स्वास्थ्य

डिलीवरी के बाद क्यों गड़बड़ा जाते हैं महिला के Periods, जानिए कारण और इलाज

डेस्क : पहली बार मां बनने वाली माताओं के मन में बच्चे को जन्म देने के बाद उनके शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर कई सवाल होते हैं और सबसे बड़ी चिंता स्तनपान के दौरान पीरियड्स मिस होने के बारे में है। अकसर बच्चे के जन्म के बाद, महिलाओं का मासिक धर्म चक्र बदल जाता है। जो महिलाएं स्तनपान नहीं कराती हैं, उनमें मासिक धर्म चक्र अक्सर पहले शुरू हो जाता है और पहला मासिक धर्म चक्र जन्म देने के लगभग 6 सप्ताह बाद शुरू होता है, जो लगभग 40% मामलों में होता है। ज़्यादातर महिलाओं में, जन्म देने के 24 सप्ताह बाद मासिक धर्म चक्र फिर से शुरू हो जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में मासिक धर्म चक्र और फिर कुछ महीनों तक एमेनोरिया के मामले फिर से नियमित हो जाते हैं। स्तनपान कराने वाली महिलाओं में मासिक धर्म चक्र देर से शुरू होता है क्योंकि स्तन के दूध में मौजूद प्रोलैक्टिन हाइपोथैलेमस, पिट्यूटरी ग्रंथि और अंडाशय की गतिविधि में बदलाव लाता है और मासिक धर्म चक्र को धीमा कर देता है। प्रसव के बाद महिलाओं का मासिक धर्म चक्र काफी अनियमित और अलग होता है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें क्या हैं…

1. हार्मोनल बदलाव ही मुख्य कारण

जब मां अपने नवजात शिशु को स्तनपान कराती है, तब उसके शरीर में प्रोलैक्टिन (Prolactin) नामक हार्मोन का स्तर बढ़ता है। यह हार्मोन स्तन में दूध बनाने के लिए जिम्मेदार होता है। लेकिन प्रोलैक्टिन का एक और प्रभाव होता है, यह ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्ग) को दबा देता है। जब ओव्यूलेशन नहीं होता, तो मासिक धर्म भी नहीं आता। इसलिए, जब तक मां नियमित रूप से और विशेषकर दिन-रात स्तनपान करवा रही होती है, तब तक प्रोलैक्टिन का स्तर ऊचा रहता है, जिससे पीरियड्स नहीं आते।

2. लैक्टेशनल एमेनोरिया क्या है?

लैक्टेशनल एमेनोरिया (Lactational Amenorrhea Method (LAM) एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक तरीका भी माना जाता है। LAM तब प्रभावी होता है, जब बच्चा 6 महीने से छोटा हो। मां नियमित रूप से स्तनपान करवा रही हो (कोई फार्मूला दूध नहीं दे रही)। मां का मासिक धर्म शुरू नहीं हुआ हो। इस स्थिति में गर्भवती होने की संभावना केवल 2% से भी कम होती है।

3. कब तक रुके रह सकते हैं पीरियड्स?

यह हर महिला के शरीर पर निर्भर करता है, क्योंकि कुछ महिलाओं में डिलीवरी के 6-8 हफ्ते बाद ही पीरियड्स लौट आते हैं, खासकर अगर वह स्तनपान नहीं करवा रही हैं। पर जो महिलाएं पूरी तरह से स्तनपान करवा रही हैं, उनके पीरियड्स 6 महीने से लेकर 1 साल तक भी नहीं आते। लेकिन कुछ मामलों में जब तक स्तनपान चलता रहता है (यहां तक कि 18-24 महीने तक), तब तक मासिक धर्म नहीं आता।

4. क्या बिना पीरियड्स के भी ओव्यूलेशन हो सकता है?

हां, यह संभव है कि बिना पीरियड्स के भी ओव्यूलेशन हो सकता है। क्योंकि कुछ महिलाओं में ओव्यूलेशन पहले होता है और मासिक धर्म बाद में आता है। इसका मतलब है कि स्तनपान के दौरान भी गर्भधारण संभव है, भले ही पीरियड्स ना आ रहे हों। इसलिए यदि आप गर्भवती नहीं होना चाहतीं, तो उचित गर्भनिरोधक उपाय जरूरी हैं, भले ही मासिक धर्म रुका हुआ हो।

5. क्या पीरियड्स आने से दूध की मात्रा या गुणवत्ता पर असर पड़ता है?

कुछ महिलाओं को पीरियड्स शुरू होने पर दूध की मात्रा में हल्का फर्क महसूस होता है। यह बदलाव आमतौर पर हार्मोनल होता है और अस्थायी होता है। जेससे दूध की गुणवत्ता और पोषण पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। बता दे कि इस दौरान मां को अच्छी डाइट, पर्याप्त पानी और आराम की ज़रूरत होती है।

6. डॉक्टर से कब सलाह लें?

आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि: डिलीवरी के बाद 6-8 हफ्ते के भीतर भी खून का बहुत अधिक बहाव हो।
पीरियड्स लौटने के बाद बहुत अनियमित, दर्दनाक या अत्यधिक रक्तस्राव हो। स्तनपान कराने के बावजूद अचानक गर्भावस्था के लक्षण दिखें, और दूध की आपूर्ति में अचानक गिरावट आ जाए तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

याद रखिएः स्तनपान के दौरान मासिक धर्म का रुक जाना एक प्राकृतिक और सामान्य प्रक्रिया है। यह शरीर का तरीका है यह सुनिश्चित करने का कि मां का शरीर पहले से ठीक हो जाए और शिशु को पर्याप्त पोषण मिल सके। हालांकि, इस दौरान गर्भधारण की संभावना शून्य नहीं होती  इसलिए सही जानकारी और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

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