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कलंक चौथ के दिन क्यों नहीं देखना चाहिए चांद, जानें क्या है टाइमिंग, धार्मिक मान्यता और महत्व

कलंक चौथ एक विशेष व्रत है, जिसे भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष चौथ को मनाया जाता है. इस दिन चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए, क्योंकि पुरानी कथा अनुसार इससे झूठे आरोपों का सामना करना पड़ सकता है. व्रत और पूजा करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक शुद्धि और जीवन से बाधाएं दूर होती हैं

: धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से कलंक चौथ या कलंक चतुर्थी एक विशेष दिन माना जाता है. इसे पत्थर चौथ के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष चौथ तिथि को मनाया जाता है. रोचक बात यह है कि यह दिन अक्सर गणेश चतुर्थी के साथ भी पड़ता है, जो भगवान गणेश के जन्मोत्सव का पर्व है. इस दिन का सबसे खास नियम है कि चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए, और इसके पीछे एक पुरानी कथा जुड़ी हुई है.

कलंक चौथ की कथा और महत्व

कथा के अनुसार, एक बार चंद्रमा ने भगवान गणेश की लंबी पेट और हाथी के सिर वाली आकृति का मजाक उड़ाया. क्रोधित गणेश ने चंद्रमा को शाप दिया कि इस दिन अगर कोई चंद्रमा को देखेगा तो उसे झूठे आरोपों का सामना करना पड़ेगा.

कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने भी एक बार इस दिन चंद्रमा देखा, जिससे उन पर स्यमंतक रत्न चोरी का झूठा आरोप लगा. संकट में फंसकर भगवान कृष्ण ने गणेश चतुर्थी के दिन व्रत रखा और गणेशजी की कृपा से उन पर लगे झूठे आरोप दूर हो गए.

कलंक चौथ 2025: तिथि और समय

  • 26 अगस्त: 1:54 बजे शाम से 8:29 बजे रात तक चंद्रमा न देखें
  • 27 अगस्त: 9:28 बजे सुबह से 8:57 बजे शाम तक चंद्रमा न देखें

कलंक चौथ पूजा और महत्व

इस दिन भक्तजन गणेशजी की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और उन्हें सिंदूर अर्पित करते हैं. विशेष समय पर चंद्रमा को न देखने का नियम है, ताकि किसी भी नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके.

कलंक चौथ व्रत और पूजा करने से मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि होती है. यह दिन व्यक्ति के जीवन से बाधाओं को दूर करने और आध्यात्मिक विकास बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है.

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