संपादकीय

दोहरे तोहफों की दीपावली

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश के साथ जो वायदा किया था, वह साकार होने की प्रक्रिया में है। वाकई इस बार दीपावली और अन्य त्योहारों पर ‘दोहरा तोहफा’ मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद ने ‘सुधारों के उपहार’ को स्वीकृति दे दी है। अब 22 सितंबर के बाद से आम आदमी, महिलाएं, पुरुष, युवा और औसत घर लाभान्वित होंगे। इस तारीख से ‘शारदीय नवरात्र’ भी आरंभ हो रहे हैं। सभी का मासिक खर्च कम होगा, तो बचत बढ़ेगी। वह बचत बाजार और औसत खपत में खर्च होगी। इससे एफएमसीजी (तेजी से बिकने वाली उपभोक्ता वस्तुएं), खुदरा और ऑटोमोबाइल आदि कई क्षेत्रों में घटे दामों पर उपभोक्ता-मांग में बढ़ोतरी होगी। विनिर्माण से लेकर सेवा क्षेत्रों में वृद्धि होगी। मांग और खरीद बढ़ेगी, तो उत्पादन भी बढ़ेगा। अंतत: देश की अर्थव्यवस्था ही फलेगी-फूलेगी। रोटी, कपड़ा और घर के रोजमर्रा के सामान पर कर (जीएसटी) 12 फीसदी से घट कर 5 फीसदी और इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान पर कर 28 फीसदी से घट कर 18 फीसदी हो जाएगा, तो यकीनन आम आदमी राहत महसूस करेगा। महंगाई पहले से ही नियंत्रण में है। यदि प्रधानमंत्री रोजगार के मोर्चे पर भी स्पष्ट योजनाओं की घोषणा कर दें, तो यह देश और भी संपन्न होगा। यदि देश संपन्न होगा और खर्च का माद्दा बढ़ेगा, तो अर्थव्यवस्था भी व्यापक होगी और भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। वैसे जर्मनी और भारत की अर्थव्यवस्था के बीच बहुत कम फासला शेष है, लिहाजा हमारा तीसरी ‘आर्थिक महाशक्ति’ बनना तय है। जीएसटी 2.0 सुधारों के तौर पर आठ लंबे सालों के बाद ‘ऐतिहासिक बदलाव’ है। उसकी प्रक्रिया को आसान बनाया गया है, नतीजतन करोड़ों व्यापारी और खुदरा-व्यवसायी लाभान्वित होंगे। अब कारोबारियों को टैक्स से जुड़े नियमों और कानूनों पर कम खर्च करना पड़ेगा। वे ग्राहक और नवाचार पर अधिक फोकस कर सकेंगे। बताया जा रहा है कि देश में कर घटाने से 2 लाख करोड़ रुपए तक की खपत बढ़ सकती है।

इसका फायदा छोटे उद्यमों को ज्यादा होगा। आम आदमी और ग्राहकों को मिलने वाले उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। हालांकि कर्नाटक, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, झारखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसी विपक्ष-शासित राज्यों की सरकारों ने करीब 48,000 करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का मुद्दा उठाया है, लिहाजा केंद्र सरकार से मांग की है कि 5 साल तक मुआवजा दिया जाए और वित्तीय सुरक्षा की गारंटी दी जाए। इसमें राजनीति भी हो सकती है। बहरहाल इस मुद्दे पर पर्याप्त विमर्श हुआ होगा! सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कैंसर समेत 33 जीवन-रक्षक दवाओं पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा। अन्य सभी दवाओं पर अब जीएसटी 12 फीसदी से घट कर 5 फीसदी हो जाएगा। शिक्षण सामग्रियों में नक्शे, चार्ट, ग्लोब, पेंसिल, शार्पनर, पेस्टल, कॉपी, नोटबुक और इरेजर आदि 12 फीसदी और 5 फीसदी से घटा कर ‘शून्य जीएसटी’ वाले वर्ग में डाल दिए गए हैं। इनके अलावा, हेयर ऑयल, शैंपू, टॉयलेट सोप बार, टूथ ब्रश, शेविंग क्रीम, जिम, सैलून, योग केंद्र आदि पर जीएसटी 18 फीसदी से 5 फीसदी कर दिया गया है। बटर, घी, चीज और डेयरी स्प्रेड्स, प्री-पैक नमकीन, भुजिया, मिक्सचर, बर्तन, बच्चों के नैपकिन, क्लिनिकल डायपर, सिलाई मशीन और उसके पुर्जे, हैंडीक्राफ्ट आदि पर जीएसटी 12 फीसदी से 5 फीसदी किया गया है। अल्ट्रा हाई टेंपरेचर दूध, छेना, पनीर, रोटी और खाकरा, परांठा, ब्रेड समेत सभी भारतीय रोटी पर जीएसटी अब 5 फीसदी के बजाय शून्य लगेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा 18 फीसदी से घटा कर शून्य किया गया है। हालांकि उपकरणों पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। बीमा की दरें अब बहुत कम हो जाएंगी। देश में अभी 57 करोड़ से अधिक लोगों के पास स्वास्थ्य और करीब 31 करोड़ के पास जीवन बीमा है। कृषि, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी सस्ते हो जाएंगे। हालांकि 40 फीसदी का एक और स्लैब रखा गया है, जो सिगरेट, कोल्ड ड्रिंक्स, पान मसाला, तंबाकू, गुटखा आदि विलासिता की वस्तुओं के लिए होगा। इस वर्ग में 350 सीसी से अधिक क्षमता वाली बाइक और निजी विमान भी शामिल हैं। जीएसटी 2.0 से हाथों में सीधे पैसे आएंगे, नतीजतन भारत वैश्विक निर्यात का मजबूत केंद्र बनेगा। हालांकि यह भी सच्चाई है कि आर्थिकी के क्षेत्र में भारत को अभी अमरीका व चीन जैसे देशों की तुलना में लंबी दूरी तय करनी है।

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