महाराष्ट्र

नासिक कुंभ मेला शुरू होने से पहले ही नाम को लेकर विवाद, अखाड़ों में मतभेद

नासिक : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के 23 मार्च को हुए दौरे के बाद महाराष्ट्र के नासिक में वर्ष 2027 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों में तेजी आ गई है। लेकिन सिंहस्थ कुंभ से पहले इस विशाल मेले के नाम को लेकर मतभेद पैदा हो गए हैं। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान त्र्यंबकेश्वर अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने मांग की थी कि इस उत्सव को त्र्यंबकेश्वर-नासिक सिंहस्थ कुंभ मेला कहा जाए। हालांकि नासिक नगर निगम मुख्यालय में अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई बैठक के दौरान नासिक अखाड़ों के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि नाम नासिक कुंभ मेला ही रखा जाना चाहिए।

नासिक अखाड़ों के साधुओं और महंतों ने यह भी मांग की कि उन्हें राज्य सरकार के स्थापित किए जाने वाले सिंहस्थ कुंभ मेला प्राधिकरण में शामिल किया जाए। वहीं कुंभ के लिए 500 एकड़ से अधिक भूमि स्थायी रूप से आरक्षित की जाए।

क्या बोले डीएम

नाम से संबंधित मांगों के बारे में पूछे जाने पर नासिक के जिलाधिकारी जलज शर्मा ने कहा कि इस मुद्दे से संबंधित जानकारी सरकार को सौंपी जाएगी और उनके निर्देशानुसार निर्णय लिया जाएगा।

गोदावरी नदी के तट पर होगा सिंहस्थ कुंभ

नासिक जिले में कुंभ मेला 14 जुलाई से 25 सितंबर 2027 के बीच गोदावरी नदी के तट पर आयोजित होगा है। यह 12 साल बाद आयोजित किया जाएगा। इससे पहले दिन में, महाराष्ट्र के जल संसाधन और आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने कुंभ की तैयारियों की समीक्षा के लिए त्र्यंबकेश्वर का दौरा किया। राज्य सरकार साधु-महंतों की विभिन्न मांगों को लेकर सकारात्मक है।

वहीं अखाड़े के प्रतिनिधियों ने कहा कि त्र्यंबकेश्वर में विशेषकर कुशावर्त क्षेत्र में संकीर्ण जगह को देखते हुए नर्मदा नदी के किनारे नए घाट बनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि नए कुंडों का निर्माण किया जाना चाहिए तथा सुविधाओं में वृद्धि की जानी चाहिए, जिसे महाजन ने सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है।

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