उत्तरप्रदेश

सील किया गया निकांत-सुकांत का ऑफिस, रिश्वत की रकम होने की आशंका, कोर्ट से सर्च वॉरंट लेकर होगी दफ्तर की तलाशी

लखनऊ: इन्वेस्ट यूपी में निवेशक कंपनी से रिश्वत मांगने के मामले में गोमतीनगर पुलिस ने निकांत और उसके भाई सुकांत के विराट खंड 1/311 स्थित कंपनी के ऑफिस को सील कर दिया है। आशंका है कि दफ्तर में रिश्वत और दलाली की रकम को छिपाया गया है। पुलिस कोर्ट से सर्च वॉरंट लेकर दफ्तर की तलाशी लेगी। वहीं, निकांत की गिरफ्तारी के बाद उसका बड़ा भाई सुकांत अंडरग्राउंड हो गया है। पुलिस उसे भी तलाश कर रही है। आशंका है कि दलाली और रिश्वत की रकम को वह अपनी कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाता था। मामले में ईडी भी जल्द केस दर्ज कर सकता है।

सीज होंगे बैंक खाते, जुटाया जा रहा है ब्योरा
पुलिस ने निकांत जैन और उसके परिवारीजनों के बैंक खातों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। पुलिस निकांत जैन के बैंक खातों को भी सीज करवाने की तैयारी में है। साथ ही उसके भाई द्वारा संचालित कंपनियों और बंद हो चुकी कंपनियों के बारे में भी डिटेल जुटाई जा रही है। कंपनियों के खातों से हुए ट्रांजेक्शन का ब्योरा जुटाया जा रहा है। आशंका है कि शेल कंपनियों के जरिए रिश्वत और दलाली की रकम की मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही थी। मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को देखते हुए ईडी भी सक्रिय हो गई है, उसने भी निकांत से जुड़ी जानकारियां जुटाना शुरू कर दिया है।

पिता भी जा चुके हैं जेल!
निकांत के परिवार के बारे में जानकारी के दौरान सामने आया है कि उसके दिवंगत पिता भी लॉटरी और राजकीय कर्मचारियों को मिट्टी के तेल की सप्लाई से जुड़े मामले में जेल जा चुके हैं। पुलिस इसके बारे में जानकारी जुटा रही है। यह भी सामने आया है कि बाल विकास पुष्टाहार विभाग के लिए बच्चों को पंजीरी वितरण का काम भी निकांत का परिवार कर चुका है। बीते कुछ सालों में निकांत, उसके भाई सुकांत की कंपनियों ने किन-किन सरकारी ठेकों में काम किया इसका ब्योरा भी जुटाया जा रहा है।

दोनों फोन जांच के लिए भेजेंगे फरेंसिक लैब
निकांत के पास से गिरफ्तारी के दौरान दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। उनकी फरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। पुलिस को दोनों ही फोन से कई अधिकारियों से बातचीत, कुछ विशेष नंबरों पर पैसे के लेन-देन से जुड़ी डिटेल व ठेकों को लेकर हुई बातचीत का ब्योरा मिला है। आशंका है कि कुछ डेटा निकांत के द्वारा डिलीट भी किया गया है, जिसको एफएसएल के जरिए रिकवर किया जाएगा।

‘जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई, प्रॉजेक्ट को दी जाए मंजूरी’
SAEL सोलर पी6 प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि विश्वजीत दत्ता ने बताया कि निवेश के लिए जिस निजी व्यक्ति से मिलने की बात कही गई, उसने निवेश के लिए 5% नकद यानी 400 करोड़ रुपये मांगे। कंपनी के मालिक इस प्रॉजेक्ट को दूसरे प्रदेश में ले जा सकते हैं लेकिन वह चाहते हैं रिश्वतखोरी के जिम्मेदारों पर कार्रवाई के साथ इस प्रॉजेक्ट को यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी में ही मंजूरी दी जाए।

विश्वजीत ने कहा कि इन्वेस्ट यूपी की जिस मूल्यांकन समिति ने पहले SAEL सोलर पी6 प्राइवेट लिमिटेड के प्रॉजेक्ट को हाई पावर कमिटी में ले जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बाद में उसमें बदलाव करते हुए समिति के सामने दोबारा प्रस्तुत करने की अनुशंसा की। उस समिति में इन्वेस्ट यूपी के तत्कालीन सीईओ अभिषेक प्रकाश के अलावा कई और अधिकारी शामिल थे।

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