संपादकीय

 निष्ठावानों का दलबदल, गुंडा टोलियों की ‘राष्ट्रवादी’…

मुंबई समेत महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों की तस्वीर साफ हो गई है। जिन्हें उम्मीदवारी नहीं मिली, ऐसे सभी पार्टियों के ‘निष्ठावान’ कार्यकर्ताओं ने तुरंत ‘दलबदल’ कर लिया। कुछ ने पार्टी ऑफिस के सामने भूख हड़ताल, रोना-धोना और हंगामा किया। नासिक और छत्रपति संभाजीनगर में भाजपा में जो हंगामा हुआ, वह खत्म नहीं हुआ है। निष्ठावानों को टिकट नहीं मिला इसलिए पार्टी छोड़नेवाले सर्वाधिक लोग भाजपा के हैं। नागपुर के विधायक कृष्णा खोपड़े (भाजपा) के बेटे रोहित ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। महानगरपालिका चुनावों में उम्मीदवारी न मिलने का यह गुस्सा है। पुणे में भाजपा के ज्यादातर बागियों ने अजीत पवार की पार्टी में शामिल होकर उम्मीदवारी ले ली। इस चुनाव में शिंदे गुट में सेंध लगी और मुंबई समेत कई जगहों पर शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस के मुख्य लोग छोड़कर चले गए। राखी जाधव शरद पवार की मुंबई शहर अध्यक्षा हैं। शिवसेना के साथ सीट बंटवारे की बातचीत में वे आखिरी तक थीं, लेकिन एक दिन अचानक वह ‘भाजपा’वासी बन गर्इं। शिवसेना-मनसे गठबंधन की घोषणा २४ दिसंबर, २०२५ को वर्ली के ‘ब्लू सी’ होटल में हुई। तब नासिक में शिवसेना के विनायक पांडे, उनके चिरंजीव और मनसे नासिक के प्रमुख नेता दिनकर पाटील को गुलाल उड़ाकर खुशी से नाचते हुए लोगों ने न्यूज चैनलों पर देखा। ये लोग एक-दूसरे को लड्डू खिला रहे थे। लेकिन अगले दिन ही सुबह ये ‘लड्डू सम्राट’ भाजपा में शामिल हो गए। यह एक तरह की शुद्ध हरामखोरी है। महाराष्ट्र ऐसे ही हरामखोरी से ग्रस्त हो गया है।
पुणे का प्रयोग
पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ के सभी मशहूर गुंडों और लुटेरों ने सत्ताधारी अजीत पवार पार्टी की उम्मीदवारी ले ली है। मारणे, आंदेकर, बापू नायर जैसे टोली के प्रमुख अजीत पवार की पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। गैंग वॉर और कोयता गैंग के सभी लीडर अजीत पवार की पार्टी से ही चुनाव लड़ रहे हैं। गुंडों को टायर में डालकर मारता हूं, ऐसा कहनेवाले अजीत पवार ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के सभी गुंडों को अपनी पार्टी में ले लिया और अपना ‘गैंग’ बना लिया। इस पर अब पुणेकर पूछ रहे हैं कि अजीत पवार पुणे के पालक मंत्री हैं या ‘गैंग वॉर’ वालों के? भाजपा जिन गुंडों को सीधे उम्मीदवारी नहीं दे सकी, उन सभी महात्माओं को भाजपा ने अजीत पवार की पार्टी में भेज दिया। पुणे में ज्यादातर गुंडे अजीत पवार की पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं और अजीत पवार की शुद्ध, चरित्रवान पार्टी के साथ पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ पालिका में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने गठबंधन किया है। यह भारतीय जनता पार्टी की होशियारी है। अजीत पवार ने शरद पवार की मूल पार्टी को तोड़ दिया और विधायकों सहित वे भाजपा गठबंधन में शामिल हो गए। असली राष्ट्रवादी कौन-सी समेत पार्टी और सिंबल को लेकर अजीत पवार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है और दोनों पार्टियां पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में एक साथ आ गर्इं। ऐसे में क्या