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भरोसा है सुप्रीम कोर्ट दखल नहीं देगा… वक्फ कानून पर सुनवाई से पहले बोले केंद्रीय मंत्री

नई दिल्ली: वक्फ कानून बनने के बाद भी इसे लेकर अब भी कई तबकों में बहस जारी है। इस मसले पर कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है तो वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो यह तक कह दिया है कि वह इस कानून को अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगी। इस रस्साकशी के बीच अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ कानून में संशोधन को लेकर बड़ी बात कही है।

किरेन रिजिजू ने कानून में संशोधन को लेकर एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट ‘विधायी मामले’ में दखल नहीं देगा। रिजिजू ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ऐलान पर भी सवाल उठाया। अल्पसंख्यक मंत्री ने कहा कि ममता बनर्जी के पद पर बने रहने का कोई नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है।

एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए

किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि उन्हें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट विधायी मामले में दखल नहीं देगा। उन्होंने कहा हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। अगर कल को सरकार न्यायपालिका में दखल देगी, तो यह ठीक नहीं होगा। शक्तियों का बंटवारा स्पष्ट रूप से परिभाषित है। मैंने किसी भी दूसरे विधेयक को इतनी बारीकी से जांचा हुआ नहीं देखा है। इस पर एक करोड़ लोगों ने अपनी राय दी और JPC (संयुक्त संसदीय समिति) की सबसे ज्यादा बैठकें हुईं और राज्यसभा में इस पर रिकॉर्ड बहस हुई।

याचिका सुनने पर जताई थी सहमति

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह विधायिका के क्षेत्र में दखल नहीं देगा। लेकिन संविधान से जुड़े मुद्दों पर अंतिम फैसला लेने वाला होने के नाते, उसने याचिकाकर्ताओं की बात सुनने के लिए सहमति जताई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संशोधित कानून कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, जिसमें समानता का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार शामिल है। बता दें कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून को लेकर सुनवाई होनी है।

क्या बंगाल में नहीं लागू होगा कानून?

दरअसल, ममता बनर्जी ने पिछले साल बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने से इनकार कर दिया था। अब उन्होंने घोषणा की है कि संशोधित वक्फ कानून भी उसी श्रेणी में शामिल होगा।

उन्हें सिर्फ अपने वोट बैंक की फिक्र

ममता बनर्जी के रुख पर सवाल उठाते हुए रिजिजू ने कहा कि इससे पता चलता है कि उन्हें भारत के संविधान पर विश्वास नहीं है। क्या ममता या कोई और लोगों की परवाह नहीं करता है? वे मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझते हैं। यह एक काला दिन होगा, जिस दिन वे अवज्ञा करेंगे। कोई भी जो कहता है कि वे भारत की संसद द्वारा पारित अधिनियम का पालन नहीं करेगा। इसके बाद क्या उसके पास उस पद पर बने रहने और संविधान की किताब रखने का कोई नैतिक और संवैधानिक अधिकार है?

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