त वर्ष 2026-27 का प्रस्तुत बजट कोई साधारण वार्षिक बजट नहीं है, बल्कि यह बजट देश के आर्थिक परिदृश्य को ऐतिहासिक मोड़ देने वाला बजट है। उम्मीद करें कि इस बजट से जहां देश में साहसिक सुधारों का नया युग शुरू होगा, वहीं आम आदमी के लिए अधिक राहत और देश के लिए तेज विकास का नया परिदृश्य निर्मित होगा। उम्मीद करें कि एक ओर वित्त मंत्री वर्ष 2026-27 के बजट के बजट के लक्ष्य के तहत राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 फीसदी तक रखने में कामयाब होगी। उम्मीद करें कि इस अभूतपूर्व बजट से देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ेगी और यह बजट देश को वर्ष 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने वाला और 2047 तक विकसित भारत बनाने की नींव रखने वाला बजट सिद्ध होगा।-डा. जयंती लाल भंडारी