सिंबल और पार्टी का केस सुप्रीम कोर्ट में टिक पाएगा? महाराष्ट्र में जगह-जगह ऐसी तिकड़ी पालिका चुनाव के मौके पर देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र की मिट्टी में विचारधारा, भूमिका, निष्ठा का पूरा बंटाधार हो गया है और इसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियां जिम्मेदार हैं। एकनाथ शिंदे ने अमित शाह की मदद से शिवसेना को तोड़ा। टूटा हुआ टुकड़ा दिल्ली जाकर अमित शाह के चरणों में अर्पित किया। यह महाराष्ट्र की पीठ पर सबसे बड़ा वार है।
मराठी अस्मिता की खातिर
मुंबई समेत २९ महानगरपालिका के चुनाव में देश का ध्यान मुंबई पर लगा है। मराठी लोगों के मुद्दों पर उद्धव और राज ठाकरे एक साथ आए। दोनों ने राजनीतिक गठबंधन का एलान किया। इससे मराठी माणुस एक हो गए तो पालिका पर मराठी अस्मिता का भगवा झंडा लहराएगा, लेकिन क्या भाजपा, शिंदे गठबंधन और कांग्रेस-वंचित आघाडी को यह मंजूर है? कांग्रेस ने वंचित आघाडी के साथ स्वतंत्र तालमेल बिठाया। लोकसभा चुनाव के समय वंचित, कांग्रेस का साथ नहीं चाहती थी। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का कांग्रेस से हमेशा विवाद रहा। डॉ. आंबेडकर ने बार-बार कहा कि कांग्रेस एक जलन रखने वाला घराना है, लेकिन भाजपा को हराने के लिए एड. प्रकाश आंबेडकर की वंचित आघाडी कांग्रेस के साथ जा रही है, इस भूमिका का स्वागत है, लेकिन इस सबसे भाजपा को फायदा नहीं होगा और मराठी लोगों की एकता नहीं डगमगाएगी, इस बात की गारंटी कौन देगा? अब तक दलित भाइयों के वोट ‘मराठी’ के तौर पर सिर्फ शिवसेना को ही मिलते रहे हैं। यह बताना जरूरी है।
ठाणे में नमो नमो
मुंबई में भाजपा ने परप्रांतियों की ताकत बढ़ाई और मराठी लोगों को पीछे धकेला। मुंबई के बाद ठाणे मराठी लोगों का गढ़ है। शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना की वजह से यह मराठी गढ़ बचा रहा। शिंदे गुट ने इस गढ़ का सौदा भाजपा से किया। ​​आज ठाणे में हर जगह ‘नमो भारत, नमो ठाणे’ के बोर्ड भाजपा ने लगाए हैं। कल ‘नमो मुंबई’ के बोर्ड महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में झलकेंगे। जैन और गुजराती लोग मराठी लोगों को अपनी सोसाइटी में घर नहीं खरीदने देते। ऐसे समाज का नेतृत्व भाजपा कर रही है और इसी समाज के बिल्डरों से करोड़ों की वसूली कर शिंदे गुट ‘मराठी एकता’ को हराने पर तुला हुआ है। ऐसे लोगों को भाजपा-शिंदे सरकार ने मरीन ड्राइव पर १,१०,००० वर्गफुट अर्थात तीन एकड़ जमीन दे दी। अब वहां जैन जिमखाना बन गया है। उसी सड़क पर मराठी भाषा भवन बनने वाला था। उस मराठी भवन का काम भाजपा-शिंदे गुट ने रुकवा दिया। मुंबई मराठी ग्रंथ संग्रहालय से लेकर गिरगांव के साहित्य संघ तक मराठी संस्थाओं को खत्म करने की नीति भाजपा ने अपनाई और क्या मुंबई का मेयर ‘मराठी’ होगा, ऐसा हरामखोर सवाल भाजपावाले ‘ठाकरे’ बंधु से पूछ रहे हैं। सवाल सिर्फ मुंबई के मेयर का नहीं है, बल्कि पूरी मुंबई के मराठी लोगों के अस्तित्व और अस्मिता का है।
यह लड़ाई मराठी लोगों को जीतनी ही होगी। भाजपा-शिंदे गुट की ‘युति’ कई जगहों पर टूट चुकी है। सभी पार्टियों के निष्ठावानों ने ‘दलबदल’ कर लिया है। चारों ओर संभ्रम का माहौल है, फिर भी मुंबई समेत यह राज्य मराठी लोगों का है, यह देश को दिखा देना होगा!

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