छत्तीसगढ़

किन्नर समुदाय का दर्दनाक कदम — वर्चस्व की जंग में 24 ने एक साथ पी लिया ज़हर

इंदौर, 16 अक्टूबर 2025 : मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में बुधवार शाम एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब किन्नर समुदाय के 24 सदस्यों ने सामूहिक रूप से ज़हर पी लिया। यह घटना शहर के नंदलालपुरा इलाके की है, जहां लंबे समय से दो गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और एम्बुलेंस की टीम मौके पर पहुंची और सभी को तत्काल एमवाय अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने राहत भरी जानकारी दी कि सभी की हालत अब खतरे से बाहर है, हालांकि दो किन्नर अभी भी आईसीयू में निगरानी में हैं।

क्या है पूरा मामला?

पंढरीनाथ थाना क्षेत्र के नंदलालपुरा में स्थित एक किन्नर डेरे में यह हादसा हुआ। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि दो गुटों के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से और आक्रोश में एक गुट के 24 सदस्यों ने फिनायल जैसा जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया।

एडिशनल डीसीपी (क्राइम ब्रांच) राजेश दंडोतिया ने बताया, “सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। प्राथमिक जांच में आत्महत्या का मामला प्रतीत नहीं होता, लेकिन पूरे प्रकरण की गहन जांच जारी है।”

घटनास्थल से सामने आए वीडियो में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दे रहा है। साथी किन्नर एक-दूसरे को संभालते और एम्बुलेंस बुलाने की कोशिश करते नजर आए। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

समाज के हाशिये पर खड़ा यह समुदाय

इंदौर का किन्नर समुदाय शहर की सामाजिक-सांस्कृतिक बनावट का अहम हिस्सा है। जन्म और विवाह जैसे अवसरों पर आशीर्वाद देना इनकी परंपरा रही है, लेकिन आंतरिक गुटबाजी, क्षेत्रीय वर्चस्व और सामाजिक भेदभाव ने इन्हें बार-बार विवादों के केंद्र में ला दिया है।

2022 में इंदौर में एक किन्नर की हत्या का मामला सुर्खियों में था, जबकि जुलाई 2025 में विजयनगर इलाके में एक संदिग्ध मौत के पीछे भी इसी समुदाय की आपसी रंजिश बताई गई थी।

सामाजिक कार्यकर्ता नेहा शर्मा का कहना है,“किन्नर समुदाय की समस्याएं सिर्फ सामाजिक स्वीकृति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आर्थिक असुरक्षा और मानसिक तनाव से भी जुड़ी हैं। सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।”

प्रशासन सक्रिय, जांच जारी

पुलिस ने दोनों गुटों से पूछताछ शुरू कर दी है। पंढरीनाथ थाने के एसएचओ ने बताया कि वरिष्ठ किन्नरों को बुलाकर सुलह की कोशिश की जा रही है।
वहीं, जिला प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि सभी प्रभावितों को निःशुल्क इलाज और काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाए।

इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा, “हम इस घटना को समाज के लिए एक चेतावनी मानते हैं। किन्नर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जल्द विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा।”

आगे की राह — संवाद ही समाधान

राहत की बात है कि सभी 24 किन्नर अब खतरे से बाहर हैं, और जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है। लेकिन यह घटना एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है— क्या हमारे समाज में अब भी वह जगह बाकी है जहाँ हर पहचान को समान सम्मान मिले?

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