राष्ट्रीय

छटपटा रहा पाकिस्तान, ताक रहा चीन का मुंह… ब्रह्मपुत्र के सहारे आखिर कैसे देख रहा ‘सिंधु वाला सपना’

नई दिल्ली: भारत के ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि स्थगित करने के बाद पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है। पाकिस्तान अब भारत क नया डर दिखाने की कोशिश कर रहा है कि अगर चीन ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रोक दे तो? न्यूज एजेंसी के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक विशेष सहायक ने हाल ही में कहा है कि भारत ने पाकिस्तान को सिंधु नदी का पानी रोक दिया तो चीन भी भारत के साथ ऐसा कर सकता है। भारत, सिंधु नदी बेसिन में पाकिस्तान से ऊपर है, लेकिन ब्रह्मपुत्र बेसिन में नीचे है, जहां चीन को ऊपरी धारा का फायदा मिलता है।

ऐसे माहौल में चीन के एक सीनियर नीति सलाहकार विक्टर झिकाई गाओ की एक बात वायरल हो रही है। उन्होंने कहा है कि दूसरों के साथ वैसा व्यवहार न करें जैसा आप नहीं चाहते कि वे आपके साथ करें। आइए जानते हैं कि चीन के इस बांध प्रोजेक्ट से भारत को कितना खतरा है और इसे काउंटर करने के लिए भारत किस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।

बांध बनने के बाद पानी पर बढ़ जाएगा चीनी कंट्रोल

दरअसल, असली मुद्दा तिब्बत में ब्रह्मपुत्र पर चीन की 137 बिलियन डॉलर का विशाल डैम प्रोजेक्ट है, जो भारतीय सीमा के पास है। चीन की यह परियोजना हिमालय की विशाल घाटी में बनाई जा रही है, जहां ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश और फिर बांग्लादेश में बहने के लिए एक बड़ा U-टर्न लेती है। भारत इसलिए चिंतित है, क्योंकि बांध चीन को पानी का प्रवाह नियंत्रित करने की ताकत देगा। इस बांध के जरिए बीजिंग जंग के समय में सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ लाने के लिए बड़ी मात्रा में पानी छोड़ सकता है।

जवाब में भारत इस प्रोजेक्ट को लेकर कर रहा काम

चीन के इस प्रोजेक्ट के बाद भारत सरकार ने पिछले साल दिसंबर में अपनी चिंताओं को दर्ज कराया था। भारत अरुणाचल प्रदेश में अपना सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक बांध बनाने के लिए भी तैयार है, जो संघर्ष की स्थिति में संभावित खतरे को कम कर सकता है। 1.5 लाख करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट बीजिंग के निर्माण के जवाब में 9.2 बिलियन क्यूबिक मीटर (bcm) की विशाल जल भंडारण क्षमता के साथ, रणनीतिक रूप से सियांग नदी पर बनाया जा रहा है।

भारत ऐसे रोक सकता है चीन-पाकिस्तान के मंसूबे

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में स्थित एक दूरदराज का गांव पारोंग, को इस इस महत्वाकांक्षी 465 मीटर ऊंची प्रोजेक्ट के लिए संभावित रूप में चिह्नित किया गया है। अध्ययन के लिए ड्रिलिंग मशीनें अगले महीने तक स्थान पर पहुंचने की उम्मीद है। यह वह जगह है, जहां नदी अरुणाचल प्रदेश में बहने से पहले U-टर्न लेती है। चीन के बांध की अनुमानित भंडारण क्षमता 5.5 bcm है, जबकि हमारी 9.2 bcm है, इसलिए अगर चीन अपनी पूरी मात्रा भी छोड़ देता है तो हमारे बांध में उस पानी को एडजस्ट करने की क्षमता होगी।

असम के मुख्यमंत्री ने दिया करारा जवाब

इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के नियंत्रण को लेकर पाकिस्तान के नए डर को दूर करते हुए कहा है कि ब्रह्मपुत्र एक ऐसी नदी है, जो भारत में बढ़ती है, सिकुड़ती नहीं है। असम के सीएम का कहना है कि चीन ब्रह्मपुत्र के कुल पानी के प्रवाह का केवल 30-35% ही देता है, जिसमें तिब्बत में पिघलने वाली बर्फ और कम बारिश शामिल है। बाकी 65-70% पानी भारत में भारी मानसून और बड़ी सहायक नदियों से आता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी भारत के लिए ऊपर से आने वाली नदी नहीं है, यह बारिश से भरने वाली भारतीय नदी प्रणाली है, जो भारत में प्रवेश करने के बाद और मजबूत हो जाती है। सरमा ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर नदी के प्रवाह (लगभग 2,000 से 3,000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड) की तुलना असम के मैदानों में इसकी विशाल वृद्धि हो जाती है, जहां मानसून के दौरान यह 15,000 से 20,000 m³/s तक बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन से पानी के प्रवाह में कमी आने पर असम में हर साल आने वाली बाढ़ को कम करने में मदद मिल सकती है।

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