IIM से पढ़ने के बाद सीईओ ऑफिस में जॉब, फिर अचानक टर्न, अब 1 करोड़ का टर्नओवर, कैसे?

नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी शहरी जिंदगी में खराब खान-पान, डायबिटीज और बीपी जैसी बीमारियां एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। व्यस्तता के कारण लोग अक्सर पौष्टिक भोजन के बजाय ‘फास्ट फूड’ खाते हैं। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए तेलंगाना की कीर्ति प्रिया ने ‘कोह फूड्स’ (Koh Foods) की नींव रखी। बिट्स पिलानी से बी.फार्मा और आईआईएम कलकत्ता से एमबीए जैसी प्रतिष्ठित डिग्रियों के बावजूद कीर्ति ने कॉर्पोरेट जगत की सुरक्षित नौकरी छोड़कर उद्यमिता का कठिन रास्ता चुना। उन्होंने अपनी मां के भेजे गए घरेलू डिहाइड्रेटेड वेजी पाउडर्स को एक व्यावसायिक रूप दिया। इसका मकसद शहरी लोगों को बिना किसी मेहनत के 100% प्राकृतिक पोषण उपलब्ध करना था। 2022 में शुरू हुआ यह स्टार्टअप न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की पसंद बन रहा है, बल्कि इसने ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। आज यह ब्रांड भारतीय बाजार के साथ अमेरिका में भी अपनी पहचान बना चुका है। इसका कारोबार 1 करोड़ रुपये का है। आइए, यहां कीर्ति प्रिया की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
कीर्ति प्रिया का सफर तेलंगाना के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ। शिक्षा को महत्व देने वाले परिवार की इस बेटी ने बिट्स पिलानी और आईआईएम कलकत्ता से पढ़ाई के बाद शानदार कॉर्पोरेट करियर शुरू किया। उन्होंने अपनी नौकरी की शुरुआत जनलक्ष्मी स्मॉल फाइनेंस बैंक में की। वह सीईओ ऑफिस में काम कर रही थी। बाद में लोकल नाम के एक स्टार्टअप को जॉइन किया। व्यस्त लाइफस्टाइल के कारण जब कीर्ति अक्सर खाना छोड़ देती थीं, तब उनकी मां उन्हें घर के बने ‘सब्जियों के पाउडर’ भेजती थीं। इन्हें वह करी या जूस में मिलाकर झटपट पोषण पा लेती थीं। यहीं से उन्हें आइडिया आया कि क्यों न इस पारंपरिक नुस्खे को उन लाखों लोगों तक पहुंचाया जाए जो समय की कमी के कारण सही पोषण नहीं ले पाते। इसी सोच के साथ 2018 में इस ब्रांड की वैचारिक शुरुआत हुई।
शुरुआती सालों(2018-20) में यह केवल परीक्षण के दौर में था। जब कीर्ति ने अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़ने का फैसला किया तो उनके परिवार को काफी आशंकाएं थीं क्योंकि वह अपने परिवार में पहली पीढ़ी की उद्यमी थीं। सबसे बड़ी चुनौती 26 साल की उम्र में ग्रामीण तेलंगाना में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाना और किसानों का भरोसा जीतना था। उन्होंने हार नहीं मानी और ऐसे किसानों को साथ जोड़ा जो बिना कीटनाशकों के खेती करना चाहते थे। ‘स्टैंडअप इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ के सहयोग से फंड जुटाकर उन्होंने 1 एकड़ में अपनी फैक्ट्री स्थापित की।
‘कोह फूड्स’ के प्रोडक्ट 100% प्लांट-बेस्ड और प्रिजर्वेटिव-फ्री हैं। कीर्ति लगभग 20 प्रगतिशील किसानों के साथ मिलकर काम करती हैं। ये पालक, चुकंदर, गाजर और करी पत्ता जैसी सब्जियां उगाते हैं। इन सब्जियों को 60 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर इलेक्ट्रिकल डिहाइड्रेशन तकनीक से सुखाया जाता है ताकि इनके पोषक तत्व बरकरार रहें। कीर्ति ने अपनी फैक्ट्री में 15 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार दिया है। मार्केटिंग के लिए उन्होंने लाइव कुकिंग डिस्प्ले किए, जहां गुलाबी इडली और रंगीन डोसा बनाकर लोगों को दिखाया कि इन पाउडर्स का इस्तेमाल कितना आसान और मजेदार है।
आज कीर्ति के उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2024 में 20 लाख रुपये के राजस्व के बाद कंपनी अब 1 करोड़ रुपये पर पहुंच चुकी है। कीर्ति का विजन केवल भारत तक सीमित नहीं है। उनकी कंपनी के प्रोडक्ट्स अब अमेरिका में भी पहुंच चुके हैं। उनका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर एक ऐसा ‘क्लीन लेबल’ ब्रांड बनना है, जिस पर पश्चिमी देशों के लोग भी भरोसा कर सकें। कीर्ति की यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों और उत्पाद में दम हो तो एक छोटा सा विचार भी करोड़ों का बिजनेस बन सकता है।



