एआई ड्रोन जंगी अस्त्र

यूक्रेन ने रूस के काफी भीतर उसके 5 एयरबेस और 41 बॉम्बर, लड़ाकू विमानों को तबाह कर दुनिया को चौंका दिया है। बल्कि विश्व स्तब्ध है कि यूक्रेन के पास ऐसी जंगी प्रौद्योगिकी भी है, जो 2000 किमी. से 6000 किमी. की दूरी तक सफल, असरदार, विध्वंसक हमला कर सकती है। जो देश अभी तक यूक्रेन की आर्थिक और सैन्य मदद करते रहे हैं, वे भी हैरान हैं और आत्ममंथन कर रहे हैं। रूस के ये बॉम्बर ऐसे थे, जो परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने में भी सक्षम थे। रूस ने इन्हीं विमानों के जरिए यूक्रेन के कई शहरों पर हवाई हमले किए थे और शहरों को खंडहर बना दिया था। यूक्रेन ने ऐसा घातक पलटवार कैसे किया, उसके ब्यौरे सामने आ चुके हैं। रूस की टीमें जांच-पड़ताल करने में जुटी हैं कि यूक्रेन के फस्र्ट पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन एयरबेसों तक कैसे पहुंचे और किसी को भी भनक तक नहीं लगी। रूस सोया रह गया और उसका पूरा तंत्र नाकाम रहा। रूस को करीब 60,000 करोड़ रुपए का नुकसान आंका जा रहा है। कुछ और आंकड़ों का भी विश्लेषण सामने आया है। रूस को अकल्पनीय, अप्रत्याशित नुकसान हुआ है, लेकिन वह अब भी महाशक्ति है और यूक्रेन पर इससे भी घातक और संहारक हमला करने की योजना बनाई जा रही है। अब राजधानी कीव भी राष्ट्रपति पुतिन के निशाने पर है। दरअसल यूक्रेन ने जो ड्रोन्स इस्तेमाल किए, उन्हें ‘कृत्रिम बौद्धिकता’ (एआई) से संचालित किया गया। यह वैज्ञानिक नवाचार यूक्रेन का ही है अथवा किसी देश ने उसे मुहैया कराया है, यह रहस्य फिलहाल नहीं खुल पाया है, लेकिन इतना लगता है कि इन ड्रोन्स को ‘एआई एलगोरिथ्म’ पर प्रशिक्षित किया गया होगा! एलगोरिथ्म कम्प्यूटर विज्ञान की भी एक अवधारणा है। यह किसी विशिष्ट कार्य को करने के लिए दिए गए निर्देशों की एक प्रक्रिया भी है, जिसने रूसी बॉम्बर विमानों की पहचान की और उन पर निर्णायक प्रहार कर उन्हें ‘मिट्टी-मलबा’ बना दिया।
यूक्रेन के इस ‘ऑपरेशन मकडज़ाल’ ने स्पष्ट कर दिया है कि इस ड्रोन हमले ने युद्ध को बदल दिया है। हम किसी पक्ष की जीत या हार की भविष्यवाणी नहीं कर रहे, लेकिन यह एक भयानक सच है कि रूस-यूक्रेन युद्ध 3 साल 3 महीने से जारी है और यूक्रेन अभी पराजित होने की स्थिति में नहीं है। दोनों देशों के बीच समझौता-वार्ता हुई है, युद्धबंदियों को रिहा करने की बुनियादी सहमति बनी है, लेकिन युद्धविराम के लिए फिलहाल सहमति दूर-दूर तक नहीं दिखती। अब तो पृष्ठभूमि में ड्रोन हमला भी झलक रहा है। हालांकि रूस ने शुरुआत में दावा किया था कि युद्ध 7-10 दिन चलेगा और यूक्रेन पराजय स्वीकार कर लेगा। रूस पर यूक्रेन के इस हमले को ‘पर्ल हॉर्बर’ हमले के बराबर माना जा रहा है। अमरीका पर उस हमले के बाद ही जापान के हिरोशिमा-नागासाकी शहरों पर अमरीका ने एटम बम गिराए थे। विध्वंस का वह इतिहास सभी जानते हैं और अमरीका को द्वितीय विश्व युद्ध में उतरने को विवश किया गया था। पुतिन के नंबर दो दिमित्री मेदवेदेव ने भी अब परमाणु हमले की धमकी दी है, लिहाजा पूरा विश्व चिंतित है। बहरहाल यदि वर्ष 2024 एफपीवी ड्रोन का था, तो 2025 के बीते सप्ताह तक ‘फाइबर ऑप्टिक एफपीवी ड्रोन’ का दौर था। ये ड्रोन रूसी सेनाओं का नवाचार था। यूक्रेन ने उसे भी पार कर लिया है और एआई संचालित ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रूस पर बेहद घातक प्रहार किया है। साफ है कि आने वाले युद्ध एआई संचालित, स्वायत्त ड्रोन से ही लड़ जाएंगे। यूक्रेन के इस हमले में भारत के लिए भी कुछ सबक निहित हैं। भारत ने अपने लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टर, एयरट्रांसपोर्ट में दशकों तक रणनीतिक प्रयास किए हैं, लेकिन ‘ऑपरेशन मकडज़ाल’ एक महत्वपूर्ण पुष्टि करता है कि वायु-शक्ति का भविष्य मानवरहित, एआई संचालित और लंबी दूरी का होगा। भारत ने उस दिशा में शुरुआती कदम उठाए हैं।



