मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर …

यह बार-बार सिद्ध होता जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी का हिंदुत्व राजनीतिक लाभ के लिए गढ़ा गया एक ढोंग है। महारानी पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर ने १८वीं शताब्दी में काशी में मणिकर्णिका घाट का निर्माण करवाया था। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने विकास के नाम पर इस पर बुलडोजर चलवा दिया। वहीं दूसरी ओर मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान करने गए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को ‘योगी’ सरकार ने स्नान करने से रोक दिया और उनके भक्तों पर बेरहमी से लाठियां भांजीं। शंकराचार्य बिना स्नान किए ही लौट गए। योगी सरकार ने हिंदू संस्कृति और धर्म को कलंकित करनेवाले कृत्य किए। ये दोनों घटनाएं उत्तर प्रदेश में घटीं। भगवा वस्त्र धारण करने वाले योगी महाराज वहां के मुख्यमंत्री हैं। प्रधानमंत्री मोदी उस क्षेत्र के सांसद हैं, जहां काशी में हिंदू धर्म के प्रतीक मणिकर्णिका घाट को ध्वस्त किया गया। लेकिन मणिकर्णिका घाट के विध्वंस को लेकर किसी को कोई चिंता नहीं हुई। आठ दिन पहले मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने हिंदुत्व पर राजनीतिक प्रवचन झाड़े। मंदिर के बाहर खुली जीप में खड़े होकर, दोनों हाथों में ‘डमरू’ घुमाते हुए, माथे पर राख आदि लगाए हुए वे अपने राजनीतिक हिंदुत्व का प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उन्होंने काशी के मणिकर्णिका घाट पर सरकारी हमले पर अपना दुख व्यक्त नहीं किया। विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर मणिकर्णिका घाट को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन जो तस्वीर सामने आई उसमें पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर की प्रतिमा मलबे के नीचे घायल पड़ी दिखाई दे रही थी। उत्तर में शिंदे और होलकर ने मराठा शौर्य का इतिहास रचा। सरकार ने उन मराठों के
इतिहास के निशान मिटाने
का कार्य किया। भाजपा ने अपने शासनकाल में हजारों मंदिर ध्वस्त किए। बाबर, औरंगजेब, चंगेज खान जैसे आक्रमणकारियों ने भी इतने मंदिर नहीं तोड़े होंगे। मंदिर तोड़ना भाजपा का शगल बन गया है। आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर वाले असंख्य मंदिर मोदी सरकार के दौरान ही नष्ट हुए। काशी में विकास और पर्यटन के नाम पर मोदी सरकार के दौरान सैकड़ों प्राचीन मंदिरों को हथौड़ों और बुलडोजरों से बेरहमी से ध्वस्त कर दिया गया। इनमें स्थापित कई प्राचीन मूर्तियां नष्ट हो गईं। अयोध्या मंदिर के निर्माण के दौरान कई मंदिर और मठ ध्वस्त किए गए। मध्य प्रदेश में भी मंदिर तोड़े गए। खुद को हिंदू राष्ट्रवादी कहने वालों के हाथों में राज्यभर में मंदिर ध्वस्त किए जा रहे हैं। व्यावसायीकरण, वाणिज्यिकरण और सौंदर्यीकरण के नाम पर हिंदू मंदिरों को खतरे में डाला जा रहा है। पुण्यश्लोक अहिल्या देवी की मूर्ति को रौंदना बोगस हिंदुत्ववादी शासकों का उन्माद है। हिंदुत्व के विकास के नाम पर सांस्कृतिक विनाश हो रहा है। मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस घाट पर दाह-संस्कार की व्यवस्था है। हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि मणिकर्णिका घाट पर दाह-संस्कार करनेवालों को सीधे मोक्ष प्राप्त होता है। मोदी सरकार ने अपने कामकाज से हिंदुओं का कत्लखाना शुरू तो कर ही दिया है, साथ ही साथ मणिकर्णिका घाट पर एक बुलडोजर भी चलाया जा रहा है जो मृतकों को मोक्ष प्राप्ति से वंचित कर रहा है। विकास और पुनर्निर्माण का विरोध करने की कोई वजह नहीं है, लेकिन प्राचीन वास्तुकला को इस तरह से निरर्थक ढंग से नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। मणिकर्णिका घाट
का कायाकल्प का काम
शुरू है। घाट के चबूतरे को बड़ा करने की योजना है। इससे अंतिम संस्कार के लिए अधिक सुविधाएं मिलेंगी। मणिकर्णिका घाट तक पहुंचने के लिए संकरी गलियों से होकर चलना थका देने वाला है। वहां तक पहुंचने के लिए बेहद जर्जर और धूल भरी सड़कों से होकर गुजरना पड़ता है। जब काशी कॉरिडोर और मणिकर्णिका घाट के जीर्णोद्धार की योजना बनाई गई थी, तब प्राचीन संरचना और इतिहास को संरक्षित रखते हुए जीर्णोद्धार की मांग उठी थी। मणिकर्णिका घाट के विकास के लिए पहले चरण में ३५ करोड़ रुपए की निधि स्वीकृत की गई। ३५ करोड़ रुपए की यह राशि चौंकानेवाली है। लोगों को ३५ करोड़ रुपए के लिए हिंदू धर्म की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास को नष्ट करना स्वीकार नहीं। मणिकर्णिका घाट सहित काशी में कई विकास कार्य १८वीं शताब्दी में पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर द्वारा करवाए गए थे। अहिल्यादेवी ने २८ वर्षों तक शासन किया। इस दौरान उन्होंने ६५ मंदिर, धर्मशालाएं, सड़कें, झीलें और नदियों पर भव्य घाट बनवाए। उन्होंने धर्म और जन कल्याण के संकल्प के साथ राज्य व्यवस्था स्थापित की। १७७१ से १७८५ के बीच पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी ने काशी में मणिकर्णिका घाट सहित पांच घाटों का निर्माण करवाया। इस पर हजारों रुपए खर्च हुए। अब इन सब पर बुलडोजर चला दिया गया है। खुद को हिंदुत्ववादी कहने वाली भाजपा सरकार की इस कार्रवाई के चलते हिंदुत्व गंगा में बह गया है! इंदौर में रहनेवाले अहिल्यादेवी होलकर के वंशज यशवंतराव होलकर ने इस विनाश पर केवल दुख और चिंता व्यक्त की। महाराष्ट्र में होलकर की पूजा करने वाले राजनीतिक भक्तों की कमी नहीं हैं। क्या इन लोगों को इस बात की जानकारी है कि अहिल्यादेवी होलकर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त अवस्था में घाट पर गिरी पड़ी रही?



