मनसे से गठबंधन के लिए उद्धव उतावले, मगर इशारा देकर राज ठाकरे क्यों हुए खामोश

मुंबई : बृहन्मुंबई महानगर पालिका यानी बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण बन चुके हैं। सत्ताधारी शिंदे सेना, बीजेपी और विपक्ष में बैठी उद्धव सेना मनसे से गठबंधन की संभावना तलाश रही है। पिछले दो महीनों से अपने चचेरे भाई से चुनावी गठबंधन के लिए सबसे अधिक उतावले उद्धव ठाकरे नजर आ रहे हैं। पहले मुखपत्र सामना में उद्धव-राज की पुरानी तस्वीरें छापीं गई फिर शिवसेना के स्थापना दिवस पर भी मराठी मानुस, ठाकरे परिवार में सुलह की बात हुइ, मगर राज ठाकरे की खामोश रहकर सस्पेंस को बढ़ा दिया। 12 जून को सीएम देवेंद्र फडणवीस के साथ एक होटल में गुप्त मुलाकात के बाद उन्होंने उद्धव सेना के साथ गठबंधन पर चुप्पी साध ली।
देवेंद्र फड़णवीस के साथ गुप्त मीटिंग से नया मोड़
महाराष्ट्र की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ आया है। 27 निगमों और बीएमसी चुनाव से पहले गठबंधन के नए-नए समीकरणों पर कयास लगाए जा रहे हैं। सबकी नजर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के फैसले पर टिकी है। राज ठाकरे किसके साथ जाएंगे? शिवसेना (शिंदे गुट) भी मनसे के साथ चुनाव लड़ने के लिए उत्सुक है। सीएम देवेंद्र फडणवीस भी राज ठाकरे से गुप्त मीटिंग कर चुके हैं। उद्धव ठाकरे कई बार राज ठाकरे से सुलह और साथ चुनाव लड़ने की बात कर चुके हैं। अप्रैल में राज ठाकरे ने पहली बार ठाकरे परिवार के साथ आने का संकेत दिया था, मगर इसके बाद से वह चुप हैं।
रिझाने के लिए सामना में छापा पुराना फैमिली फोटो
इस बीच उद्धव ठाकरे की ओर से उनके बेटे आदित्य ठाकरे और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने राज ठाकरे के साथ गठबंधन की वकालत की। संजय राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे गठबंधन को लेकर पॉजिटिव हैं। आदित्य ठाकरे ने भी मई में कई बार कहा कि महाराष्ट्र विरोधी बीजेपी का विरोध करने वाले सभी लोगों का स्वागत है। 6 जून को उद्धव ठाकरे ने कहा था कि गठबंधन को लेकर सकारात्मक बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता जो चाहती है, वही होगा। इसके बाद उनके अखबार सामना में भी पहले पन्ने पर दोनों भाइयों की एक पुरानी तस्वीर छापी। ऐसा 20 सालों में पहली बार हुआ था। मुंबई, ठाणे और राज्य के अन्य हिस्सों में उद्धव-राज के पोस्टर लगाए गए।
मेलमिलाप का विलेन तो नहीं बन रही है बीजेपी?
इस बीच राज ठाकरे ने सीएम देवेंद्र फड़णवीस से मुलाकात कर अटकलों को नई हवा दे दी। इससे उद्धव तिलमिला गए। शिवसेना स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह दोनों भाइयों को फिर से मिलने से रोकना चाहती है। दरअसल सारा खेल मराठी वोटरों का है, जो अभी शिवसेना (शिंदे), मनसे और यूबीटी के बीच बंटती दिखाई पड़ रही है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद उद्धव ठाकरे किसी भी कीमत पर मराठी वोटों का बंटवारा नहीं चाहते हैं। अगर वोट बंटा तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को होना तय है। बीएमसी पिछले तीन दशकों से शिवसेना का गढ़ रहा है। एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर ठाकरे परिवार एक हो जाता है तो मुंबई, ठाणे, नासिक और पुणे समेत 10 बड़े शहरों में इसका असर दिखेगा।
यूबीटी से गठबंधन किया तो ‘छोटे भाई’ की छवि चिपकेगी
विधानसभा चुनाव में ज्यादा हासिल नहीं करने के बावजूद राज ठाकरे वोटों की अहमियत को जानते हैं। वह चुप हैं, मगर उनकी पार्टी के नेता संदीप देशपांडे लगातार बयान दे रहे हैं। उन्होंने हाल में ही कहा कि उद्धव ठाकरे की ओर से गठबंधन का औपचारिक प्रस्ताव आया नहीं है। उन्होंने यूबीटी नेतृत्व को याद दिलाया कि पहले मनसे से गठबंधन की पहल की थी, मगर उसे बदले में धोखा मिला। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे पहले बाल ठाकरे की तस्वीर के इस्तेमाल पर आपत्ति जता चुके हैं। मनसे नेताओं का मानना है कि अगर उद्धव ठाकरे से गठबंधन हुआ तो उन्हें जूनियर पार्टनर माना जाएगा। इसका असर पार्टी के भविष्य पर भी पड़ सकता है। साथ आने का फायदा तो शिवसेना को तत्काल मिल जाएगा, मगर राज ठाकरे की हैसियत मुंबई की राजनीति में ‘छोटे भाई’ की हो जाएगी।


