प्लेन के अंदर हो जाए यात्री की मौत, क्या करती हैं एयरलाइंस? एयर होस्टेस ने खोले गहरे राज!

अगर सफर के दौरान उड़ते प्लेन में किसी यात्री की मौत हो जाए तो क्या होता है? डेड बॉडी के साथ एयरलाइंस कंपनियां क्या करती हैं? 14 साल तक एयर होस्टेस रही बारबरा बेसिलिएरी ने इस डरावने अनुभव और एयरलाइंस के सीक्रेट नियमों का खुलासा किया है, जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे.
हवाई सफर के दौरान हम अक्सर खिड़की से बाहर के खूबसूरत नजारों और केबिन क्रू की मुस्कुराहट में खोए रहते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आसमान में उड़ते हुए विमान के अंदर अचानक किसी यात्री की मौत हो जाए तो क्या होगा? यह ख्याल ही किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है. 14 साल तक फ्लाइट अटेंडेंट के तौर पर काम कर चुकीं बारबरा बासिलिएरी (Barbara Bacilieri) ने हाल ही में इस डरावने और गुप्त सच से पर्दा उठाया है. बारबरा अब एक प्रसिद्ध ट्रैवल इन्फ्लुएंसर हैं. उन्होंने प्लेन के अंदर के इस गहरे राज से परदा उठाते हुए बताया कि ऐसी स्थिति में एयरलाइंस के पास एक खास ‘प्रोटोकॉल’ होता है, जिसे यात्रियों से छिपाकर रखा जाता है. बारबरा ने बताया कि विमान में मौत होना आम नहीं है, लेकिन ऐसा होता रहता है.
बारबरा ने कहा कि मान लीजिए आप रोम जा रहे हैं और आपको शक है कि आपके बगल वाला यात्री सो नहीं रहा है, बल्कि वह मर चुका है. तब आप फ्लाइट अटेंडेंट को बुलाते हैं, तो वो सबसे पहले उसके ‘वाइटल साइंस’ चेक करते हैं और संभव हो तो CPR देते हैं. इसके बाद क्रू तुरंत कप्तान को सूचना देता है और यात्रियों के बीच डॉक्टर की तलाश की जाती है. इसके बाद बारबरा ने एक दिलचस्प तकनीकी पहलू के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि विमान के अंदर कोई भी ‘आधिकारिक तौर पर’ मृत घोषित नहीं किया जाता. जब तक विमान जमीन पर न उतर जाए और कोई डॉक्टर पुष्टि न कर दे, तब तक उसे मरा हुआ नहीं माना जाता. अगर यात्री की मौत हो गई है, तो क्रू के पास दो विकल्प होते हैं. या तो वे सुरक्षा को देखते हुए नजदीकी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करें, या फिर सब कुछ नियंत्रण में होने पर गंतव्य तक उड़ान जारी रखें.
अगर उड़ान लंबी है और सफर जारी रखना है, तो सबसे बड़ी चुनौती लाश को मैनेज करने की होती है. बारबरा के अनुसार, अगर विमान में खाली सीटें हैं, तो शव को एक खाली रो में शिफ्ट कर दिया जाता है. लेकिन अगर फ्लाइट फुल है, तो यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण और डरावनी हो जाती है. अपनी आपबीती शेयर करते हुए बारबरा ने बताया कि एक बार उनकी फ्लाइट में ऐसा हुआ था. तब एयरहोस्टेस ने मृतक की आंखों पर ‘स्लीप मास्क’ लगा दिया और उसे कंबल में इस तरह लपेट दिया जैसे वह सो रहा हो. यह सब इतनी खामोशी और चतुराई से किया गया कि बाकी सो रहे यात्रियों को भनक तक नहीं लगी. बारबरा की एक सहकर्मी के साथ तो इससे भी बुरा अनुभव हुआ. एक ट्रांसअटलांटिक फ्लाइट में जब कोई सीट खाली नहीं थी, तो चालक दल ने शव को ‘गैली’ यानी विमान की रसोई वाले हिस्से में रखने का फैसला किया.
बारबरा बताती हैं, “मेरी दोस्त को घंटों तक अपने पैर से उस लाश को संभालकर रखना पड़ा, ताकि विमान के हिलने पर वह खिसके नहीं. सबसे ज्यादा अजीब बात यह थी कि बाकी क्रू को उसी किचन में काम करना पड़ रहा था, क्योंकि यात्रियों को खाना खिलाना जरूरी था.” यह सुनकर किसी का भी दिल बैठ सकता है कि जिस जगह खाना तैयार हो रहा है, वहीं पैरों के पास एक बेजान शरीर पड़ा है. इसके अलावा, बारबरा ने यह भी बताया कि कई बार विमानों के कार्गो होल्ड में ताबूत भी ले जाए जाते हैं, जहां यात्रियों के सामान के नीचे शवों को उनके देश वापस भेजा जा रहा होता है. बारबरा का कहना है कि यह काफी असहज करने वाला है, लेकिन क्रू को इन परिस्थितियों से निपटने के लिए कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है. उनका प्राथमिक उद्देश्य मृतक की गरिमा को बनाए रखना और बाकी यात्रियों में घबराहट फैलने से रोकना होता है.



