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बाजपेयी की तरह मोदी भी बतौर पीएम तीसरे टर्म में पहुंचे RSS मुख्यालय, आगे क्या कुछ होने वाला है?…

मुंबई:पीएम मोदी के नागपुर के दौरे के बाद सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बीजेपी के बीच सबकुछ ठीक हो जाएगा। लोकसभा चुनावों के दौराना बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्‌डा द्वारा दिए गए बयान के बाद संघ कैडर के एक बड़े तबके को नाराज कर दिया था। पीएम मोदी बतौर प्रधानमंत्री पहल बार संघ के मुख्यालय गए। इससे पहले वह गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए जुलाई, 2013 में संघ के मुख्यालय में पहुंचे। पीएम मोदी अपने जीवन पर मौजूदा संघ प्रमुख मोहन भागवत के पिता मधुकर भागवत का प्रभाव मानते हैं। इसका उल्लेखन उन्होंने अपनी किताब ज्योति पुंज में किया है। पीएम मोदी ने पहले प्रधानमंत्री नहीं हैं जो संघ मुख्यालय पहुंचे। इससे पहले बीजेपी के शीर्ष पुरुष भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी भी साल 2000 में संघ के मुख्यालय पहुंचे थे।

क्या 2025 में कुर्सी छोड़ेंगे मोदी?
पीएम मोदी और अटल बिहारी बाजपेयी के दौरों में एक बड़ी समानता यह है कि दोनों ने अपने तीसरे टर्म में संघ मुख्यालय का बतौर पीएम दौरा किया। अटल बिहारी बाजपेयी इसके बाद साल 2004 और फिर 2007 में भी संघ मुख्यालय पहुंचे। जिस तरह से पीएम मोदी अपने जीवन पर मधुकर भागवत का प्रभाव मानते हैं। इसी तरह से अटल बिहारी बाजपेयी संघ के प्रचारक नारायणराव तराटे को बहुत मानते थे। उन्होंने ही बाजपेयी को 1939 में संघ से जोड़ा था। बाजपेयी 2004 में उनकी सेहत को देखते महल के स्थित संघ मुख्यालय गए थे। इसके बाद वह 2007 में दूसरे संघ प्रमुख गुरुजी के शताब्दी वर्ष समारोह में गए थे। पहली बार पीएम रहते हुए बाजपेयी तत्कालीन सरसंघचालक केसी सुदर्शन से मुलाकात के लिए गए थे। बाजपेयी के साल 2002 के दौरे के बाद लालकृष्ण आडवाणी जून, 2002 में उप प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 2004 का चुनाव उनकी अगुवाई में लड़ा गया था।

क्या लग पाएगा पूर्ण विराम?
महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार और संघ के फैसलों पर नजर रखने वाले दयानंद नेने कहते हैं कि 30 मार्च को कई योग थे। माधव नेत्रालय के प्रीमियम सेंटर का शिलान्यास, संघ संस्थापक डॉ हेडगेवार का जन्मदिन और चैत्र नवरात्र के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत के चलते अहम दिन था। ऐसे में पीएम मोदी के दौरे ने इस मौके को औ बड़ा कर दिया। रही बात संघ प्रमुख और पीएम मोदी के बीच बातचीत की तो इसके लिए किसी दौरे की जरूरत नहीं है। नेने कहते हैं कि पीएम मोदी ने अपने दौरे से यह संदेश दिया है कि उनकी नजर में संघ की क्या अहमियत है। वे खुद संघ के पूर्णकालिक प्रचारक रहे हैं। इस दौरे से जो नकारात्मक बातें चल रही थीं। उन पर पूर्ण विराम जरूर लग जाएगा। नेने कहते हैं। इतना जरूर है कि बीजेपी का जो भी नया राष्ट्रीय अध्यक्ष होगा। उस पर जरूर संघ की मुहर होगी। संघ को जो चाहिए, उसी के अनकूल ही फैसला होगा।

सुषमा स्वराज क्यों नहीं बनी अध्यक्ष?
बीजेपी अध्यक्ष के लिए अब तक कई नाम चर्चा में आ चुके हैं लेकिन संघ को जो स्वीकार्य होगा। वही बीजेपी का नया अध्यक्ष बनेगा। संघ को दशकों से जानने वाले एक पदाधिकारी के अनुसार बीजेपी के शीर्ष नेताओं में शामिल रहीं सुषमा स्वराज को कई बार महिला होने के नाते अध्यक्ष बनाने की कोशिश हुई लेकिन उनका नाम आखिर में हर बार कटता रहा क्योंकि वह संघ के बैकग्राउंड से नहीं थी बल्कि समाजवादी यानी सोशलिस्ट पृष्ठभूमि से आती थीं। पीएम मोदी के दौरे के अब यह दिलचस्प हो गया है कि नए अध्यक्ष के किस नाम पर नागपुर की मुहर लगेगी?

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