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न लड्डू न फलः इन मंदिरों में देवी को लगता है पिज्जा, सैंडविच और पानी-पुरी का भोग!

नेशनल डेस्कः भारत में देवी-देवताओं के प्रति आस्था इतनी गहरी है कि लोग भगवान को प्रसन्न करने के लिए अनेक तरह के भोग अर्पित करते हैं। आमतौर पर लड्डू, पेड़ा, मेवा, खीर-पूड़ी या फल-फूल जैसी पारंपरिक चीजें ही भोग में शामिल होती हैं। लेकिन देश में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जहां देवी को पिज्जा, बर्गर, सैंडविच, पानी-पुरी और यहां तक कि ठंडे पेय तक का भोग लगाया जाता है।

पहली नजर में यह परंपरा अजीब लग सकती है, लेकिन श्रद्धालु इसे देवी की अनोखी इच्छा और आधुनिक समय के अनुसार बदलती भक्ति-भावना का प्रतीक मानते हैं। भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, लेकिन यहां दो प्रमुख मंदिरों की चर्चा है—

  1. राजकोट (गुजरात) के रापूताना स्थित जीविका माताजी मंदिर
  2. चेन्नई (तमिलनाडु) के पड़प्पाई में स्थित जय दुर्गा पीठम मंदिर

1. जीविका माताजी मंदिर, रापूताना (राजकोट, गुजरात)

बच्चों की लंबी उम्र के लिए चढ़ाया जाता है मॉडर्न प्रसाद

यह मंदिर लगभग 65–70 वर्ष पुराना माना जाता है। यहां माता की कृपा पाने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं, विशेषकर वे परिवार जो अपने बच्चों की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। मंदिर के आचार्यों के अनुसार पहले यहां केवल नारियल, बताशा और पारंपरिक प्रसाद ही चढ़ते थे। समय के साथ बच्चों को आकर्षित करने और उनके मनपसंद भोजन को प्रसाद स्वरूप चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। अब यहां बर्गर, पिज्जा, सैंडविच, पानी-पुरी, कोल्ड ड्रिंक आदि को भी प्रसाद माना जाता है।

दान राशि से समाजसेवा

मंदिर प्रशासन का कहना है कि यहां मिलने वाला दान केवल धार्मिक कार्यों में नहीं, बल्कि गरीबों की सहायता और सामाजिक सेवा में भी खर्च किया जाता है। इसी कारण भक्त उत्साह से दान करते हैं और प्रसाद भी विविध रूपों में अर्पित करते हैं।

2. जय दुर्गा पीठम मंदिर, पड़प्पाई (चेन्नई, तमिलनाडु)

अनोखे प्रसाद की वजह से देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु

इस मंदिर की स्थापना हर्बल ऑन्कॉलॉजिस्ट डॉ. के. श्री श्रीधर ने की है। यह मंदिर अपने मॉर्डनाइज्ड प्रसाद मेन्यू की वजह से खास पहचान रखता है। यहां भक्त देवी को— पिज्जा, बर्गर, सैंडविच, पास्ता और अन्य आधुनिक व्यंजन अर्पित करते हैं।

जन्मदिन पर मिलता है ‘केक प्रसाद’

मंदिर में लोगों का जन्मदिन भी पंजीकृत किया जाता है। जन्मदिन आने पर मंदिर में केक काटा जाता है और देवी को अर्पित करने के बाद भक्तों को केक का प्रसाद दिया जाता है। यह अनोखा रिवाज बच्चों और युवा भक्तों को मंदिर से जोड़ने का एक विशेष तरीका बन गया है।

प्रसाद की शुद्धता का विशेष ध्यान

सभी प्रसाद पवित्र रसोईघर में बनाए जाते हैं। किसी भी प्रसाद में निषिद्ध सामग्री का प्रयोग नहीं होता। FSSAI द्वारा प्रमाणित भोजन ही मंदिर में उपयोग किया जाता है और पूरी प्रक्रिया धार्मिक शुचिता और स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप होती है।

क्यों बदली मंदिरों में भोग की परंपरा?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव आधुनिक पीढ़ी को मंदिरों से जोड़ने का प्रयास है। बच्चे और युवा आधुनिक व्यंजन पसंद करते हैं, इसलिए इन्हें देवी को भोग रूप में समर्पित किया जाता है। भोग का सार भावनाओं में है, न कि भोजन के प्रकार में। भक्त मानते हैं कि “देवी प्रसाद को स्वीकारती हैं, बस मन से चढ़ाया जाए”।

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