संपादकीय

ग्रोथ पर दांव

भारतीय रिजर्व बैंक ने आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए रेपो दरों में 0.5% की कटौती की है, जो विशेषज्ञों के अनुमान से अधिक है। साथ ही, कैश रिजर्व रेश्यो में 1% की कमी की गई है, जिससे बैंकों के पास कर्ज देने के लिए अधिक धन उपलब्ध होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने इकॉनमिक ग्रोथ बढ़ाने के लिए शुक्रवार को रेपो दरों में आधा फीसदी की कटौती की, जबकि एक्सपर्ट्स इसमें 0.25% कमी का अनुमान लगा रहे थे। इसके साथ, उसने कैश रिजर्व रेश्यो में 1% की कमी का ऐलान किया। इससे बैंकों के पास पैसा और बढ़ेगा, जिसका इस्तेमाल वे कर्ज बांटने में कर सकेंगे। ऐसे में सस्ती दरों पर कर्ज लेकर कंपनियां नए निवेश करती हैं और उपभोक्ता खर्च करते हैं तो अर्थव्यवस्था को इससे सपोर्ट मिलेगा।

वैश्विक चुनौतियां: रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी बार दरों में कटौती की है। इससे पहले उसने कहा था कि उसका ध्यान इकॉनमिक ग्रोथ को तेज करने पर है। RBI के लिए रेपो दरों और कैश रिजर्व रेश्यो में कटौती करना इसलिए संभव हुआ क्योंकि उसे मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई दर के लक्ष्य से अंदर रहने की उम्मीद है। लेकिन यूक्रेन-रूस युद्ध और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के टैरिफ संबंधी अनिश्चितताओं के कारण ग्रोथ की राह चुनौतीपूर्ण हो गई है।

ग्रोथ पर दबाव: जनवरी-मार्च 2025 तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ उम्मीद से अधिक 7.4% पहुंच गई, लेकिन वित्त वर्ष 2025 के लिए यह 6.5% ही रही। यह पिछले चार वित्त वर्षों में सबसे कम विकास दर है। गौर करने की बात यह भी है कि इससे पिछले वित्त वर्ष यानी 2024 में यह 9.2% रही थी। स्पष्ट है कि विकास दर में गिरावट का रुख है। इस बीच, वैश्विक स्तर पर परिदृश्य मुश्किल दिख रहा है।

खर्च बढ़ने की आशा: इसी वजह से जनवरी-मार्च 2025 तिमाही में शानदार ग्रोथ के बावजूद रिजर्व बैंक ने कैश रिजर्व रेश्यो में बड़ी कटौती के साथ रेपो दरों में भी बड़ी कमी की है। इससे बिजनेस सेंटिमेंट और कंस्यूमर सेंटिमेंट में सुधार होगा। पिछले बजट में 12 लाख तक की आमदनी पर टैक्स छूट का ऐलान किया गया था ताकि लोगों के हाथ में अतिरिक्त खर्च करने के लिए पैसा बचे। अब ब्याज दरों में बड़ी कटौती के बाद कंस्यूमर सेंटिमेंट और बेहतर होगा। EMI का बोझ घटेगा। ऐसे में उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी होती है तो इससे आर्थिक विकास दर में तेजी आएगी।

मजबूत इकॉनमी: रिजर्व बैंक ने अपना रुख न्यूट्रल करते हुए यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक ग्रोथ के लिए जो कर सकता है, वह कर चुका है। यानी अब बाकी कदम पॉलिसी मेकर्स को उठाना है। सरकार ने रिजर्व बैंक के कदम का स्वागत करते हुए कहा भी कि इससे ग्रोथ मोमेंटम को सपोर्ट मिलेगा और निजी क्षेत्र की तरफ से निवेश बढ़ने की उम्मीद है। निजी क्षेत्र का कमजोर निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अरसे से समस्या बना हुआ है। लेकिन हालिया ग्रोथ यह भी बताती है कि बेहद मुश्किल वैश्विक माहौल में भारतीय इकॉनमी मजबूत बनी हुई है।

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