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एक मूवी ने तोड़ दिया 3500 करोड़ रुपये का सपना! अधर में लटका कंपनी का आईपीओ

नई दिल्ली: क्या कोई बॉलीवुड फिल्म किसी कंपनी के आईपीओ का रास्ता रोक सकती है? बिल्कुल, ऐसा हो चुका है। एक फिल्म ने एक कंपनी के 3500 करोड़ रुपये के आईपीओ का रास्ता रोक दिया है। यह कंपनी कोई और नहीं बल्कि इंदिरा IVF हॉस्पिटल है। वही कंपनी जो फर्टिलिटी क्लीनिक की एक बड़ी चेन बन गई है। हर बड़े शहर में इसका क्लीनिक है।

निर्देश विक्रम भट्ट ने एक संवेदनशील विषय पर फिल्म बनाई है। इसका नाम ‘तुमको मेरी कसम’ है। यह पिछले हफ्ते रिलीज हुई है। इसमें अनुपम खेर और ईशा देओल जैसे कलाकार हैं। फिल्म की कहानी IVF यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन पर आधारित है। फिल्म समीक्षकों को यह फिल्म कुछ खास पसंद नहीं आई। वहीं ऐसा लगता है कि सेबी को भी यह फिल्म पसंद नहीं आई है। फिल्म को लेकर सेबी ने कुछ आपत्तियां जताई हैं। इसके बाद कंपनी ने अपना 3500 करोड़ रुपये का IPO फिलहाल टाल दिया गया है।

फिल्म का आईपीओ से क्या कनेक्शन?

अब आप सोच रहे होंगे कि भला किसी फिल्म का कंपनी के आईपीओ से क्या कनेक्शन हो सकता है? खबरों के अनुसार, इंदिरा IVF हॉस्पिटल के फाउंडर अजय मुरडिया हैं। यह फिल्म उनकी जिंदगी पर आधारित है।

फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे उन्होंने उदयपुर में इंदिरा IVF की शुरुआत की और इसे फर्टिलिटी क्लीनिक की एक बड़ी चेन बनाई। मुरडिया के बेटों को फिल्म का निर्माता बताया जा रहा है। विक्रम भट्ट फिल्म के लेखक भी हैं। सेबी को लगता है कि फिल्म के रिलीज होने का समय सही नहीं है और यह कंपनी को बढ़ावा देने जैसा है।

सेबी की आपत्तियों के बाद इंदिरा IVF को अपना DRHP (Draft Red Herring Prospectus) वापस लेना पड़ा। डीआरएचपी एक तरह का दस्तावेज होता है जिसमें कंपनी के बारे में सारी जानकारी होती है। इसे IPO लाने से पहले सेबी को देना होता है। इस वजह से इस साल का एक बड़ा हेल्थकेयर IPO फिलहाल रुक गया है।

नियमों के उल्लंघन की आशंका

इंदिरा IVF ने पिछले महीने गोपनीय तरीके से सेबी के पास DRHP जमा किया था। कहा जा रहा है कि सेबी को कुछ नियमों के उल्लंघन की आशंका है। सेबी को डर है कि फिल्म रिलीज होने से निवेशकों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं और यह कंपनी को फायदा पहुंचा सकती हैं। सेबी चाहता है कि बाजार में सब कुछ निष्पक्ष तरीके से हो।

अब क्या है कंपनी के पास विकल्प

पिछले साल EQT ने TA एसोसिएट्स और इंदिरा IVF के फाउंडर अजय मुरडिया और उनके बेटों क्षितिज और नीतिज से कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी। इंदिरा IVF भारत में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की बढ़ती मांग को देखते हुए शेयर बाजार में पैसा जुटाना चाहती थी।

आईपीओ टलने के बाद इंदिरा IVF को अपनी फंडिंग की योजना पर फिर से विचार करना होगा। वे या तो बाद में सेबी के पास फिर से DRHP दाखिल कर सकते हैं या फंडिंग के दूसरे विकल्प तलाश सकते हैं।

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