पुलिस को न बुलाकर अपने दोस्तों को बुलाता तो आज युवराज जिंदा होता, दूसरे चश्मदीद ने उठाए सवाल

ग्रेटर नोएडा: युवराज मेहता की मौत के मामले में एक और चश्मदीद ने रेस्क्यू ऑपरेशन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उसका कहना है कि अगर उसने पुलिस को कॉल न करके अपने दोस्तों को बुलाया होता, तो शायद युवराज की जान बच सकती थी। उसने अपनी पहचान उजागर नहीं की है।
उसने बताया कि उसके पास दो लोग आए और कहा कि कोई मदद के लिए चिल्ला रहा है। इसके बाद वह अपने दो दोस्तों के साथ मौके पर पहुंचे। उसने रात 12:14 बजे डायल 112 पर कॉल की, जिसकी कॉल हिस्ट्री उसके मोबाइल में मौजूद है।
12:20 बजे पीसीआर पहुंची, लेकिन बिना किसी तैयारी के
दावा है कि 12:20 बजे बजे पहली पीसीआर मौके पर पहुंची, कुछ देर बाद दूसरी पीसीआर भी आ गई। इस बीच युवराज के पिता भी मौके पर पहुंच गए थे। दोनों पीसीआर में 10 से 12 पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन उनके पास न तो रस्सा था और न ही कोई जरूरी रेस्क्यू उपकरण।
मुनेंद्र का दावा: उसने अपने दोस्तों के साथ बचाई ट्रक चालक की जान
नोएडा सेक्टर-150 रोड स्थित गड्ढे में गिरे ट्रक चालक का बुधवार को पुलिस ने बयान जारी किया है। इसमें ट्रक चालक कह रहा है कि उसकी जान पुलिस ने आकर बचाई थी। वहीं, डिलिवरी बॉय मुनेंद्र का दावा है कि उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर ट्रक चालक को तालाब से निकाला था। इसके बाद सवाल खड़ा हो रहा है कि अगर मुनेंद्र ने उसे बाहर निकाला तो ट्रक चालक ने पुलिस के पक्ष में बयान क्यों दिए? कहीं अचानक से ट्रक ड्राइवर से ऐसे बयान तो नहीं दिलवाए गए हैं। युवराज मेहता की इसी तालाब में गिरकर मौत हुई थी।



