संपादकीय

राष्ट्रीय हित सर्वोपरि, रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा भारत…

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिनकी यात्रा के दौरान भारत और रूस के बीच बनी सहमति द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के साथ-साथ पश्चिम के लिए भी संदेश है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों और अपने लोगों की जरूरत के हिसाब से तय होती है। आगे भी यही स्वतंत्र नीति जारी रहेगी।

दबाव नहीं: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन की इस पहली भारत यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें थीं। अमेरिका-यूरोप यूक्रेन युद्ध रुकवाने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं, जबकि यही ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने से पहले इसे भड़का रहे थे। वहीं, भारत हमेशा से कहता रहा है कि शांति होनी चाहिए। शुक्रवार को हुए संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत ने यूक्रेन युद्ध खत्म करवाने में भूमिका निभाने की बात कही। मगर यह भी कहा कि वह किसी तरह के दबाव को नहीं मानेगा।

व्यापार पर फोकस: पुतिन और मोदी ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। 2024-25 में दोनों के बीच 68.7 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था, लेकिन इसमें एक बड़ा हिस्सा रूस से खरीदे गए कच्चे तेल का था।

अमेरिका पर प्रेशर: द्विपक्षीय व्यापार में पलड़ा अभी मॉस्को की तरफ झुका हुआ है और भारत के पास मौका है कि वह इसमें संतुलन लाए। यूरेशियन इकॉनमिक यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होने से व्यापार में सहूलियत होगी। फिलहाल इस पर बात चल रही है। भारत-रूस के बीच इस सहमति से अमेरिका पर भी दबाव बनेगा, जिसकी एक टीम ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत करने के लिए अगले हफ्ते भारत आने वाली है।

तेल खरीद: पुतिन ने कहा है कि वह भारत को तेल की आपूर्ति करना जारी रखेंगे। यह बात बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका को सबसे ज्यादा दिक्कत भारत की रूसी तेल खरीद से ही है। लेकिन, जो देश अपनी जरूरत का 85% क्रूड ऑयल बाहर से खरीदता हो, उसके लिए दाम में थोड़ी भी भी कमी बड़ा अंतर लाती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से तेल आयात बढ़ाने पर पहले दो साल में भारत को करीब 13 अरब डॉलर का फायदा हुआ था।

रक्षा संबंध: इस दौरे से भारत-रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग और बढ़ सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 डिफेंस सिस्टम का प्रदर्शन शानदार रहा, जिसके बाद भारत इसकी और यूनिटें खरीदना चाहता है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, पुतिनका यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को नए दौर में ले जाएगा।

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