महाराष्ट्र

महिला-पार्टनर के बीच सहमति से बने रिश्ते, प्रेग्नेंसी रोकने का उपकरण फेल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्या दिया आदेश?

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गर्भावस्था रोकने के उपकरण की विफलता के कारण गर्भवती हुई महिला को 25 हफ्ते के भ्रूण के गर्भपात की अनुमति दे दी है,वहीं महिला को इस स्थिति तक लाने में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले पार्टनर को एक लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। रिश्ते बनाने के बाद मुंह मोड़ने वाले महिला के पार्टनर को कोर्ट ने गर्भपात की प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहने को भी कहा है।

कोर्ट ने क्या कहा?

केस के तथ्यों के मद्देनजर कोर्ट ने कहा कि गर्भावस्था जारी रखने से पहले से परेशान महिला की मानसिक सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। बच्चे को जन्म देने और महिला के अपने शरीर पर हक को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता (महिला) को गर्भपात की इजाजत दी है। चूंकि महिला ने भ्रूण के हृदय की धड़कन को रोककर गर्भपात की इजाजत मांगी थी, इसलिए महिला को अदालत ने ऐसी सुविधा वाले अस्पताल में भर्ती होने की छूट दी है। इससे पहले कोर्ट ने महिला के पार्टनर को भी अदालत में तलब किया था, क्योंकि उसने महिला को किसी भी तरह की सहायता देने से इंकार कर दिया था।

महिला और पार्टनर के बीच सहमति से बने थे रिश्ते

31 वर्षीय महिला से बातचीत करने के दौरान जस्टिस रेवती मोहिते ढेरे और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने पाया कि वह बहुत व्यथित है। सामाजिक कलंक के साथ-साथ वह अपने माता पिता का सामना करने के बारे में चिंतित है। याचिका में महिला ने कहा था कि वह अपने पार्टनर के साथ सहमति से रिश्ते में थी। उसका और उसके पार्टनर का गर्भावस्था रोकने वाले उपकरण की विफलता के कारण वह गर्भवती हुई है। अब वह पार्टनर के साथ रिश्ते में नहीं है। पार्टनर ने अब उससे दूरी बना ली है, इसलिए वह गर्भावस्था को जारी रखने की इच्छुक नहीं है।

‘उदासी और तनाव भरा रहा महिला का इतिहास’

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट देखने पर कोर्ट ने पाया कि वित्तीय बाधाओं और व्यक्तिगत संघर्षों के चलते महिला का इतिहास उदासी और तनाव भरा रहा है। पिछले आठ वर्षों से वह शराब का सेवन करती रही है। 5 वर्षों से रोज तीन से चार सिगरेट पीती रही है। पिछली बीमारियों के लिए वह सर्जरी करा चुकी है। वह गर्भपात का निर्णय के लिए फिट है। उसने अपने मर्जी और सचेत होकर गर्भपात का निर्णय किया है।

गर्भनिरोधक उपाय की विफलता के चलते हुई प्रग्नेंसी
सुनवाई के दौरान महिला की वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास गर्भावस्था को पूर्ण अवधि तक जारी रखने के लिए न तो कोई वित्तीय आधार है और न ही कोई भावनात्मक समर्थन। याचिकाकर्ता और उसके साथी द्वारा किए गए गर्भनिरोधक उपाय की विफलता के चलते प्रग्नेंसी हुई है। अब न तो महिला का पार्टनर कोई सहायता देने को तैयार और न उसके माता -पिता,ऐसे में गर्भावस्था को जारी रखना याचिकाकर्ता के मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।

‘भ्रूण में नहीं है विसंगति’

वहीं सरकार वकील ने कहा कि महिला के भ्रूण में कोई विसंगति नहीं है। महिला जबरन रिश्ते के चलते गर्भवती नहीं हुई है। लिहाजा महिला को गर्भावस्था को पूर्ण अवधि के लिए जारी रखने का निर्देश दिया जा सकता है। यदि बच्चा जीवित पैदा होता है, तो सरकार उसकी जिम्मेदारी निभाएंगी।

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